लाल किले से मोदी का ऐलान: सिंधु जल संधि पर सख्त रुख, पाकिस्तान को चेतावनी
नई दिल्ली।
79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) पर ऐतिहासिक बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत के नागरिक अब भली-भांति समझ चुके हैं कि यह समझौता देश के लिए अन्यायपूर्ण और एकतरफ़ा रहा है। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछले सात दशकों से भारत की नदियों का कीमती पानी पाकिस्तान के खेतों की सिंचाई में इस्तेमाल होता रहा, जबकि भारत के अपने किसान पानी के अभाव से जूझते रहे।
मोदी ने इसे सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं, बल्कि देश के किसानों के अधिकारों का हनन भी करार दिया। उन्होंने साफ कहा कि यह समझौता किसानों को “अकल्पनीय नुकसान” देता आया है और अब समय आ गया है कि इस ऐतिहासिक अन्याय को सुधारा जाए। उनका यह बयान विशेषज्ञों के अनुसार भारत की जल कूटनीति में बड़े बदलाव का संकेत है।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि आगे से भारत की नदियों का पानी सबसे पहले और सबसे अधिक भारत के किसानों के लिए होगा। यह रुख पाकिस्तान को लेकर भारत की ज़ीरो टॉलरेंस नीति और राष्ट्रीय संसाधनों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सख्त संदेश: “पानी और खून साथ नहीं बह सकते”
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब पहलगाम में हुए क्रूर आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए “ऑपरेशन सिंदूर” को अंजाम दिया। इस हमले में 25 पर्यटकों और एक कश्मीरी नागरिक की जान गई थी। राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में मोदी ने पाकिस्तान को सीधी चेतावनी दी— “आतंक और बातचीत एक साथ नहीं हो सकते। आतंक और व्यापार एक साथ नहीं हो सकते। और पानी और खून भी एक साथ नहीं बह सकते।”
उन्होंने संकेत दिया कि नई दिल्ली का सिंधु जल संधि पर लगाया गया निलंबन हटाने का कोई इरादा नहीं है और भविष्य के कदम पूरी तरह पाकिस्तान के रवैये पर निर्भर करेंगे।
भारत की नई रणनीति: “परमाणु ब्लैकमेल का युग खत्म”
ऑपरेशन सिंदूर को भारत की आतंकवाद-रोधी रणनीति में बड़ी प्रगति माना जा रहा है। मोदी ने घोषणा की, “भारत आतंकवाद का जवाब अपनी शर्तों पर देगा। परमाणु ब्लैकमेल का युग समाप्त हो गया है।” उनका यह इशारा पाकिस्तान की उस नीति की ओर था जिसमें वह पारंपरिक सैन्य जवाबों को रोकने के लिए अपनी परमाणु क्षमता का हवाला देता रहा है।
तनावपूर्ण हालात और सैन्य टकराव
मोदी के बयान के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कूटनीतिक हमले शुरू कर दिए। सबसे बड़ा कदम था सिंधु जल संधि को निलंबित करना, जो 1960 से अब तक दोनों देशों के बीच कायम रहा था। इस पर पाकिस्तान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी कि पानी के प्रवाह को मोड़ने की किसी भी कोशिश को “युद्ध की कार्रवाई” माना जाएगा।
इसके बाद सीमा पर हालात और तनावपूर्ण हो गए। भारत ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए, जबकि इस्लामाबाद ने ड्रोन और मिसाइल हमलों से जवाब दिया। भारत की वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को नष्ट किया, लेकिन नागरिक हताहत भी हुए।
जवाबी कार्रवाई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के रणनीतिक ठिकानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाया। बढ़ते दबाव के बीच पाकिस्तान को अंततः युद्धविराम का प्रस्ताव देना पड़ा, जिसे भारत ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए स्वीकार किया। मोदी ने साफ कहा कि भारतीय सेनाएँ पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी उकसावे का मुंहतोड़ जवाब देंगी।

