बालाघाट: प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत बालाघाट में एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें कई लाभार्थियों को पैसे दिए गए लेकिन उन्होंने घर नहीं बनाए। अब नगर पालिका ने वसूली की कार्रवाई तेज कर दी है और 17 डिफॉल्टरों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की है।
इस घोटाले में 133 लाभार्थियों को घर बनाने के लिए वित्तीय सहायता दी गई थी, लेकिन कई लोगों ने न तो घर बनवाया और न ही पैसा लौटाया। करोड़ों रुपए के सरकारी फंड के गलत उपयोग के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। इनमें से 17 लोग बार-बार नोटिस के बावजूद पैसा लौटाने में विफल रहे, इसलिए उनके खिलाफ FIR दर्ज कराने का कदम उठाया गया। पहले ही 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी है, और आगे कार्रवाई की संभावना है।

नगर पालिका परिषद ने नियमों का उल्लंघन करते हुए 133 लाभार्थियों को कुल ₹1.14 करोड़ राशि जारी की थी, लेकिन कई लोगों ने इसे उचित उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया। कलेक्टर मृणाल मीणा इस मामले की लगातार निगरानी कर रहे हैं, जबकि पुराने फैसलों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
CMO बी.डी. कतरोलीया के अनुसार, 17 डिफॉल्टरों के खिलाफ FIR की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके अलावा 56 लाभार्थियों पर RRC (रिकवरी ऑफ रिवेन्यू केस) जारी की जा रही है और 20–22 लोगों की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी है। जांच में पता चला कि कुछ लाभार्थी घर छोड़कर चले गए, जबकि कुछ ने PMAY के तहत बने घर बेच दिए। नगर पालिका ने सार्वजनिक दबाव बनाने के लिए उनके नाम भी बोर्ड पर लगाए, लेकिन कई लोग अब भी पैसे लौटाने को तैयार नहीं हैं।
इस मामले में सिर्फ लाभार्थी ही नहीं, बल्कि नगर पालिका के अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं, जिन्होंने बिना सत्यापन और पात्रता जांचे मनमाने तरीके से लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया। सरकार अब इन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई पर विचार कर रही है।
