जीतू पटवारी का तीखा हमला — “मासूम बच्चों की मौत, शिवराज नहीं बल्कि मोहन सरकार के भ्रष्ट सिस्टम का प्रमाण”
भोपाल।
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने छिंदवाड़ा में नकली और जहरीली खांसी की सिरप ‘कोल्ड्रिफ’ के सेवन से हुई मासूम बच्चों की मौतों पर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि यह घटना “सरकार की आपराधिक लापरवाही और पूरे सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार का भयावह उदाहरण है।”
पत्रकारों से चर्चा के दौरान पटवारी ने कहा कि यह कोई साधारण प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि “शासन-प्रशासन में फैली सड़ांध और मिलीभगत का जीवंत प्रमाण” है।
उन्होंने कहा, “जब एक जहरीली नकली दवा 17 मासूमों की जान ले लेती है, तो इसका अर्थ यही है कि यह सिस्टम इंसान की जान से ज्यादा कमीशन की परवाह करता है।”
17 मासूमों की मौत — सरकार की चुप्पी शर्मनाक
कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि कल तक 16 बच्चों की मौत हो चुकी थी और आज एक और मासूम ने दम तोड़ दिया। इस प्रकार अब तक 17 मासूमों की जान जा चुकी है, जबकि कई बच्चे अभी भी अस्पतालों में वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिर्फ औपचारिकता निभाने छिंदवाड़ा क्यों गए?
“क्या उन्होंने वेंटिलेटर पर पड़े बच्चों के इलाज के लिए कोई ठोस व्यवस्था की? क्या दोषी दवा कंपनी पर तुरंत कार्रवाई हुई? क्या किसी मंत्री ने पीड़ित परिवारों के आंसू पोंछे?”
पटवारी ने कहा, “मुख्यमंत्री का यह व्यवहार संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। एक ओर मासूमों की लाशें उठ रही हैं, दूसरी ओर सरकार मूकदर्शक बनी बैठी है। पूरा सिस्टम कमीशनखोरी की दलदल में डूबा है — यही है भाजपा के ‘डबल इंजन’ का असली विकास मॉडल।”
कलेक्टर को हटाना — ‘डैमेज कंट्रोल’ की दिखावटी चाल
सरकार द्वारा कलेक्टर को हटाने के फैसले पर पटवारी ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा,
“कलेक्टर को हटाना सिर्फ मीडिया में शोर दबाने और असली दोषियों को बचाने की साजिश है। अगर वही कलेक्टर रहते तो शायद स्थिति को समय रहते संभाल लिया जाता। यह कदम जनता को गुमराह करने का प्रयास है।”
उन्होंने पूछा, “कलेक्टर को हटाकर क्या सरकार ने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली? अगर कलेक्टर दोषी हैं तो स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव को क्यों नहीं हटाया गया?”
स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग — “सरकार क्यों बचा रही है दोषियों को?”
पटवारी ने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के तत्काल इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि “राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है, लेकिन मंत्री अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं।”
उन्होंने तंज कसते हुए कहा,
“राजेंद्र शुक्ल इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे? क्या मुख्यमंत्री उन्हें बचा रहे हैं क्योंकि वे खुद को अगला मुख्यमंत्री मानने का सपना देख रहे हैं?”
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में “कमीशनखोरी” का बोलबाला है।
“फूड कंट्रोलर से लेकर ड्रग कंट्रोलर तक सबकी जेब में कमीशन का खेल चलता है। बिना रिश्वत कोई दवा पास नहीं होती। यही कारण है कि जहरीली दवाएँ खुलेआम बिक रही हैं और सरकार आँख मूँदकर देख रही है।”
नकली दवाओं की फैक्ट्री — मौत का कारोबार जारी
पटवारी ने कहा, “यह पहली बार नहीं है जब ‘स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स’ की दवाओं से बच्चों की जान गई हो। पहले भी इसी कंपनी की दवाइयों से मौतें हुई थीं, फिर भी मध्यप्रदेश में उसकी बिक्री जारी रही। यह साफ दर्शाता है कि फूड और ड्रग विभाग भ्रष्टाचार में लिप्त है।”
उन्होंने खुलासा किया कि “फूड कंट्रोलरों को 50 प्रतिशत तक कमीशन मिलता है। जब तक जेबें गर्म नहीं होतीं, तब तक किसी दवा को मंजूरी नहीं मिलती।”
जातिवाद और संरक्षण का आरोप
पटवारी ने यह भी आरोप लगाया कि “स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को इसलिए नहीं हटाया जा रहा क्योंकि वे ‘यादव’ समुदाय से हैं। सरकार निर्णय जाति देखकर लेती है, न्याय देखकर नहीं।”
उन्होंने कहा, “यह सरकार मगरमच्छ की तरह है — ऊपर से शांत दिखती है, लेकिन अंदर से जानलेवा है। मोहन सरकार का कोई भी मंत्री ईमानदारी से काम नहीं कर रहा, पूरा मंत्रिमंडल भ्रष्टाचार की दलदल में धंसा हुआ है।”
“17 बच्चों की जान सिस्टम ने ली है, भगवान ने नहीं”
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरकार बार-बार इसे “दुर्घटना” बता रही है, जबकि यह “सिस्टम की हत्या” है।
“25 बच्चों की जान लापरवाही और भ्रष्टाचार ने ली है। यह प्रशासनिक हत्या है, प्राकृतिक नहीं।”
उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य मंत्री मौके पर नहीं पहुंचे, प्रभारी मंत्री गायब हैं, स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव भी नहीं पहुंचे। ऐसी सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।”
कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें
पटवारी ने इस भयावह त्रासदी को लेकर सरकार के खिलाफ तीन ठोस मांगें रखीं:
1️⃣ स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल, स्वास्थ्य आयुक्त और ड्रग कंट्रोलर समेत सभी जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए।
2️⃣ नकली दवा कंपनियों की गहन जांच की जाए और कमीशनबाजी की पूरी जड़ उखाड़ी जाए।
3️⃣ पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए, और सभी बच्चों के इलाज की पूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार उठाए।
कांग्रेस का राज्यव्यापी आंदोलन — 9 अक्टूबर को कैंडल मार्च
पटवारी ने घोषणा की कि 9 अक्टूबर को पूरे मध्यप्रदेश में हर जिला और ब्लॉक मुख्यालय पर कांग्रेस कार्यकर्ता कैंडल मार्च निकालेंगे।
उन्होंने कहा, “यह सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि सरकार की संवेदनहीनता के खिलाफ एक चेतावनी है।”
उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार का यह लापरवाह चरित्र अब अपराध की सीमा पार कर चुका है। जिनके शासन में मासूम मर रहे हैं, उन्हें सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। कांग्रेस इस लड़ाई को सड़क से लेकर विधानसभा तक लड़ेगी और दोषियों को सजा दिलाकर रहेगी।”
अंतिम प्रहार — “यह सरकार इंसानियत नहीं, भ्रष्टाचार से चलती है”
पटवारी ने कहा, “मध्यप्रदेश में मौत अब सरकारी फाइल बन चुकी है। जिनके बच्चे मर गए, वे मुआवजे की लाइन में हैं, और मंत्री मीडिया मैनेजमेंट में लगे हैं। यही है भाजपा सरकार का असली चेहरा — जो ‘जनसेवा’ की बातें करती है लेकिन जनता के जीवन से खिलवाड़ करती है।”
उन्होंने अंत में कहा —
“यह सरकार भ्रष्टाचार से चलती है, इंसानियत से नहीं। मासूम बच्चों की मौतें भगवान की नहीं, मोहन सरकार की देन हैं।”

