कोतमा के गोहांड्रा-उरतान में महिला पटवारी पर रिश्वत और अवैध वसूली के आरोप, CCTV फुटेज का दावा
व्यापारी से 30 हजार रुपए लेने का आरोप; नामांतरण और राजस्व कार्यों के बदले पैसे मांगने की शिकायतें, निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने संबंधित राजस्व और जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो जिम्मेदार कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
व्यापारी से 30 हजार रुपए लेने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप एक स्थानीय व्यापारी से कथित तौर पर 30 हजार रुपए लेने का है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि महिला पटवारी व्यापारी की दुकान पर पहुंची थीं, जहां उनसे संबंधित कथित लेन-देन हुआ।
बताया जा रहा है कि दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में घटनाक्रम रिकॉर्ड हुआ है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि फुटेज में महिला पटवारी दुकान पर दिखाई दे रही हैं। हालांकि केवल फुटेज के आधार पर रकम लेने का उद्देश्य या लेन-देन की प्रकृति निर्धारित नहीं की जा सकती। इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इसकी चर्चा तेज हो गई है। शिकायतकर्ताओं का यह भी दावा है कि मामला मीडिया तक पहुंचने के बाद संबंधित राशि वापस करने की बात कही गई। इस दावे की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नामांतरण और राजस्व कार्यों के नाम पर वसूली की शिकायत का दावा
यह मामला केवल एक व्यापारी तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों की ओर से आरोप लगाया गया है कि जमीन के नामांतरण, रिकॉर्ड सुधार और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों को लेकर भी पैसे मांगे गए।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार क्षेत्र में इस तरह की करीब पांच से छह शिकायतें सामने आने का दावा किया जा रहा है। इनमें कथित तौर पर 20 हजार से 30 हजार रुपए तक की राशि लिए जाने के आरोप हैं। इन शिकायतों की वास्तविक संख्या, उनके दस्तावेज और भुगतान से संबंधित तथ्यों की प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि होना अभी बाकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि जमीन से जुड़े छोटे-छोटे कार्यों के लिए उन्हें पटवारी और राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में यदि सरकारी काम के बदले अवैध राशि मांगने की शिकायत सही पाई जाती है तो यह गंभीर मामला होगा।
फोन नहीं उठाने और पैसे वापस नहीं करने का भी आरोप
कुछ शिकायतकर्ताओं ने यह आरोप भी लगाया है कि कथित भुगतान के बाद जब उन्होंने संबंधित पटवारी से संपर्क करने की कोशिश की तो कई बार फोन का जवाब नहीं मिला। वहीं कुछ लोगों ने राशि वापस मांगने पर इनकार किए जाने का दावा भी किया है।
इन सभी आरोपों को लेकर संबंधित पक्ष के बयान और दस्तावेज सामने आना जरूरी है। प्रशासनिक जांच में शिकायतकर्ताओं के बयान, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड से संबंधित उपलब्ध कानूनी साक्ष्य, कथित भुगतान के प्रमाण और सीसीटीवी फुटेज की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
CCTV फुटेज की जांच से स्पष्ट हो सकती है वास्तविकता
मामले में जिस सीसीटीवी फुटेज का उल्लेख किया जा रहा है, उसकी प्रामाणिकता और उसमें दिखाई देने वाली गतिविधियों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि शिकायत औपचारिक रूप से प्रशासन या जांच एजेंसी के पास पहुंचती है तो मूल फुटेज सुरक्षित करना और उसकी तकनीकी जांच करना आवश्यक होगा।
इसके साथ ही कथित तौर पर दिए गए 30 हजार रुपए किस उद्देश्य से दिए गए, क्या उस राशि को वापस किया गया और संबंधित राजस्व कार्य से उसका कोई संबंध था या नहीं—इन सवालों के जवाब भी जांच के बाद ही सामने आ सकते हैं।
किसी भी सरकारी कर्मचारी पर रिश्वत लेने का आरोप गंभीर होता है, इसलिए मामले में आरोप और प्रमाण दोनों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
गोहांड्रा, उरतान और आसपास के क्षेत्र के शिकायतकर्ताओं ने मामले में प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि राजस्व विभाग सीधे तौर पर किसानों, भूमि स्वामियों और ग्रामीणों के दैनिक कार्यों से जुड़ा होता है। नामांतरण, सीमांकन, रिकॉर्ड सुधार और भूमि अभिलेख जैसे कार्यों के लिए आम नागरिक राजस्व अमले पर निर्भर रहते हैं।
ऐसे में किसी कर्मचारी पर पैसे मांगने या लेने के आरोप सामने आते हैं तो इससे पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि मामले की जांच किसी निष्पक्ष अधिकारी से कराई जाए और सभी शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए जाएं।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
मामले के सामने आने के बाद अब निगाहें जिला और राजस्व प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि उनके पास मौजूद कथित सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच की जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
प्रशासन से यह भी अपेक्षा की जा रही है कि शिकायतों की सत्यता की जांच करते हुए संबंधित महिला पटवारी का पक्ष भी दर्ज किया जाए। आरोप सही पाए जाने की स्थिति में सेवा नियमों और प्रचलित कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए, जबकि आरोप प्रमाणित नहीं होने पर वास्तविक स्थिति भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जाए।
फिलहाल महिला पटवारी पर लगाए गए रिश्वत और अवैध वसूली के आरोप आरोप मात्र हैं और जांच में प्रमाणित होना बाकी है। समाचार लिखे जाने तक संबंधित महिला पटवारी या प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं था। उनका पक्ष प्राप्त होने पर समाचार में उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाना उचित होगा।
