Gold Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,640 डॉलर के करीब, इंदौर में 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम
अंतरराष्ट्रीय बुलियन वायदा बाजार में Gold की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है। सोना बढ़कर करीब 4,640 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले तीन महीनों का ऊंचा स्तर माना जा रहा है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंताओं, महंगाई के दबाव और डॉलर की कमजोरी के बीच निवेशकों का रुझान एक बार फिर सोने की ओर बढ़ा है। इसका असर भारतीय सराफा बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी
अमेरिका में महंगाई और संभावित आर्थिक मंदी को लेकर निवेशकों की चिंताएं बनी हुई हैं। इसके साथ ही अमेरिकी सरकार की वित्तीय स्थिति और बढ़ते कर्ज को लेकर भी बाजार में चर्चा है। ऐसी परिस्थितियों में निवेशक अक्सर सोने को सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर देखते हैं।
बाजार में इस समय ‘डेबेसमेंट ट्रेड’ की चर्चा भी तेज है। इसका आशय ऐसी परिसंपत्तियों में निवेश से है, जिनसे मुद्रा की क्रय शक्ति कमजोर होने की स्थिति में बचाव की उम्मीद की जाती है। डॉलर में कमजोरी की आशंका के बीच सोने को इसका प्रमुख लाभार्थी माना जा रहा है।
लगातार दूसरे दिन भी तेजी
पिछले सप्ताह से शुरू हुई सोने की तेजी इस सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भी जारी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत रुख का असर घरेलू बुलियन बाजार पर भी पड़ा।
इंदौर सराफा बाजार में सोना केडबरी 500 रुपये बढ़कर 1,58,000 रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। लगातार बढ़ते भावों के कारण बाजार में कारोबारियों और निवेशकों की नजर सोने की अगली दिशा पर बनी हुई है।
स्कॉट बेसेंट की घोषणा के बाद बढ़ी हलचल
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट की ओर से लंबी अवधि की ट्रेजरी प्रतिभूतियों के बायबैक से जुड़ी घोषणा के बाद बाजार में हलचल बढ़ी। बायबैक राशि को प्रत्येक ऑपरेशन में कम से कम 4 अरब डॉलर तक बढ़ाने की बात सामने आई है।
इस घोषणा के बाद शुरुआती कारोबार में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में नरमी देखने को मिली। डॉलर में कमजोरी आमतौर पर सोने के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि इससे अन्य मुद्राओं में सोना खरीदने वाले निवेशकों के लिए इसकी कीमत अपेक्षाकृत आकर्षक हो जाती है।
सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहा रुझान
सोने की कीमतों में मौजूदा तेजी के पीछे केवल एक कारण नहीं है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता, महंगाई, ब्याज दरों की दिशा, डॉलर की कमजोरी और वैश्विक आर्थिक जोखिम जैसे कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं।
जब शेयर बाजार या मुद्रा बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशकों का एक वर्ग अपने पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाता है। यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर सोने की मांग मजबूत बनी हुई है।
भारतीय बाजार पर भी असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारतीय बाजारों पर पड़ता है। भारत में सोने की घरेलू कीमत अंतरराष्ट्रीय भाव के साथ-साथ डॉलर-रुपये की विनिमय दर, आयात लागत, स्थानीय मांग और बाजार की परिस्थितियों से प्रभावित होती है।
इंदौर में सोने का भाव 1.58 लाख रुपये प्रति दस ग्राम तक पहुंचना इसी वैश्विक तेजी का असर माना जा रहा है। त्योहारों और आगामी मांग को देखते हुए घरेलू बाजार में भी सोने की कीमतों पर नजर बनी हुई है।
आगे क्या रहेगा रुख?
अब बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों और वहां की मौद्रिक नीति के संकेतों पर रहेगी। यदि महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता को लेकर चिंताएं बनी रहती हैं तथा डॉलर में कमजोरी आती है, तो सोने को आगे भी समर्थन मिल सकता है।
हालांकि, इतनी तेज बढ़त के बाद कीमतों में बीच-बीच में मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है। डॉलर में मजबूती या अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अपेक्षाओं में बदलाव होने पर सोने की कीमतों पर दबाव आ सकता है।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 4,640 डॉलर प्रति औंस और इंदौर में 1,58,000 रुपये प्रति दस ग्राम के भाव ने सोने के बाजार को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। निवेशकों के साथ-साथ आम खरीदारों की नजर भी अब आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा पर रहेगी।
नोट: स्थानीय सराफा बाजार में सोने के भाव कारोबार के समय, शुद्धता और स्थानीय बाजार की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
