आस्था और परंपरा का अनूठा संगम, पीढ़ियों से मराठा परिवार निभा रहा गणेश उत्सव की परंपरा
धरमपुरी। नगर के राजबाड़ा चौक स्थित श्री राम मंदिर में गणेश उत्सव आस्था, संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यहां मराठा समाज द्वारा वर्षों से दस दिवसीय गणेश महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। मंदिर में विराजमान गणेशजी ‘राजवाड़ा के राजा’ और ‘चिट्ठी वाले गणेशजी’ के नाम से प्रसिद्ध हैं।
मंदिर के पुजारी एवं श्री गोड मालवीय ब्राह्मण समाज के प्रवक्ता रत्नेश कुमार जोशी के अनुसार, धरमपुरी में महाराष्ट्रीयन परिवारों द्वारा गणेश उत्सव की परंपरा पीढ़ियों से निभाई जा रही है। यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है।
गणेश महोत्सव के दौरान संपूर्ण महाराष्ट्रीयन परिवार पारंपरिक मराठी वेशभूषा में सजकर रात में विधि-विधान के साथ आरती करते हैं। आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

उत्सव के दसों दिनों में प्रतिदिन श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की जाती है। भक्तों को श्रद्धापूर्वक भोजन कराया जाता है। मराठा समाज द्वारा वर्षों से निभाई जा रही यह परंपरा आज भी निरंतर जारी है। आयोजकों का कहना है कि आने वाली पीढ़ियों तक भी इस परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
धरमपुरी का यह गणेश महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ पारिवारिक एकजुटता, सामाजिक सहभागिता और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
Reporter: कौशिक पण्डित
कुशाग्र समाचार सेवा | मनावर, जिला धार, मध्यप्रदेश
