निःशुल्क आयुर्वेद चर्मरोग चिकित्सा शिविर का भव्य आयोजन इंदौर में
Indore में स्वास्थ्य सेवा और समाजसेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जैन सोशल ग्रुप संगिनी शक्ति एवं स्वर्णिम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में निःशुल्क चर्मरोग परामर्श एवं चिकित्सा शिविर का भव्य आयोजन किया गया। यह शिविर 2 मई 2026 को स्वर्णिम आयुर्वेद, 165 आरएनटी मार्ग, इंदौर में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। आयोजन का उद्देश्य समाज के उन लोगों तक आयुर्वेदिक चिकित्सा सुविधाएँ पहुँचाना था जो विभिन्न प्रकार के चर्म रोगों से पीड़ित हैं और महंगे इलाज का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं।
इस शिविर में बड़ी संख्या में मरीजों ने भाग लिया और अनुभवी आयुर्वेदाचार्यों से परामर्श प्राप्त किया। कार्यक्रम के दौरान मरीजों की नि:शुल्क जांच की गई और उन्हें उचित उपचार तथा दवाइयाँ प्रदान की गईं।
कार्यक्रम का शुभारंभ और स्वागत उद्बोधन
कार्यक्रम का शुभारंभ धार्मिक एवं सकारात्मक वातावरण में किया गया। स्वागत उद्बोधन जेएसजी संगिनी शक्ति की अध्यक्ष शारदा विवेक जैन द्वारा दिया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि समाज में स्वास्थ्य सेवा का प्रसार अत्यंत आवश्यक है और ऐसे शिविर लोगों को न केवल उपचार प्रदान करते हैं बल्कि उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि जैन सोशल ग्रुप का उद्देश्य हमेशा से समाजसेवा और मानव कल्याण रहा है और इस तरह के शिविर उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास हैं। उन्होंने सभी अतिथियों, चिकित्सकों और स्वयंसेवकों का आभार भी व्यक्त किया।
चर्मरोग से पीड़ित मरीजों की जांच एवं उपचार
शिविर में एक्जिमा, सोरायसिस, दाद-खाज, मुंहासे, एलर्जी, सफेद दाग सहित कई प्रकार के चर्म रोगों से पीड़ित मरीजों का परीक्षण किया गया। अनुभवी आयुर्वेदाचार्यों की टीम ने प्रत्येक मरीज की स्थिति का गहन अध्ययन किया और उनकी प्रकृति एवं रोग के अनुसार उपचार निर्धारित किया।
मरीजों को यह भी समझाया गया कि चर्मरोग केवल बाहरी समस्या नहीं है बल्कि शरीर के अंदरूनी असंतुलन का परिणाम होता है। इसलिए आयुर्वेदिक उपचार शरीर को भीतर से स्वस्थ करने पर जोर देता है।
चिकित्सकों ने मरीजों को खानपान, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार के लिए भी आवश्यक सुझाव दिए ताकि रोग की पुनरावृत्ति न हो।
निःशुल्क आयुर्वेदिक औषधियों का वितरण
शिविर की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि सभी मरीजों को एक माह की निःशुल्क आयुर्वेदिक औषधियाँ प्रदान की गईं। इससे मरीजों को तुरंत राहत मिलने में सहायता मिली और वे निरंतर उपचार प्रक्रिया से जुड़ सके।
आयोजकों ने बताया कि यह पहल इसलिए की गई ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग भी गुणवत्तापूर्ण उपचार प्राप्त कर सके। औषधियाँ विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में तैयार की गई थीं और प्रत्येक मरीज की आवश्यकता के अनुसार दी गईं।
मुख्य अतिथि वीरेन्द्र कुमार जैन का संबोधन
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वीरेन्द्र कुमार जैन ने अपने उद्बोधन में आयुर्वेद के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति आज पूरी दुनिया में अपनी प्रभावशीलता और सुरक्षा के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं बल्कि जीवन जीने की एक शैली है। यह शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित है।
उन्होंने यह भी कहा कि जहां तक संभव हो लोगों को आयुर्वेदिक उपचार को अपनाना चाहिए क्योंकि इसमें किसी प्रकार के साइड इफेक्ट नहीं होते और यह शरीर को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ बनाता है।
आयुर्वेद के वैश्विक महत्व पर विचार
कार्यक्रम में जेएसजी इंटरनेशनल फेडरेशन अहिल्या रीजन के चेयरमैन निलेश वेद, गौरव मेहता और विवेक जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज विश्वभर में आयुर्वेद को एक प्रभावी चिकित्सा पद्धति के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि आयुर्वेद केवल रोगों का उपचार नहीं करता बल्कि शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करता है। इससे व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ रहता है और उसे बार-बार बीमारियों का सामना नहीं करना पड़ता।
उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक जीवनशैली के कारण बढ़ रही बीमारियों का समाधान आयुर्वेद में निहित है।

मरीजों की भारी भागीदारी और प्रतिक्रिया
शिविर में बड़ी संख्या में मरीजों ने भाग लिया और इस पहल की सराहना की। कई मरीजों ने बताया कि उन्हें वर्षों से चर्म रोग की समस्या थी, जिसका समाधान उन्हें इस शिविर में मिला।
मरीजों ने कहा कि निःशुल्क जांच और औषधियों की सुविधा ने उन्हें बड़ी राहत दी है। उन्होंने आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया और इस तरह के शिविर नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की।
आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाने पर जोर
शिविर के दौरान विशेषज्ञों ने लोगों को आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और प्राकृतिक उपचार से कई बीमारियों से बचा जा सकता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार नहीं बल्कि एक पूर्ण स्वास्थ्य विज्ञान है जो व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से संतुलित रखता है।
संगठन और स्वयंसेवकों का योगदान
इस सफल आयोजन में जैन सोशल ग्रुप संगिनी शक्ति, स्वर्णिम फाउंडेशन तथा स्वर्णिम आयुर्वेद के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
शिविर को सफल बनाने में शिल्पा गंगवाल, स्वाति ललवानी, प्रियंका जैन, रचना तुरखिया, पूजा व्होरा, सोनिका सकलेचा और रूपल टोंग्या सहित कई सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
सभी स्वयंसेवकों ने निस्वार्थ भाव से मरीजों की सेवा की और आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
समापन और आभार प्रदर्शन
कार्यक्रम के अंत में सचिव पूजा व्होरा ने सभी अतिथियों, चिकित्सकों, स्वयंसेवकों और मरीजों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविर समाज में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि भविष्य में भी इसी प्रकार के जनहितकारी और निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सके।
निष्कर्ष
यह शिविर न केवल एक चिकित्सा आयोजन था बल्कि समाज सेवा और स्वास्थ्य जागरूकता का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी था। आयुर्वेद की उपयोगिता को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
आयोजकों का यह प्रयास निश्चित रूप से समाज में स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करेगा और आयुर्वेद को और अधिक लोकप्रिय बनाएगा।
