Ujjain के पूर्व मंत्री पारस जैन का 77 साल की उम्र में निधन, ‘पहलवान’ नाम से थे मशहूर; लंबे समय तक संभाली मंत्री पद की जिम्मेदारी
Ujjain News: मध्य प्रदेश की राजनीति के वरिष्ठ नेता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व कैबिनेट मंत्री पारस जैन का निधन हो गया है। सोमवार सुबह इंदौर के ज्यूपिटर अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और अस्पताल में उनका उपचार जारी था। उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
पारस जैन मध्य प्रदेश बीजेपी के उन नेताओं में शामिल रहे, जिन्होंने लंबे समय तक संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उज्जैन उत्तर विधानसभा सीट से वे कई बार विधायक चुने गए और प्रदेश सरकार में अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी संभाली। क्षेत्र में वे अपने लोकप्रिय नाम ‘पहलवान’ के रूप में भी जाने जाते थे।
Ujjain उत्तर सीट से कई बार रहे विधायक
पारस जैन का राजनीतिक सफर काफी लंबा और प्रभावशाली रहा। उन्होंने उज्जैन उत्तर विधानसभा सीट से वर्ष 1990 में पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया था। इसके बाद उन्होंने लगातार जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई।
वर्ष 1993, 2003, 2008, 2013 और 2018 के विधानसभा चुनावों में भी वे उज्जैन उत्तर सीट से विधायक चुने गए। लंबे समय तक विधायक रहने के कारण उज्जैन क्षेत्र में उनकी अलग पहचान बनी रही।
उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे कई चुनावों में जनता का भरोसा जीतने में सफल रहे। स्थानीय लोगों के बीच उनकी सरल छवि और जनसंपर्क के कारण उन्हें खास सम्मान प्राप्त था।
2005 से 2016 तक संभाली मंत्री पद की जिम्मेदारी
पारस जैन ने मध्य प्रदेश सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2005 से 2013 तक वे प्रदेश सरकार में विभिन्न विभागों के राज्यमंत्री रहे।
इस दौरान उन्होंने वन विभाग, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विभागों में काम किया। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता के कारण उन्हें सरकार में लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रहीं।
वर्ष 2013 में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया और उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वर्ष 2016 में कैबिनेट में हुए बदलाव के दौरान उन्हें नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी दी गई।
लगभग एक दशक से अधिक समय तक मंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
2023 विधानसभा चुनाव में नहीं मिला टिकट
पारस जैन वर्ष 2018 तक विधायक रहे, लेकिन वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके बाद भी वे पार्टी और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे।
राजनीतिक जीवन में सक्रिय रहने वाले पारस जैन ने लंबे समय तक उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में पार्टी संगठन को मजबूत करने में योगदान दिया। उनके समर्थकों की संख्या काफी अधिक थी और वे क्षेत्रीय राजनीति में प्रभावशाली चेहरा माने जाते थे।
व्यापारी परिवार में हुआ था जन्म
पारस जैन का जन्म 20 जून 1950 को उज्जैन में हुआ था। वे अनाज व्यवसायी समरयमल तलेरा और कैलाश बाई के परिवार से थे। उन्होंने विक्रम विश्वविद्यालय से बी.कॉम की पढ़ाई पूरी की थी।
शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पुश्तैनी अनाज व्यवसाय को संभाला। व्यापार से जुड़े रहने के दौरान ही वे सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय हुए और धीरे-धीरे राजनीति की ओर बढ़े।
वर्ष 1978 में उनका विवाह अंगूरबाला जैन से हुआ था। उनके परिवार में दो बेटियां स्वाति और संध्या हैं।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
पारस जैन के राजनीतिक सफर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से हुई थी। इसके बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने लगे।
संघ और संगठन से जुड़े अनुभव ने उनके राजनीतिक करियर को मजबूत आधार दिया। बीजेपी में रहते हुए उन्होंने पार्टी के विभिन्न दायित्वों को निभाया और उज्जैन क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने में योगदान दिया।
‘पहलवान’ नाम से थी अलग पहचान
राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में पारस जैन को ‘पहलवान’ नाम से जाना जाता था। यह नाम उनकी लोकप्रियता और व्यक्तित्व से जुड़ा हुआ था। वे अपने क्षेत्र के लोगों के बीच सहज व्यवहार और मिलनसार स्वभाव के लिए प्रसिद्ध थे।
उनके निधन की खबर के बाद उज्जैन सहित पूरे मध्य प्रदेश में उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में शोक की भावना है। राजनीतिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
राजनीतिक जगत में शोक की लहर
पारस जैन के निधन को मध्य प्रदेश बीजेपी के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
लंबे राजनीतिक अनुभव, संगठन के प्रति समर्पण और जनता से जुड़े रहने की उनकी शैली के कारण उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। उज्जैन की राजनीति में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है और उनके निधन से एक अनुभवी नेता का दौर समाप्त हो गया।
मध्य प्रदेश की राजनीति में पारस जैन ने विधायक, मंत्री और संगठनकर्ता के रूप में जो भूमिका निभाई, वह लंबे समय तक याद की जाएगी।
