Gold Sale Down: भारत में सोने की मांग में भारी गिरावट, इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ोतरी
भारत में सोने के बाजार पर बड़ा झटका
भारत में Gold के बाजार को हाल के दिनों में बड़ा झटका लगा है। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े सोने उपभोक्ता देश में सोने की मांग में अचानक तेज गिरावट देखने को मिली है। देश में सोने की सालाना खपत लगभग 800 से 850 टन के बीच रहती है, लेकिन मौजूदा हालात में यह मांग तेजी से नीचे आई है।
मुंबई के स्पॉट मार्केट में 999 शुद्धता वाला सोना करीब 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर ट्रेड कर रहा है (जीएसटी अतिरिक्त)। हालांकि कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद मांग में भारी कमी दर्ज की गई है।
दो हफ्तों में 70% तक गिर गई मांग
ताजा आंकड़ों के अनुसार, 27 मई को समाप्त हुए पखवाड़े में सोने की मांग घटकर केवल 7.5 टन रह गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह लगभग 25 टन थी। यह गिरावट लगभग 70 प्रतिशत तक मानी जा रही है, जो बाजार के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार यह गिरावट किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई आर्थिक, नीतिगत और वैश्विक परिस्थितियों के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है।
सरकार की नीतिगत बदलाव से बढ़ा दबाव
13 मई को सरकार ने सोने पर आयात शुल्क (Import Duty) 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया। इस कदम का उद्देश्य आयात को नियंत्रित करना और व्यापार घाटे को कम करना था।
लेकिन इस निर्णय के बाद सोने की कीमतों पर सीधा असर पड़ा। आयात शुल्क बढ़ने से सोना बाजार में और महंगा हो गया, जिससे खुदरा मांग में गिरावट आनी शुरू हो गई।
ड्यूटी बढ़ने के बाद सोने पर प्रभावी टैक्स 9.18 प्रतिशत से बढ़कर 18.45 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे ज्वैलरी और निवेश दोनों क्षेत्रों में खरीदारी कम हो गई है।
पीएम मोदी की अपील का भी दिखा असर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह अपील भी मांग में गिरावट का एक महत्वपूर्ण कारण रही, जिसमें उन्होंने लोगों से एक वर्ष तक सोना खरीदने से परहेज करने की सलाह दी थी।
हालांकि यह अपील सीधे तौर पर बाध्यकारी नहीं थी, लेकिन इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव बाजार पर पड़ा। कई उपभोक्ताओं ने इसे गंभीरता से लिया, जिससे खरीदारी की गति धीमी पड़ गई।
ज्वैलरी ब्रांड जॉयलुक्कास के चेयरमैन जॉय अलुक्कास के अनुसार, बाजार में डिमांड में लगभग 35 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई है। उन्होंने कहा कि यह गिरावट केवल एक कारण से नहीं बल्कि कई कारणों का संयुक्त प्रभाव है।
असंगठित बाजार सबसे ज्यादा प्रभावित
भारत के सोना व्यापार का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा असंगठित क्षेत्र (Unorganized Sector) से जुड़ा है। छोटे ज्वैलर्स और स्थानीय व्यापारी इस गिरावट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
बढ़ी हुई लागत और कमजोर मांग के कारण इन कारोबारियों के लिए व्यापार बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। कई छोटे दुकानदारों की बिक्री में भारी गिरावट देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संगठित रिटेल चेन की तुलना में असंगठित बाजार अधिक संवेदनशील होता है और नीतिगत बदलावों का असर यहां तेजी से दिखाई देता है।
महंगाई ने घटाई उपभोक्ता की खरीद क्षमता
देश में लगातार बढ़ती महंगाई ने भी उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता को प्रभावित किया है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, खाद्य पदार्थों की महंगाई और दैनिक खर्चों में वृद्धि ने आम लोगों के बजट को दबाव में डाल दिया है।
IBJA के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता के अनुसार, जब आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ता है तो वह सबसे पहले गैर-जरूरी या विलासिता वाली खरीदारी में कटौती करता है, जिसमें सोना प्रमुख है।
वैश्विक कारण भी जिम्मेदार
सोने की मांग में गिरावट के पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी जिम्मेदार हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक तनावों ने भी बाजार को प्रभावित किया है।
रुपये की कमजोरी ने आयातित वस्तुओं की कीमत बढ़ा दी है, जिससे भारत में सोना और भी महंगा हो गया है।
निवेश मांग में भी गिरावट
सोना केवल गहनों के रूप में ही नहीं, बल्कि निवेश के रूप में भी खरीदा जाता है। लेकिन मौजूदा हालात में निवेश मांग में भी गिरावट देखने को मिली है।
सोने के बार और कॉइन की मांग में कमी आई है, हालांकि मार्च तिमाही में यह 62.3 टन तक पहुंची थी, जो पिछले वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक थी।
यह दिखाता है कि लंबे समय के निवेशक अभी भी सोने में रुचि रखते हैं, लेकिन अल्पकालिक खरीदारी में कमी आई है।
ज्वैलर्स की स्थिति कमजोर
ज्वैलर्स का कहना है कि बाजार में अनिश्चितता के कारण ग्राहक खरीदारी टाल रहे हैं। शादी-विवाह के सीजन के बावजूद अपेक्षित मांग नहीं आ रही है।
कई व्यापारी मानते हैं कि ग्राहक अब कीमतों के स्थिर होने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे बाजार में धीमापन आ गया है।
प्रभावी टैक्स बढ़ने से बढ़ी कीमत
आयात शुल्क बढ़ने के बाद GST समेत कुल टैक्स बोझ बढ़कर 18.45 प्रतिशत हो गया है। यह दर पहले की तुलना में काफी अधिक है।
इस वजह से भारत में सोने की खुदरा कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे मांग प्रभावित हो रही है।
धार्मिक और मौसमी कारण
विशेषज्ञों के अनुसार इस समय अधिक मास चल रहा है, जिसे शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इस कारण भी सोने की खरीदारी में गिरावट आई है।
भारत में सोने की खरीदारी अक्सर त्योहारों और शुभ अवसरों से जुड़ी होती है, इसलिए मौसमी प्रभाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आगे की स्थिति क्या होगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में सोने की मांग में सुधार संभव है, लेकिन यह वैश्विक परिस्थितियों और घरेलू आर्थिक स्थिति पर निर्भर करेगा।
त्योहारों का मौसम, शादियों का सीजन और कीमतों में स्थिरता आने पर बाजार में सुधार देखा जा सकता है।
निष्कर्ष: Gold के बाजार में अनिश्चितता का दौर
कुल मिलाकर, भारत का सोना बाजार इस समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी, पीएम मोदी की अपील, महंगाई और वैश्विक आर्थिक दबावों ने मिलकर मांग को प्रभावित किया है।
हालांकि लंबे समय में सोना एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन फिलहाल उपभोक्ता सतर्क हैं और खरीदारी से बच रहे हैं।
आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या बाजार में स्थिरता लौटती है या यह दबाव जारी रहता है।
