स्वराज की अलख जगाती ‘गरुड़झेप मशाल यात्रा’ का मऊ में भव्य स्वागत, जय भवानी-जय शिवाजी के नारों से गूंजा क्षेत्र
रिपोर्टर – मनोज कुमार पुष्पद
पड़ाना/सारंगपुर। छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य, संघर्ष और स्वराज के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से निकाली जा रही ‘गरुड़झेप मशाल यात्रा’ का शुक्रवार को सारंगपुर जनपद की ग्राम पंचायत मऊ पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। आगरा से महाराष्ट्र के राजगढ़ तक पैदल निकाली जा रही इस मशाल यात्रा के आगमन पर पूरा क्षेत्र भगवा रंग में रंगा नजर आया। स्थानीय लोगों और सनातन धर्मावलंबियों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का अभिनंदन किया और ‘जय भवानी-जय शिवाजी’ के जयघोष लगाए।
यात्रा के स्वागत को लेकर ग्रामीणों और युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। हाथों में भगवा ध्वज और मशाल लिए युवाओं ने छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज, साहस और राष्ट्रप्रेम के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया। विशेष रूप से वीर शिवाजी संगठन से जुड़े बालक-बालिकाओं की भागीदारी आकर्षण का केंद्र रही।
भगवा रंग में रंगा मऊ, पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत
गरुड़झेप मशाल यात्रा के ग्राम पंचायत मऊ पहुंचते ही बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक स्वागत के लिए आगे आए। यात्रा के मार्ग पर लोगों ने पुष्पवर्षा की और मशाल को नमन किया। इस दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान में लगाए जा रहे नारों से वातावरण उत्साहपूर्ण हो गया।
आयोजकों और स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह यात्रा केवल एक पैदल यात्रा नहीं, बल्कि छत्रपति शिवाजी महाराज के संघर्ष, स्वाभिमान और स्वराज की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है। यही कारण रहा कि यात्रा के स्वागत में बच्चों से लेकर युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों तक की भागीदारी दिखाई दी।
वीर शिवाजी संगठन के बालक-बालिकाओं ने बढ़ाया उत्साह
इस बार यात्रा के स्वागत की प्रमुख विशेषता वीर शिवाजी संगठन के बालक और बालिकाओं की सक्रिय भागीदारी रही। हाथों में मशाल और कंधों पर भगवा ध्वज लेकर संगठन से जुड़े युवाओं ने पूरे जोश और अनुशासन के साथ यात्रा में सहभागिता की।
यात्रा में पूजा, मुस्कान, शोभा, संजना, वंशिका, अंजलि, अंबाराम, सूरज, लोकेश, चेतन, संजय, अर्जुन, रोहन, अनिरुद्ध, हंसराज, अनिल, अंकित, मोहित, हिमांशु, लकी, नितिन, आरव, ऋतुराज, राजपाल, सज्जन सिंह, नीरज, ललित, शिवम, तुषार, सनी और अभिनंदन सहित अनेक युवाओं ने हिस्सा लिया।
युवाओं की टोली ने यात्रा के दौरान राष्ट्रभक्ति और स्वराज से जुड़े संदेश दिए। स्थानीय लोगों ने भी युवा पीढ़ी की इस भागीदारी की सराहना की। उनका कहना था कि महापुरुषों के जीवन और उनके संघर्ष से युवाओं को परिचित कराने के लिए ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आगरा से महाराष्ट्र के राजगढ़ तक पैदल यात्रा
गरुड़झेप मशाल यात्रा आगरा से शुरू होकर महाराष्ट्र के राजगढ़ तक पैदल निकाली जा रही है। आयोजकों के अनुसार यात्रा का मार्ग छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन की एक ऐतिहासिक घटना की स्मृति से जुड़ा हुआ है।
यात्रा से जुड़े लोगों का कहना है कि वर्ष 1666 में आगरा से निकलने के बाद छत्रपति शिवाजी महाराज महाराष्ट्र की ओर लौटे थे। उसी ऐतिहासिक प्रसंग, संघर्ष और स्वाभिमान की स्मृति में यह यात्रा निकाली जा रही है। विभिन्न राज्यों, शहरों और गांवों से गुजरते हुए यात्रा लोगों को शिवाजी महाराज के जीवन और स्वराज की अवधारणा से परिचित करा रही है।
छत्रपति शिवाजी महाराज के संघर्ष को किया याद
छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम भारतीय इतिहास में साहस, रणनीति और स्वराज की स्थापना के लिए प्रमुखता से लिया जाता है। आगरा से उनकी वापसी का प्रसंग भी इतिहास की चर्चित घटनाओं में शामिल है। यात्रा के माध्यम से इसी ऐतिहासिक प्रसंग को याद करते हुए लोगों तक उनके संघर्ष और नेतृत्व का संदेश पहुंचाया जा रहा है।
आयोजकों का कहना है कि मशाल यहां प्रतीकात्मक रूप से उस विचार और प्रेरणा का प्रतिनिधित्व करती है, जिसने शिवाजी महाराज को विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने की शक्ति दी।
नई पीढ़ी तक स्वराज का संदेश पहुंचाना उद्देश्य
गरुड़झेप मशाल यात्रा का प्रमुख उद्देश्य नई पीढ़ी को छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, संघर्ष, नेतृत्व और स्वराज की भावना से परिचित कराना बताया गया है। यात्रा के आयोजकों का मानना है कि बच्चों और युवाओं को इतिहास के महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों के बारे में जानकारी देना आवश्यक है, ताकि वे उनके जीवन से प्रेरणा ले सकें।
मऊ में यात्रा के दौरान युवाओं की बड़ी भागीदारी को भी इसी उद्देश्य से जोड़कर देखा गया। बालक-बालिकाओं ने भगवा ध्वज लेकर यात्रा में हिस्सा लिया और शिवाजी महाराज के सम्मान में जयघोष किए।
‘जय भवानी-जय शिवाजी’ से गूंजा यात्रा मार्ग
यात्रा के मऊ पहुंचने से लेकर आगे रवाना होने तक ‘जय भवानी’ और ‘जय शिवाजी’ के नारों की गूंज सुनाई देती रही। ग्रामीणों ने अलग-अलग स्थानों पर यात्रा का अभिनंदन किया। कई लोगों ने मशाल के समक्ष नमन कर छत्रपति शिवाजी महाराज को याद किया।
यात्रा के स्वागत के दौरान उत्सव जैसा माहौल रहा। युवाओं का जोश और स्थानीय लोगों की भागीदारी ने आयोजन को और भव्य बना दिया। ग्रामीणों ने यात्रा में शामिल लोगों का उत्साहवर्धन किया और उनके आगे के सफर के लिए शुभकामनाएं दीं।
इतिहास और राष्ट्रभावना से युवाओं को जोड़ने का प्रयास
आयोजकों के मुताबिक गरुड़झेप मशाल यात्रा का संदेश केवल ऐतिहासिक घटना को याद करने तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से युवाओं में साहस, नेतृत्व, स्वाभिमान और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
मऊ में हुए स्वागत कार्यक्रम ने यात्रा को स्थानीय स्तर पर विशेष स्वरूप दिया। वीर शिवाजी संगठन के बालक-बालिकाओं की सक्रिय भागीदारी के साथ स्थानीय नागरिकों ने भी यात्रा का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। इसके बाद मशाल यात्रा अपने अगले पड़ाव की ओर रवाना हुई और आगरा से महाराष्ट्र के राजगढ़ तक अपने निर्धारित सफर को आगे बढ़ाया।
