मानवता की अनुपम मिसाल: Ghelra परिवार के नेत्रदान से दो जीवन होंगे रोशन
नागदा (ब्रजेश बोहरा)।
नगर के प्रतिष्ठित Ghelra परिवार ने मानवता की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश करते हुए मरणोपरांत नेत्रदान कर समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। राजेंद्र गेलड़ा एवं रूपेश गेलड़ा की 75 वर्षीय पूज्य माताजी स्वर्गीय श्रीमती श्रीकांता देवी गेलड़ा का 19 जनवरी को निधन उपरांत नेत्रदान किया गया, जिससे दो नेत्रहीन व्यक्तियों को दृष्टि प्राप्त होने की संभावना बनी है। दुख की इस घड़ी में भी परिजनों द्वारा लिया गया यह मानवीय निर्णय समाज में सेवा, करुणा और संवेदना का सशक्त संदेश देता है।
दुख की घड़ी में मानवता का उजाला
शोकाकुल परिजनों की सहमति से यह पुण्य कार्य पूर्ण श्रद्धा और संवेदनशीलता के साथ संपन्न हुआ। परिवार ने यह सिद्ध कर दिया कि जीवन की सबसे कठिन घड़ी में भी समाजसेवा का संकल्प लिया जा सकता है। स्व. श्रीमती श्रीकांता देवी गेलड़ा का यह अंतिम दान न केवल दो जिंदगियों में नई रोशनी और उम्मीद का संचार करेगा, बल्कि समाज को भी नेत्रदान के लिए प्रेरित करेगा।
विधिवत सम्पन्न हुई नेत्रदान प्रक्रिया
नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया गीता भवन न्यास समिति, बड़नगर के नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी. एल. ददरवाल एवं मनीष तलाच द्वारा विधिवत रूप से सम्पन्न कराई गई। समिति द्वारा इस नेत्रदान को क्रमांक 908 के रूप में दर्ज किया गया। समयबद्ध और सुव्यवस्थित प्रक्रिया के कारण कॉर्निया सुरक्षित रूप से एकत्र किए गए, जिससे प्रत्यारोपण की सफलता की संभावना और बढ़ गई है।
नगर का 53वां नेत्रदान बना गौरव का विषय
Jain सोशल ग्रुप नागदा के नेत्रदान प्रभारी ब्रजेश बोहरा ने जानकारी देते हुए बताया कि अभिषेक कोलन की सूचना पर एवं गेलड़ा परिवार की सहमति से जैन सोशल ग्रुप के सहयोग से यह नगर का 53वां नेत्रदान सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। उन्होंने कहा कि समय पर की गई त्वरित कार्रवाई से दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को नई दृष्टि मिलने की आशा जगी है। यह नगर के लिए गर्व का विषय है कि निरंतर सामाजिक जागरूकता और सेवा भावना के चलते नेत्रदान जैसे पुण्य कार्यों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
समाजसेवियों ने जताया सम्मान और श्रद्धांजलि
इस अवसर पर Jain सोशल ग्रुप नागदा के अध्यक्ष धर्मेन्द्र बम ने Ghelra परिवार के इस सराहनीय निर्णय की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में भी परिजनों ने समाजहित को प्राथमिकता दी, जो वास्तव में मानवता की सच्ची मिसाल है। उन्होंने नेत्रदानी पुण्यात्मा स्व. श्रीमती श्रीकांता देवी गेलड़ा को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका यह निर्णय समाज को नेत्रदान के लिए प्रेरित करेगा।
नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी. एल. ददरवाल ने भी दिवंगत आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए परिजनों के इस मानवीय निर्णय को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि नेत्रदान जैसे कार्य न केवल दो लोगों को नई दृष्टि देते हैं, बल्कि पूरे समाज में सेवा और करुणा की भावना को मजबूत करते हैं। समिति की ओर से गेलड़ा परिवार को नेत्रदान का प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनका सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम में रही समाजजनों की सहभागिता
कार्यक्रम के दौरान राकेश पोरवाल, अमित कोलन, मनोज मामा सहित परिवारजन एवं समाज के अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने परिजनों के साहसिक और मानवीय निर्णय की सराहना करते हुए उन्हें ढांढस बंधाया और इस पुण्य कार्य के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
नेत्रदान: दो जीवन में नई रोशनी
विशेषज्ञों के अनुसार, नेत्रदान मृत्यु के छह घंटे के भीतर किया जाना आवश्यक होता है, ताकि कॉर्निया को सुरक्षित रूप से प्रत्यारोपण के लिए उपयोग में लाया जा सके। एक सफल नेत्रदान से दो नेत्रहीन व्यक्तियों को दृष्टि मिल सकती है। स्व. श्रीमती श्रीकांता देवी गेलड़ा के नेत्रदान से भी दो लोगों के जीवन में उजाला आने की संभावना बनी है, जो इस पुण्य कार्य की महत्ता को और भी बढ़ा देता है।
समाज में जागरूकता का सशक्त संदेश
यह घटना समाज के लिए एक सशक्त संदेश है कि मरणोपरांत किया गया दान किसी के जीवन में अमूल्य परिवर्तन ला सकता है। नेत्रदान न केवल व्यक्तिगत पुण्य का कार्य है, बल्कि यह सामाजिक दायित्व भी है। गेलड़ा परिवार का यह कदम समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भविष्य में भी सेवा कार्यों का संकल्प
Jain सोशल ग्रुप नागदा एवं गीता भवन न्यास समिति ने यह संकल्प व्यक्त किया कि भविष्य में भी इस प्रकार के सेवा और जनजागरण कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे। समाज के अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने हेतु विशेष अभियान चलाने की भी योजना बनाई जा रही है।
निष्कर्ष: मानवता की सच्ची मिसाल
कुल मिलाकर, Ghelra परिवार द्वारा किया गया यह नेत्रदान न केवल दो नेत्रहीनों के जीवन में उजाला लाएगा, बल्कि समाज में सेवा, संवेदना और करुणा की भावना को भी मजबूत करेगा। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि मरणोपरांत किया गया दान किसी के जीवन में नई आशा और नया सवेरा ला सकता है। समाज के लिए यह एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि प्रत्येक व्यक्ति को इस पुण्य कार्य के लिए आगे आना चाहिए, ताकि अंधकार में जी रहे लोगों के जीवन में रोशनी लाई जा सके।
