पांढुर्णा में प्रथम वर्ष ‘तान्हा पोला उत्सव’ का उत्साहपूर्वक आयोजन
सजे-धजे नंदी महाराज और पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए बच्चे, गोवंश संरक्षण एवं पशु प्रेम का दिया संदेश
संवाददाता: गिरधर चांडक, दैनिक स्वराज वाणी
पांढुर्णा। संत श्री जगनाडे युवा सांस्कृतिक समिति पांढुर्णा के तत्वावधान में शनिवार, 12 सितंबर 2026 को प्रथम वर्ष ‘तान्हा पोला उत्सव’ का उत्साह एवं उमंग के साथ आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नन्हे-मुन्ने बच्चे सजे-धजे नंदी महाराज के साथ शामिल हुए। विभिन्न पारंपरिक वेशभूषाओं में बच्चों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों और अभिभावकों में खासा उत्साह दिखाई दिया। बच्चों ने नंदी महाराज को आकर्षक तरीके से सजाकर भारतीय कृषि संस्कृति और पारंपरिक पोला पर्व के प्रति अपना जुड़ाव प्रदर्शित किया।
बच्चों को गोवंश के महत्व से जोड़ने की पहल
तान्हा पोला उत्सव का मुख्य उद्देश्य बच्चों में बचपन से ही गोवंश के महत्व, पालन-पोषण और संरक्षण की भावना विकसित करना रहा। इसके साथ पशुओं के प्रति प्रेम, करुणा और संवेदनशीलता का संदेश भी दिया गया।
भारतीय संस्कृति और कृषि परंपरा में गोवंश का सदियों से महत्वपूर्ण स्थान रहा है। खेती-किसानी और ग्रामीण जीवन में बैलों की भूमिका को सम्मान देने के उद्देश्य से पोला पर्व मनाया जाता है। समिति ने तान्हा पोला के माध्यम से इस परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया।
संस्कारों की शुरुआत बचपन से
समिति के सदस्यों ने कहा कि संस्कारों की शुरुआत बचपन से होती है। जब बच्चे स्वयं नंदी महाराज को सजाते हैं, उत्सव में सहभागिता करते हैं और उनके महत्व को समझते हैं, तो उनके मन में गोवंश एवं अन्य पशुओं के प्रति प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी की भावना स्वाभाविक रूप से विकसित होती है।
तान्हा पोला उत्सव बच्चों को अपनी संस्कृति, कृषि परंपराओं और ग्रामीण जीवन से परिचित कराने का एक प्रभावी माध्यम है। आयोजन के जरिए नई पीढ़ी को यह समझाने का प्रयास किया गया कि पशुओं की देखभाल और संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
आयोजन को मिलेगा व्यापक स्वरूप
प्रथम वर्ष में ही बच्चों और अभिभावकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता से आयोजन सफल रहा। संत श्री जगनाडे युवा सांस्कृतिक समिति के सदस्यों ने सभी प्रतिभागियों और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
समिति ने कहा कि भविष्य में तान्हा पोला उत्सव को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा, ताकि पांढुर्णा के अधिक से अधिक बच्चों को अपनी संस्कृति, कृषि परंपराओं और गोवंश संरक्षण की भावना से जोड़ा जा सके।
