गौतम अदाणी परिवार संग पहुंचे महुडी जैन मंदिर, पर्युषण से पहले की पूजा-अर्चना
पत्नी प्रीति अदाणी, बेटे करण और बहू परिधि भी रहीं साथ; महापर्व से पहले परिवार ने की धार्मिक आराधना
गांधीनगर। अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने गुरुवार सुबह गुजरात के गांधीनगर जिले स्थित प्रसिद्ध महुडी जैन मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस धार्मिक यात्रा में उनके साथ उनकी पत्नी डॉ. प्रीति अदाणी, बड़े बेटे करण अदाणी और बहू परिधि अदाणी भी मौजूद रहीं। जैन समुदाय के प्रमुख पर्व पर्युषण महापर्व की शुरुआत से पहले अदाणी परिवार ने मंदिर में दर्शन कर धार्मिक आराधना की और आशीर्वाद लिया।
महुडी जैन तीर्थ गुजरात के प्रमुख जैन धार्मिक स्थलों में माना जाता है। पर्युषण महापर्व को देखते हुए इन दिनों जैन समाज में धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में अदाणी परिवार का महुडी पहुंचना धार्मिक दृष्टि से भी विशेष माना जा रहा है।
परिवार के साथ की पूजा-अर्चना
गौतम अदाणी ने परिवार के सदस्यों के साथ मंदिर में दर्शन किए और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। इस दौरान परिवार ने प्रार्थना, कृतज्ञता और आत्मचिंतन का भाव व्यक्त किया।
पर्युषण जैन धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें आत्मसंयम, उपवास, प्रार्थना, स्वाध्याय और आत्ममंथन को विशेष महत्व दिया जाता है। पर्व के दौरान श्रद्धालु अपने आचरण की समीक्षा करते हुए जीवन में सकारात्मक बदलाव और आध्यात्मिक उन्नति का संकल्प लेते हैं।
सेवा से जुड़ा है धार्मिक भाव
गौतम अदाणी के लिए धार्मिक आस्था के साथ सेवा का भाव भी महत्वपूर्ण बताया जाता है। अदाणी समूह की सामाजिक कल्याण एवं विकास इकाई अदाणी फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक बुनियादी ढांचे सहित विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक पहल संचालित की जाती हैं।
अदाणी परिवार की ओर से सेवा को समाज के प्रति जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जाता है। इसी संदर्भ में ‘सेवा ही साधना है’ का विचार भी सामने रखा जाता रहा है। महुडी यात्रा के दौरान धार्मिक आस्था के साथ सेवा, करुणा और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी दिखाई दिया।
महुडी का धार्मिक महत्व
ऐतिहासिक रूप से मधुपुरी के नाम से प्रसिद्ध महुडी श्वेतांबर जैन समुदाय का महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। यहां जैन धर्म के सभी 24 तीर्थंकरों को समर्पित मंदिर मौजूद हैं। इसके अलावा श्री घंटाकर्ण महावीर का भी प्रसिद्ध मंदिर है।
जैन परंपरा में घंटाकर्ण महावीर को रक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है। श्रद्धालु कठिन परिस्थितियों में शक्ति और बाधाओं से मुक्ति की भावना के साथ यहां आराधना करते हैं। महुडी में धार्मिक आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं की नियमित आवाजाही रहती है।
मंदिर परिसर में दर्शन और पूजा के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। पर्युषण जैसे महत्वपूर्ण पर्वों के आसपास तीर्थस्थल पर धार्मिक गतिविधियों का विशेष महत्व बढ़ जाता है।
8 सितंबर से शुरू होगा पर्युषण
इस वर्ष श्वेतांबर जैन परंपरा के अनुसार पर्युषण महापर्व 8 से 15 सितंबर 2026 तक मनाया जाएगा। यह पर्व जैन समाज के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में शामिल है।
पर्युषण के दौरान श्रद्धालु प्रार्थना, उपवास, संयम, स्वाध्याय और आत्मचिंतन पर विशेष ध्यान देते हैं। पर्व का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि व्यक्ति को अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों पर आत्ममंथन करने की प्रेरणा देना भी है।
संवत्सरी पर क्षमा का संदेश
पर्युषण पर्व का समापन 15 सितंबर को संवत्सरी के साथ होगा। जैन परंपरा में संवत्सरी को क्षमा पर्व के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है। इस अवसर पर जैन धर्मावलंबी अपने द्वारा जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए दूसरों से क्षमा मांगते हैं और दूसरों को भी क्षमा करने का भाव रखते हैं।
यह पर्व पुराने मनमुटाव और कटुता को पीछे छोड़कर आत्मशुद्धि तथा सकारात्मक जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश देता है। इसी कारण पर्युषण को आत्मअनुशासन और आत्मचिंतन का पर्व भी कहा जाता है।
पहले भी जैन तीर्थ पहुंचे थे अदाणी दंपती
गौतम अदाणी और डॉ. प्रीति अदाणी इससे पहले भी इस वर्ष गुजरात के प्रमुख जैन तीर्थस्थलों में दर्शन कर चुके हैं। वर्ष की शुरुआत में दोनों ने उत्तर गुजरात के तारंगा हिल्स स्थित श्री अजितनाथ भगवान श्वेतांबर जैन देरासर पहुंचकर अक्षय तृतीया के अवसर पर पूजा-अर्चना की थी।
महुडी की यात्रा इसी धार्मिक क्रम में अदाणी परिवार की एक और महत्वपूर्ण तीर्थ यात्रा के रूप में सामने आई है। इस बार गौतम अदाणी के साथ उनके परिवार के अन्य सदस्य भी मंदिर पहुंचे।
आस्था और आत्मचिंतन का संदेश
महुडी में अदाणी परिवार की उपस्थिति के दौरान धार्मिक आस्था के साथ विनम्रता, करुणा, सेवा और आत्मचिंतन का संदेश भी सामने आया। पर्युषण से पहले की गई पूजा-अर्चना को आत्मिक शांति और धार्मिक साधना से जोड़कर देखा जा रहा है।
जैन धर्म में पर्युषण के दौरान बाहरी गतिविधियों की अपेक्षा आत्मसंयम और आत्ममंथन को विशेष महत्व दिया जाता है। क्षमा, अहिंसा, संयम और करुणा जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा इस पर्व के माध्यम से दी जाती है।
महुडी मंदिर में अदाणी परिवार की यात्रा भी इसी धार्मिक वातावरण के बीच हुई, जहां परिवार ने एक साथ प्रार्थना और पूजा-अर्चना की।
नोट: पर्युषण की तिथियों और यात्रा से संबंधित विवरण उपलब्ध सामग्री के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं।
