रीवा की 110 करोड़ की मॉडल रोड पर दोबारा खुदाई, निर्माण गुणवत्ता और खर्च पर स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
रीवा। रतहरा से चोरहटा तक बनी मॉडल रोड और नाली में दोबारा हो रही खुदाई को लेकर स्थानीय लोगों ने निर्माण की गुणवत्ता तथा सार्वजनिक धन के उपयोग पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि करीब दो से तीन वर्ष पहले जिस सड़क का निर्माण कराया गया था, उसे इतनी जल्दी फिर तोड़ने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उपलब्ध विवरण में सड़क की लागत लगभग 110 करोड़ रुपए बताई गई है। हालांकि, निर्माण लागत, कार्य पूर्ण होने की तारीख और वर्तमान खुदाई के उद्देश्य से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आए हैं।
सड़क और नाली की खुदाई पर नाराजगी
स्थानीय लोगों की आपत्ति सड़क और नाली को दोबारा तोड़े जाने को लेकर है। उनका कहना है कि बड़ी राशि खर्च करके तैयार की गई सड़क से लंबे समय तक बेहतर सुविधा मिलने की अपेक्षा थी। अब कम समय में फिर खुदाई होने से निर्माण की मजबूती और योजना पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लोग यह जानना चाहते हैं कि वर्तमान काम पुराने निर्माण की खराबी सुधारने के लिए हो रहा है या इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी आवश्यकता है। संबंधित विभाग की ओर से कारण स्पष्ट होने पर ही स्थिति का आकलन किया जा सकेगा।
निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
शिकायत करने वाले लोगों ने आरोप लगाया है कि सड़क और नाली के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। उनके अनुसार, इतनी जल्दी दोबारा काम होने से पहले किए गए निर्माण की उपयोगिता पर संदेह पैदा हुआ है। उन्होंने इसे सार्वजनिक धन से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।
हालांकि, सड़क पर खुदाई होना अपने आप में भ्रष्टाचार या घटिया निर्माण का प्रमाण नहीं है। गुणवत्ता संबंधी आरोपों की पुष्टि के लिए निर्माण के मानक, इस्तेमाल की गई सामग्री, निरीक्षण रिपोर्ट और वर्तमान कार्य के कारणों की जांच जरूरी होगी। उपलब्ध विवरण में ऐसी कोई तकनीकी रिपोर्ट शामिल नहीं है।
टैक्स के पैसे के उपयोग पर चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों में खर्च होने वाली राशि जनता के टैक्स से आती है। इसलिए सड़क बनने के कुछ समय बाद ही उस पर दोबारा खर्च होने की स्थिति का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। उनकी नाराजगी इस बात पर है कि यदि पहले का निर्माण सही था तो उसे तोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी।
वहीं, यदि निर्माण में कोई कमी थी तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है और सुधार का खर्च किस आधार पर किया जा रहा है। ये सवाल परियोजना की लागत और जवाबदेही से जुड़े हैं।
डामर की परत से कमियां छिपाने का आरोप
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि सड़क पर डामर की परत चढ़ाकर पहले के निर्माण की कमियों को छिपाने का प्रयास किया गया। उनका दावा है कि अब हो रही खुदाई से पुराने काम की गुणवत्ता पर फिर सवाल सामने आए हैं।
यह आरोप फिलहाल स्थानीय लोगों के कथन पर आधारित है। डामर की परत कब, किस स्वीकृति और किस तकनीकी उद्देश्य से डाली गई थी, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है। संबंधित अभिलेख और विभागीय स्पष्टीकरण मिलने के बाद ही इस आरोप की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ठेकेदार को लाभ पहुंचाने का दावा
शिकायतकर्ताओं ने दोबारा निर्माण के जरिए ठेकेदार को लाभ पहुंचाने का भी आरोप लगाया है। लेकिन उपलब्ध सामग्री में संबंधित ठेकेदार का नाम, नया कार्यादेश, स्वीकृत राशि अथवा भुगतान का विवरण नहीं दिया गया है।
ऐसे में इस दावे को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। पुराने और वर्तमान कार्य की शर्तों, स्वीकृतियों तथा भुगतान संबंधी जानकारी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोबारा निर्माण किस प्रक्रिया के तहत कराया जा रहा है।
विभागीय जवाब से स्पष्ट होगी स्थिति
मामले में प्रमुख सवाल सड़क की वास्तविक लागत, निर्माण पूरा होने की तारीख, वर्तमान खुदाई के कारण और नए खर्च को लेकर हैं। उपलब्ध विवरण में संबंधित विभाग या ठेकेदार का पक्ष शामिल नहीं है। उनके जवाब और तकनीकी अभिलेखों के आधार पर ही गुणवत्ता तथा भ्रष्टाचार के आरोपों का निष्पक्ष आकलन संभव होगा।
