भारत में Gold -Silver की कीमतों में हल्का उतार-चढ़ाव, अप्रैल में दिखा बड़ा बदलाव
भारत में गुरुवार, 30 अप्रैल को Gold और Silver की कीमतों में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वैश्विक बाजारों में जारी अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय तनावों और डॉलर की चाल के बीच भारतीय सर्राफा बाजार में भी लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के दामों में मामूली बढ़त दर्ज की गई है, जबकि चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई।
अप्रैल का महीना सोने-चांदी के बाजार के लिए बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। महीने के दौरान कई बार कीमतों में तेज उछाल आया तो कई बार गिरावट भी दर्ज की गई। निवेशकों और खरीदारों के लिए यह समय अनिश्चितताओं से भरा रहा।
Gold की कीमतों में आज मामूली बढ़त
30 अप्रैल को भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में हल्की बढ़त दर्ज की गई है।
- 24 कैरेट सोना: 22 रुपये प्रति ग्राम बढ़कर 15,066 रुपये प्रति ग्राम
- 22 कैरेट सोना: 20 रुपये प्रति ग्राम बढ़कर 13,810 रुपये प्रति ग्राम
- 18 कैरेट सोना: 16 रुपये प्रति ग्राम बढ़कर 11,299 रुपये प्रति ग्राम
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और डॉलर के उतार-चढ़ाव का सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ता है। इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर आकर्षित करता है, जिससे सोने की मांग बढ़ती है।
अप्रैल महीने में सोने का पूरा सफर
अप्रैल 2026 में सोने की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। महीने की शुरुआत में जहां सोना स्थिर था, वहीं बीच-बीच में इसमें तेज बढ़त भी दर्ज की गई।
भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत अप्रैल में बढ़कर 15,57,800 रुपये प्रति 100 ग्राम तक पहुंच गई थी, जो इस महीने का अब तक का सबसे उच्च स्तर माना गया। हालांकि, महीने के अंत तक इसमें गिरावट भी देखने को मिली।
कुल मिलाकर अप्रैल महीने में 24 कैरेट सोने की कीमत में लगभग 22,900 रुपये प्रति 100 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतों में भी समान उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
Gold की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण
सोने की कीमतों में बदलाव कई वैश्विक और घरेलू कारणों पर निर्भर करता है। इस महीने कीमतों में उतार-चढ़ाव के पीछे प्रमुख कारण निम्न रहे:
1. अंतरराष्ट्रीय तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच संबंधों को लेकर बनी अनिश्चितता ने बाजार को प्रभावित किया। जब भी वैश्विक तनाव बढ़ता है, निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं।
2. कच्चे तेल की कीमतें
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया, जिससे महंगाई की आशंका बढ़ी और सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा।
3. डॉलर का उतार-चढ़ाव
अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी का सीधा असर सोने पर पड़ता है। डॉलर मजबूत होने पर सोने की कीमतों में गिरावट आती है और कमजोर होने पर कीमतें बढ़ती हैं।
4. निवेशकों की मांग
शेयर बाजार में अस्थिरता के चलते निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मानकर इसमें पैसा लगाते हैं, जिससे इसकी कीमत बढ़ जाती है।
Silver की कीमतों में हल्की गिरावट
सोने के विपरीत चांदी की कीमतों में आज मामूली गिरावट दर्ज की गई है। बाजार के अनुसार:
- चांदी की कीमत में 250 रुपये प्रति ग्राम की गिरावट
- 2,50,000 रुपये प्रति किलोग्राम की कमी दर्ज की गई
चांदी का उपयोग सिर्फ आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग औद्योगिक क्षेत्रों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और मेडिकल उपकरणों में भी बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए इसकी कीमतें वैश्विक मांग और उत्पादन पर भी निर्भर करती हैं।
Silver का पिछले महीनों का प्रदर्शन
चांदी की कीमतों में भी पिछले कुछ महीनों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
- जनवरी 2026 में चांदी की कीमत अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी, जो लगभग 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के करीब थी।
- फरवरी में इसमें तेज गिरावट दर्ज की गई और कीमतें नीचे आ गईं।
- मार्च और अप्रैल में इसमें स्थिरता के साथ हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की कीमतें औद्योगिक मांग पर अधिक निर्भर करती हैं, इसलिए इसमें अस्थिरता अधिक रहती है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में सोने और चांदी दोनों में निवेश सोच-समझकर करना चाहिए। वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव संभव है।
सोने को लंबे समय तक सुरक्षित निवेश माना जाता है, जबकि चांदी में अधिक जोखिम के साथ अधिक लाभ की संभावना रहती है।
त्योहार और मांग का असर
भारत में शादी और त्योहारों के मौसम में सोने की मांग काफी बढ़ जाती है। जैसे-जैसे मांग बढ़ती है, कीमतों में भी तेजी देखने को मिलती है। वहीं चांदी का उपयोग पूजा-पाठ और घरेलू उपयोग में होने के कारण इसकी मांग भी स्थिर रहती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, 30 अप्रैल 2026 को सोने की कीमतों में हल्की बढ़त और चांदी की कीमतों में मामूली गिरावट देखने को मिली है। अप्रैल का महीना पूरी तरह से अस्थिर रहा, जिसमें निवेशकों को कई बार लाभ और कई बार नुकसान दोनों देखने को मिले।
आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, डॉलर की चाल और कच्चे तेल की कीमतों पर सोने-चांदी का बाजार पूरी तरह निर्भर रहेगा। इसलिए निवेशकों को सतर्क रहते हुए ही निर्णय लेना चाहिए।
