पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता नारायण भट्ट ‘बाऊजी’ का 84 वर्ष की आयु में निधन, थांदला में शोक की लहर
थांदला। वरिष्ठ कांग्रेस नेता, सहकारिता क्षेत्र के प्रमुख व्यक्तित्व, थांदला नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष और समाजसेवी नारायण भट्ट ‘बाऊजी’ का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही थांदला नगर सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक, सामाजिक, सहकारिता और पत्रकारिता जगत से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
नारायण भट्ट क्षेत्र में ‘बाऊजी’ के नाम से लोकप्रिय थे। सहज, सरल और मिलनसार स्वभाव के कारण उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में लोगों के बीच विशेष स्थान बनाया। राजनीति के साथ ही सहकारिता, कृषि, समाजसेवा और धार्मिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। उनके निधन को क्षेत्र के सार्वजनिक और सामाजिक जीवन के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।
लंबे सार्वजनिक जीवन में बनाई अलग पहचान
नारायण भट्ट ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में अलग-अलग जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। नगर परिषद के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने थांदला नगर से जुड़े विकास और जनहित के विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल और कार्यशैली को आज भी उनके समर्थक और नगर के लोग याद करते हैं।
राजनीतिक क्षेत्र में कांग्रेस से जुड़े रहते हुए उन्होंने संगठन में भी अपनी पहचान बनाई। स्थानीय स्तर पर लोगों से सीधा संपर्क और आमजन की समस्याओं को समझने की उनकी कार्यशैली ने उन्हें लोकप्रिय बनाया। उनके समर्थकों के बीच वे एक ऐसे नेता के रूप में पहचाने जाते थे, जो राजनीतिक गतिविधियों के साथ सामाजिक संबंधों को भी महत्व देते थे।
सहकारिता क्षेत्र में भी रहा महत्वपूर्ण योगदान
राजनीति के अलावा सहकारिता के क्षेत्र में भी नारायण भट्ट की उल्लेखनीय सक्रियता रही। वे कृषि उपज मंडी और विपणन सहकारी संस्था के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। इन जिम्मेदारियों के दौरान वे किसानों, ग्रामीणों और सहकारिता से जुड़े विषयों को लेकर सक्रिय रहे।
आदिवासी बहुल क्षेत्र में जनकल्याण और विकास से जुड़े कार्यों में भी उनकी भागीदारी रही। सहकारिता क्षेत्र में काम करते हुए उनका संपर्क ग्रामीण क्षेत्र के लोगों से लगातार बना रहा। यही कारण था कि उनकी पहचान केवल थांदला नगर तक सीमित नहीं रही, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी वे परिचित और लोकप्रिय रहे।
उन्नत कृषक के रूप में भी थी पहचान
नारायण भट्ट ‘बाऊजी’ का कृषि से भी गहरा जुड़ाव था। वे उन्नत कृषक के रूप में पहचाने जाते थे और खेती-किसानी से संबंधित विषयों में उनकी विशेष रुचि थी। सार्वजनिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों के साथ कृषि क्षेत्र से जुड़े रहने के कारण उनका किसानों और ग्रामीण समाज से आत्मीय संबंध बना रहा।
उनके परिचितों के अनुसार वे सामाजिक जीवन में सक्रिय रहने के बावजूद जमीन और ग्रामीण परिवेश से जुड़े रहे। यही सहजता उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताओं में शामिल थी।
धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में निभाई सक्रिय भूमिका
नारायण भट्ट का जुड़ाव धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों से भी रहा। अंचल में आयोजित अखिल भारतीय रामायण मेले के संयोजन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से क्षेत्र में सामाजिक एकजुटता और धार्मिक चेतना को बढ़ावा देने के प्रयासों में वे सक्रिय रहे।
रामायण मेले जैसे आयोजनों में उनकी भागीदारी ने उनके व्यक्तित्व के सामाजिक और धार्मिक पक्ष को भी मजबूत किया। राजनीतिक विचारधारा से अलग विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध रहे और सामाजिक आयोजनों में वे लगातार सक्रिय दिखाई देते थे।
अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में शामिल हुए लोग
नारायण भट्ट ‘बाऊजी’ के निधन की खबर फैलते ही उनके शुभचिंतकों और परिचितों का पहुंचना शुरू हो गया। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में समाजसेवी, राजनीतिक दलों से जुड़े पदाधिकारी, कार्यकर्ता, पत्रकार और गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
अंतिम संस्कार नौगावां नदी तट पर किया गया। उनके पुत्र अक्षय भट्ट और आशीष भट्ट सहित भाई एवं वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश भट्ट ने अंतिम संस्कार की विधि संपन्न की। अंतिम यात्रा के दौरान उपस्थित लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी और उनके सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन में दिए योगदान को याद किया।
राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि
नारायण भट्ट के निधन पर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की अनेक हस्तियों ने शोक व्यक्त किया। प्रदेश की कैबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया, पूर्व सांसद कांतिलाल भूरिया, विधायक वीरसिंह भूरिया, विक्रांत भूरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि जसवंत भाबर, पूर्व विधायक कलसिंह भाबर और नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि सुनील पणदा सहित अनेक लोगों ने दिवंगत नारायण भट्ट को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इसके अलावा पत्रकारिता जगत, सामाजिक संगठनों और स्थानीय संस्थाओं से जुड़े लोगों ने भी उनके निधन पर दुख जताया। लोगों ने उनके परिजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
‘बाऊजी’ के नाम से जन-जन में बनाई पहचान
नारायण भट्ट का ‘बाऊजी’ नाम केवल एक संबोधन नहीं, बल्कि क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता की पहचान बन चुका था। विभिन्न पीढ़ियों के लोगों से उनका संपर्क रहा और अपने सहज व्यवहार के कारण वे लोगों के बीच सम्मान प्राप्त करते रहे।
उनका सार्वजनिक जीवन राजनीति तक सीमित नहीं था। सहकारिता, कृषि, धर्म और समाजसेवा जैसे क्षेत्रों में सक्रियता ने उनके व्यक्तित्व को व्यापक बनाया। विभिन्न जिम्मेदारियों पर रहते हुए उन्होंने क्षेत्र के लोगों के साथ जो संबंध बनाए, वही उनकी सबसे बड़ी सामाजिक पूंजी मानी जाती रही।
क्षेत्र के सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति
84 वर्ष की आयु में नारायण भट्ट ‘बाऊजी’ के निधन से थांदला और आसपास के क्षेत्र ने एक ऐसे वरिष्ठ व्यक्तित्व को खो दिया, जिसने दशकों तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में एक खालीपन पैदा हुआ है।
नगर परिषद से लेकर सहकारिता संस्थाओं तक निभाई गई जिम्मेदारियां, किसानों और ग्रामीणों से जुड़ाव, धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी और आमजन के साथ सहज संबंध उनकी स्मृतियों को जीवंत रखेंगे। उनके समर्थकों और शुभचिंतकों का कहना है कि नारायण भट्ट ‘बाऊजी’ को उनके सरल स्वभाव, सामाजिक सरोकार और जनसेवा के कार्यों के लिए लंबे समय तक याद किया जाएगा।
