दीपावली पर इंदौर के राजवाड़ा में सजेगी पारंपरिक चहल-पहल — महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दिए निर्देश, कहा “स्वदेशी दीपावली को सम्मान के साथ मनाएँ”
इंदौर, मध्य प्रदेश।
त्योहारों की रौनक अब इंदौर की सड़कों पर लौट रही है। इस वर्ष भी दीपावली के अवसर पर राजवाड़ा क्षेत्र और शहर के पारंपरिक बाजारों में लगने वाली रेहड़ी-पटरी की दुकानें अपने पुराने अंदाज में सजेंगी।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नगर निगम अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राजवाड़ा सहित अन्य पारंपरिक बाजारों में रेहड़ी-पटरी व्यापारियों को दीपावली के दौरान अपनी दुकानें लगाने की अनुमति दी जाए ताकि परंपरा और आजीविका दोनों सुरक्षित रहें।
🌟 “परंपरा को बनाए रखते हुए स्वदेशी दीपावली मनाएँ” — महापौर भार्गव
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि दीपावली सिर्फ एक त्यौहार नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और स्वदेशी भावना का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी राजवाड़ा क्षेत्र में दीपावली की पारंपरिक चहल-पहल बनी रहेगी, ताकि स्थानीय व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों की आजीविका पर कोई असर न पड़े।
“राजवाड़ा और आसपास के इलाकों में वर्षों से दीपावली के दौरान छोटी दुकानों, मिट्टी के दीपों, सजावट और मिठाई की दुकानों का विशेष महत्व रहा है।
इन बाजारों में स्थानीय लोग न सिर्फ खरीदारी करते हैं बल्कि पारंपरिक दीपावली की खुशियाँ भी महसूस करते हैं।
इसलिए नगर निगम का दायित्व है कि इन परंपरागत दुकानों को सम्मान के साथ व्यापार का अवसर मिले,” — महापौर पुष्यमित्र भार्गव।
🪔 राजवाड़ा की रौनक और स्वदेशी भावना
राजवाड़ा बाजार सदियों से इंदौर की सांस्कृतिक पहचान का केंद्र रहा है। दीपावली पर यहाँ की गलियाँ दीपों की रोशनी, रंगीन झालरों और मिठाइयों की खुशबू से भर जाती हैं।
महापौर ने कहा कि इस वर्ष “स्वदेशी दीपावली” के नारे को आगे बढ़ाने के लिए सभी नागरिकों से अपील है कि वे स्थानीय उत्पादों और हस्तनिर्मित वस्तुओं की खरीदारी करें, जिससे छोटे व्यापारियों को आर्थिक सहयोग मिले।
उन्होंने कहा कि “इंदौर हमेशा स्वच्छता और संस्कृति में अग्रणी रहा है। अब हम ‘स्वदेशी दीपावली’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर आर्थिक आत्मनिर्भरता का संदेश भी देंगे।”
💬 नगर निगम को दिए निर्देश
महापौर ने नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दीपावली से पहले ही राजवाड़ा और आसपास के इलाकों की सड़कों की सफाई, रोशनी और यातायात व्यवस्था दुरुस्त की जाए।
साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि रेहड़ी-पटरी व्यापारियों को अपनी दुकानों के लिए उचित स्थान मिले और त्योहार के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।
“त्योहारों में नागरिकों को आनंद के साथ खरीदारी का माहौल मिले।
प्रशासन की जिम्मेदारी है कि परंपरा और सुविधा दोनों का संतुलन बना रहे,” — महापौर भार्गव ने कहा।
🌼 छोटे व्यापारियों में खुशी की लहर
महापौर के इस निर्णय से इंदौर के रेहड़ी-पटरी व्यापारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
हर वर्ष दीपावली पर हजारों छोटे दुकानदार मिट्टी के दीप, दीये, मूर्तियाँ, सजावट सामग्री, मिठाइयाँ और खिलौने बेचते हैं।
पिछले वर्षों में यातायात और व्यवस्था के कारण कुछ दुकानों को अस्थायी रूप से हटाया गया था, लेकिन अब महापौर के निर्देश से सभी पारंपरिक दुकानें “मान-सम्मान के साथ” लग सकेंगी।
🪔 “स्वदेशी दीपावली” को बढ़ावा देने का संकल्प
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि इस वर्ष सभी लोग “मेड इन इंडिया” वस्तुओं का उपयोग करें।
मिट्टी के दीप, हस्तनिर्मित सजावट और स्थानीय मिठाइयाँ खरीदकर न सिर्फ परंपरा को जीवित रखें, बल्कि हजारों परिवारों की आजिविका को भी रोशन करें।
उन्होंने कहा —
“हम सब मिलकर स्वदेशी दीपावली मनाएँगे।
जब हर घर में स्वदेशी दीप जलेंगे, तभी सच्चे अर्थों में ‘वोकल फॉर लोकल’ का संकल्प पूरा होगा।”
🏮 प्रशासन की तैयारी और यातायात व्यवस्था
नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस ने मिलकर दीपावली के लिए यातायात योजना तैयार की है।
राजवाड़ा और सराफा क्षेत्र में भीड़ के बावजूद व्यवस्था बनाए रखने के लिए अस्थायी पार्किंग ज़ोन, स्वच्छता दल और प्रकाश व्यवस्था की तैयारी की जा रही है।
नगर निगम कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि दीपावली से पहले सड़क किनारों की सफाई और रंग-रोगन का कार्य पूरा कर लिया जाए।
💖 नागरिकों के लिए अपील
महापौर भार्गव ने कहा कि “दीपावली के अवसर पर शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है।”
उन्होंने दुकानदारों से भी अपील की कि वे अपने दुकानों के आसपास सफाई बनाए रखें और प्लास्टिक का उपयोग न करें।
“इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है, और हम इस पहचान को बनाए रखते हुए स्वदेशी दीपावली का संदेश पूरे भारत में फैलाएँगे,” — उन्होंने कहा।
🌟 निष्कर्ष: इंदौर में परंपरा और आधुनिकता का संगम
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के नेतृत्व में इंदौर एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि स्वच्छता, संस्कृति और स्वदेशी व्यापार साथ-साथ चल सकते हैं।
राजवाड़ा पर लगने वाली पारंपरिक रेहड़ी-पटरी दुकानें सिर्फ व्यापार का माध्यम नहीं, बल्कि इंदौर की आत्मा हैं — जो दीपावली की रोशनी के साथ हर वर्ष नई चमक लाती हैं।
इस दीपावली, राजवाड़ा की गलियाँ फिर से रोशन होंगी,
मिट्टी के दीपों से, स्थानीय व्यापार से, और इंदौर की पहचान —
“स्वदेशी दीपावली” के उजियारे से।

