इंदौर में आयोजित सम्मान समारोह में बिल्डर्स और डेवलपर्स को दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
इंदौर। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, घटते हरित क्षेत्र और बदलते मौसम के बीच अब शहरों के विकास मॉडल पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। इसी कड़ी में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सदस्य Dr. Bharat Sharma ने कॉलोनाइजरों, बिल्डर्स और भूमि डेवलपर्स को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया है।
मध्यप्रदेश के विशिष्ट भवन निर्माणकर्ताओं और डेवलपर्स द्वारा भारतीय सांस्कृतिक उन्नयन के लिए किए गए प्रयासों के सम्मान समारोह में डॉ. शर्मा ने कहा कि आने वाले समय में केवल आधुनिक भवन और आलीशान टाउनशिप ही विकास का पैमाना नहीं होंगे, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि विकास कार्यों से पर्यावरण को कितना सुरक्षित रखा गया है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन नहीं बनाया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकटों का सामना करना पड़ेगा।
विश्व स्तर पर बढ़ रही पर्यावरण संकट की चिंता
Dr. Bharat Sharma ने अपने संबोधन में कहा कि आज पूरी दुनिया मौसम परिवर्तन और पर्यावरण असंतुलन को लेकर चिंतित है। लगातार बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, जल संकट, वायु प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि विकास के वर्तमान मॉडल पर पुनर्विचार करना आवश्यक हो गया है।
उन्होंने कहा कि शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में नई कॉलोनियां, टाउनशिप और आवासीय परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। ऐसे में बिल्डर्स और कॉलोनाइजरों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि यदि भूमि विकास केवल व्यावसायिक दृष्टिकोण से किया जाएगा और पर्यावरणीय संतुलन को नजरअंदाज किया जाएगा तो भविष्य में शहर रहने योग्य नहीं बचेंगे।
कॉलोनाइजर सिर्फ बिल्डर नहीं, पर्यावरण संरक्षक भी
उन्होंने कहा कि आज के समय में कॉलोनाइजरों की भूमिका केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रह गई है। वे प्रत्यक्ष रूप से शहरों के भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।
किसी भी कॉलोनी या टाउनशिप का निर्माण वहां के प्राकृतिक संसाधनों, जलस्तर, हरित क्षेत्र और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है। इसलिए प्रत्येक डेवलपर को पर्यावरण संरक्षक की भूमिका भी निभानी होगी।
डॉ. शर्मा ने कहा कि यदि कॉलोनाइजर अपनी परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दें तो शहरों की तस्वीर बदली जा सकती है।
हरित क्षेत्र का विकास समय की मांग
सम्मेलन में डॉ. शर्मा ने कहा कि हर नई कॉलोनी और टाउनशिप में पर्याप्त हरित क्षेत्र विकसित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज शहरों में कंक्रीट के जंगल तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि खुले मैदान और पेड़ों की संख्या लगातार घट रही है। इससे तापमान बढ़ रहा है और लोगों को स्वच्छ हवा भी नहीं मिल पा रही है।
यदि कॉलोनाइजर व्यवस्थित रूप से पार्क, ग्रीन बेल्ट, वृक्षारोपण क्षेत्र और जैव विविधता वाले हिस्से विकसित करें तो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
वर्षा जल संचयन को बनाया जाए अनिवार्य
डॉ. शर्मा ने जल संरक्षण को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश के कई शहरों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है।
उन्होंने सुझाव दिया कि हर कॉलोनी और भवन परियोजना में वर्षा जल संचयन (Rain Water Harvesting) को अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए।
इसके माध्यम से बारिश के पानी को संरक्षित कर भूजल स्तर बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि अभी जल संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में जल संकट और गंभीर हो सकता है।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट जरूरी
डॉ. शर्मा ने कहा कि बड़ी आवासीय परियोजनाओं में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की व्यवस्था अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बिना उपचारित गंदा पानी नदियों और जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहा है। यदि कॉलोनियों में आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट सिस्टम लगाए जाएं तो पानी को पुनः उपयोग में लाया जा सकता है।
इससे जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण प्रदूषण को भी कम किया जा सकेगा।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर दिया जोर
शहरों में बढ़ते कचरे को लेकर भी डॉ. शर्मा ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) आज शहरी विकास की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
उन्होंने सुझाव दिया कि हर बड़ी टाउनशिप और कॉलोनी में कचरा पृथक्करण, रिसाइक्लिंग और जैविक कचरे के निपटान की आधुनिक व्यवस्था होनी चाहिए।
यदि शुरुआत से ही इस दिशा में काम किया जाए तो शहरों को स्वच्छ और स्वस्थ बनाया जा सकता है।
ऊर्जा संरक्षण और वैकल्पिक ऊर्जा का महत्व
डॉ. शर्मा ने ऊर्जा संरक्षण को भी सतत विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि भविष्य में सौर ऊर्जा और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का महत्व तेजी से बढ़ेगा।
उन्होंने बिल्डर्स से अपील की कि वे नई कॉलोनियों में सोलर पैनल, ऊर्जा दक्ष लाइटिंग सिस्टम और पर्यावरण अनुकूल निर्माण तकनीकों का उपयोग करें।
इससे बिजली की खपत कम होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
“ग्रीन कॉलोनी” अभियान चलाने की जरूरत
डॉ. शर्मा ने कहा कि अब समय आ गया है कि “ग्रीन कॉलोनी” अभियान को मिशन के रूप में शुरू किया जाए।
उन्होंने कहा कि केवल सरकार के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। समाज, बिल्डर्स, रहवासी और प्रशासन सभी को मिलकर काम करना होगा।
यदि हर नई कॉलोनी को पर्यावरण अनुकूल तरीके से विकसित किया जाए तो शहरों में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
EIA और सरकारी नियमों का पालन जरूरी
उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) और नगर एवं पर्यावरण विभाग द्वारा जारी नियमों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।
कई बार विकास परियोजनाओं में पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी की जाती है, जिससे लंबे समय में गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं।
डॉ. शर्मा ने कहा कि नियमों का पालन केवल औपचारिकता नहीं बल्कि भविष्य की सुरक्षा का आधार है।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी
सम्मेलन में डॉ. शर्मा ने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास जो प्रकृति को नुकसान पहुंचाए, वह लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना ही आज की सबसे बड़ी चुनौती है।
यदि संतुलन नहीं बनाया गया तो शहरों में प्रदूषण, जल संकट और स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ेंगी।
आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य
डॉ. शर्मा ने कहा कि आज जो फैसले लिए जाएंगे, उनका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।
यदि अभी पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान दिया गया तो भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, पर्याप्त जल और सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा।
उन्होंने कहा कि यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के हर वर्ग की साझा जिम्मेदारी है।
समारोह में कई प्रमुख लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर सिंगापुर टाउनशिप के स्वामी देवेंद्र कुमावत विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इसके अलावा ब्रजेश्वरी, बृजमोहिनी, बृजविहार, राधे रिजेंसी और राधाकुंज कॉलोनी के निर्माता विपिन मोहनलाल अग्रवाल भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
कल्याण ग्रुप के राकेश खंडेलवाल, वैभव नगर सोसाइटी के अध्यक्ष सुनील पटेल और समाजसेवी मनीष भाटी ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने की जरूरत
डॉ. शर्मा ने अपने संबोधन में भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमेशा प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की पक्षधर रही है।
प्राचीन भारतीय जीवनशैली में पेड़-पौधों, नदियों और प्राकृतिक संसाधनों को पूजनीय माना गया है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास मॉडल को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़कर ही टिकाऊ बनाया जा सकता है।
शहरीकरण के साथ बढ़ रही चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में शहरी आबादी तेजी से बढ़ेगी। इसके चलते नई कॉलोनियों और आवासीय परियोजनाओं की मांग भी बढ़ेगी।
यदि इस विकास को योजनाबद्ध और पर्यावरण अनुकूल तरीके से नहीं किया गया तो शहरों में ट्रैफिक, जल संकट, प्रदूषण और कचरा प्रबंधन जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।
पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं की बढ़ रही मांग
आज लोग केवल घर नहीं बल्कि बेहतर जीवनशैली की तलाश कर रहे हैं। इसी कारण पर्यावरण अनुकूल और ग्रीन प्रोजेक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में वही डेवलपर्स सफल होंगे जो पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देंगे।
निष्कर्ष
इंदौर में आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. भरत शर्मा ने स्पष्ट संदेश दिया कि अब विकास का अर्थ केवल इमारतें खड़ी करना नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए भविष्य का निर्माण करना है।
उन्होंने कॉलोनाइजरों और बिल्डर्स से अपील की कि वे हरित विकास, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को अपनी परियोजनाओं का मूल आधार बनाएं।
यदि विकास कार्यों में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई तो आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर भविष्य मिल सकेगा।
