इंदौर। श्रीमद्भगवद्गीता केवल सुनने या पढ़ने का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला ज्ञान है। गीता के ज्ञान को जीवन में उतारकर व्यक्ति अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है। यह विचार ज्ञानशिखर ओमशांति भवन में आयोजित चार दिवसीय ‘गीता का सार, श्रेष्ठ जीवन का आधार’ शिविर के शुभारंभ अवसर पर हुबली से पधारी गीता ज्ञान विशेषज्ञ एवं प्रेरक वक्ता राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी वीणा दीदी ने व्यक्त किए।
वीणा दीदी ने कहा कि समाज में यह धारणा बनी हुई है कि गीता वृद्धावस्था में, मृत्यु के समय या उसके बाद पढ़ी जानी चाहिए, जबकि यह एक गलतफहमी है। गीता मनुष्य को जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही दिशा देने वाली ज्ञान की रोशनी है। उन्होंने कहा कि गीता ज्ञान को केवल सुनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके अनुसार जीवन जीना आवश्यक है।
इस अवसर पर इंदौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने वीणा दीदी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वीणा दीदी ने गीता के ज्ञान को अपने व्यावहारिक जीवन में उतारा है और शिविर के चार दिनों में प्रतिभागियों को उनके अनुभवों से सीखने का अवसर मिलेगा।
इस्कॉन प्रमुख स्वामी महामनदास ने गीता को जीवन निर्माण का शास्त्र बताते हुए शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 सीमानंद जी गिरी छोटू महाराज, मोयरा ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट पवन सिंघानिया तथा बैंक ऑफ इंडिया के चीफ मैनेजर सुमित मांडेकर ने भी शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में कुमारी नियति ने गीत प्रस्तुत किया। संचालन मेडिकल विंग की जोनल कोऑर्डिनेटर ब्रह्माकुमारी उषा बहन ने किया। शिविर में शहर के विभिन्न वर्गों के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।



