मध्य प्रदेश में आयुष्मान और बीपीएल कार्डधारकों के लिए मुफ्त MRI सेवा बंद,
भोपाल, 17 फरवरी 2026: मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक गंभीर समस्या सामने आई है। जयप्रकाश जिला अस्पताल (JP Hospital), भोपाल में ओपीडी के आयुष्मान भारत और बीपीएल कार्डधारकों को अब मुफ्त MRI जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में पीपीपी (Public-Private Partnership) मॉडल पर संचालित MRI केंद्र ने अचानक मुफ्त जांच बंद कर दी है। इसके बाद मरीजों को इस जरूरी जांच के लिए कम से कम 1,500 रुपए और आवश्यकता पड़ने पर 3,000 से 6,000 रुपए तक खर्च करना पड़ रहा है।
यह अचानक बंद हुई सेवा मरीजों और उनके परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। जिन मरीजों को समय पर MRI जांच करानी थी, उन्हें अब निजी संस्थानों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे उनके इलाज में देरी हो रही है और खर्च का दबाव बढ़ गया है।
मुफ्त सेवा बंद होने का कारण
JP अस्पताल में पिछले दिनों तक ओपीडी के आयुष्मान और बीपीएल कार्डधारकों को मुफ्त एमआरआई जांच की सुविधा मिलती थी। हालांकि, सरकार द्वारा लगभग 50 लाख रुपए से अधिक का लंबित भुगतान होने के कारण निजी एजेंसी ने यह सुविधा बंद कर दी।
बीते कुछ दिनों में सात-आठ मरीजों को एमआरआई जांच से साफ इनकार कर दिया गया। इससे मरीजों की चिकित्सा प्रक्रिया ठप हो गई और उनकी परेशानी बढ़ गई। विशेषज्ञों का कहना है कि पीपीपी मॉडल पर चलने वाले सरकारी अस्पतालों में यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब सरकारी भुगतान समय पर नहीं किया जाता, जिससे निजी एजेंसियों को संचालन में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
अन्य जिलों में भी स्थिति गंभीर
भुगतान अटकने के कारण इंदौर और ग्वालियर के सरकारी अस्पतालों में भी आयुष्मान और बीपीएल कार्डधारकों की एमआरआई सेवाएं प्रभावित हुई हैं। जिन मरीजों को तत्काल जांच की आवश्यकता है, उन्हें निजी खर्च पर जांच करानी पड़ रही है। इन तीन जिलों में निजी एजेंसियों का दो करोड़ रुपए से अधिक भुगतान बकाया बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द ही बजट और भुगतान जारी नहीं किया गया, तो एमआरआई सेवाएं पूरी तरह ठप होने की संभावना है। इसका सीधा असर गरीब और बीपीएल कार्डधारक मरीजों पर पड़ेगा।
मरीजों और स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रभाव
मुफ्त MRI सेवा बंद होने से मरीजों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। जिन मरीजों को तुरंत जांच की जरूरत है, उन्हें महंगे निजी विकल्पों पर निर्भर होना पड़ रहा है। यह स्थिति विशेष रूप से गरीब और बीपीएल कार्डधारक परिवारों के लिए गंभीर चुनौती बन गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में असमानता और कमजोर वर्ग के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न होगा। मरीजों का कहना है कि मुफ्त एमआरआई की सुविधा बंद होने से उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा प्रभावित हुई है और उन्हें अपनी सीमित आर्थिक क्षमता से बाहर खर्च करना पड़ रहा है।
सरकारी कदम और संभावित समाधान
स्वास्थ्य विभाग को लंबित भुगतान जल्द जारी करने की आवश्यकता है ताकि पीपीपी मॉडल पर संचालित एमआरआई केंद्र फिर से मुफ्त सेवाएं प्रदान कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भुगतान समय पर नहीं किया गया, तो भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे प्रमुख जिलों में आयुष्मान और बीपीएल कार्डधारकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रभावित होगी।
सरकार द्वारा बजट और लंबित भुगतान जारी करने से गरीब और जरूरतमंद मरीजों को फिर से नि:शुल्क MRI जांच उपलब्ध हो सकेगी और इलाज में देरी से बचा जा सकेगा।
लंबित भुगतान और पीपीपी मॉडल की चुनौतियां
पीपीपी मॉडल पर सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था निजी एजेंसियों और सरकारी निधियों पर निर्भर होती है। अगर भुगतान लंबित रहता है, तो एजेंसी सेवाएं देने में हिचकिचाती है। यही कारण है कि JP अस्पताल, इंदौर और ग्वालियर में मरीजों को मुफ्त एमआरआई सेवा से वंचित होना पड़ा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति से न केवल मरीज प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ रहा है। गरीब मरीज अब निजी खर्च पर जांच करवाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो रही है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में आयुष्मान और बीपीएल कार्डधारकों की मुफ्त MRI सेवाओं का ठप होना गंभीर चिंता का विषय है। लंबित भुगतान और बजट की देरी के कारण मरीजों को निजी खर्च उठाना पड़ रहा है, जिससे उनके लिए आर्थिक बोझ और इलाज में देरी हो रही है।
सरकार और स्वास्थ्य प्रशासन को तत्काल कदम उठाकर लंबित भुगतान जारी करना चाहिए। इससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पुनः उपलब्ध होंगी और पीपीपी मॉडल का उद्देश्य पूरा हो सकेगा।
मुफ्त एमआरआई सेवा बंद होने से यह संदेश जाता है कि यदि सरकारी भुगतान समय पर न मिले, तो पीपीपी मॉडल पर निर्भर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए बजट जारी करना और लंबित भुगतान का निपटान करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि मरीजों को राहत मिल सके और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनी रहे।
