खुश रहने के लिए सदा परमात्मा का धन्यवाद करें: ब्रह्माकुमारी वीणा दीदी
ज्ञानशिखर ओमशांति भवन में चल रहे ‘गीता ज्ञान रहस्य’ अनुभूति शिविर में जीवन को सकारात्मक बनाने के सूत्र बताए
इंदौर, 29 सितंबर। ज्ञानशिखर ओमशांति भवन में आयोजित चार दिवसीय ‘गीता ज्ञान रहस्य’ अनुभूति शिविर में ब्रह्माकुमारी वीणा दीदी ने गीता के आध्यात्मिक संदेश और दैनिक जीवन में उसकी उपयोगिता पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि मनुष्य अक्सर परमात्मा के सामने अपनी इच्छाएं और मांगें रखते हैं और मांग पूरी नहीं होने पर भगवान से नाराज भी हो जाता है। इसके विपरीत, जो कुछ जीवन में मिला है उसके लिए परमात्मा का सच्चे मन से धन्यवाद करना चाहिए। कृतज्ञता का भाव जीवन में प्रसन्नता बनाए रखने में सहायक होता है।
ब्रह्माकुमारी वीणा दीदी ने कहा कि गीता को केवल युद्ध के संदर्भ में देखने के बजाय उसके योग संबंधी संदेश को समझना चाहिए। उन्होंने बताया कि गीता के विभिन्न अध्यायों में विशाद योग, सांख्य योग और कर्मयोग जैसे प्रसंग आते हैं। योग के माध्यम से व्यक्ति अपने कर्मों को श्रेष्ठ बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
कर्मों को योग से जोड़ने की सीख
उन्होंने कहा कि जीवन एक खेत के समान है और हमारे कर्म उसमें बोए जाने वाले बीज हैं। यदि कर्म रूपी बीज अच्छे होंगे तो उनके परिणाम भी अच्छे प्राप्त होंगे। अपने कर्मों को योग से जोड़ने के लिए दैनिक जीवन में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
उन्होंने भोजन बनाने और भोजन करने के दौरान टीवी या मोबाइल से दूरी बनाए रखने की बात कही। उनका कहना था कि भोजन बनाते और ग्रहण करते समय पालनहार परमात्मा तथा अन्नदाता किसान के प्रति कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए। इससे परिवार में सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद मिल सकती है।

ब्रह्माकुमारी वीणा दीदी ने कहा कि प्रत्येक कार्य को पूर्ण मनोभाव से और परमात्मा द्वारा दी गई जिम्मेदारी समझकर करना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति घर में झाड़ू लगाने का कार्य कर रहा है तो उसे केवल बाहरी स्वच्छता तक सीमित न रखते हुए अपने अंतरमन की स्वच्छता पर भी चिंतन करना चाहिए।
‘ज्ञान में समाहित है जीवन का सत्य परिचय’
इंदौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने कहा कि वर्तमान समय में योगेश्वर ज्ञान सागर परमात्मा के माध्यम से मनुष्य को अपने वास्तविक परिचय, परमात्मा के परिचय और सृष्टि चक्र के ज्ञान को समझने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि इस ज्ञान में जीवन से जुड़े अनेक आध्यात्मिक पहलुओं का समावेश है। उन्होंने जानकारी दी कि ज्ञानशिखर में अगले दिन से सात दिवसीय कोर्स आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रतिभागियों को इस ज्ञान की अनुभूति कराने का प्रयास किया जाएगा।
‘गीता ज्ञान रहस्य’ अनुभूति शिविर के माध्यम से प्रतिभागियों को गीता के आध्यात्मिक संदेश को दैनिक जीवन से जोड़ने, कर्मों में सकारात्मकता लाने और कृतज्ञता के भाव के साथ जीवन जीने के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
