गरिमापूर्ण और लोकतांत्रिक परंपरा
Indore । दिगंबर Jain सामाजिक संसद, इंदौर का चुनाव और अध्यक्ष पद का चयन हमेशा से ही समाज के लिए गरिमापूर्ण, लोकतांत्रिक और संविधानसम्मत परंपराओं का प्रतीक रहे हैं। Jain दर्शन में संयम, समन्वय और संविधान केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि आचरण की कसौटी माने जाते हैं। यही कारण है कि प्रत्येक निर्णय और प्रक्रिया में समाज के प्रत्येक सदस्य की सहभागिता और संविधान के आदर्शों का पालन अनिवार्य माना जाता है।
हाल ही में कुछ व्यक्तियों द्वारा आपसी सहमति से अध्यक्ष का चयन कर लेने की प्रक्रिया को लेकर समाज में बहस उत्पन्न हुई है। धर्म-समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने स्पष्ट किया कि समाज ने इस तरह की प्रक्रिया को स्वीकार्य नहीं बताया है। उनका कहना था कि समाज का मत स्पष्ट है कि अध्यक्ष कोई भी बने, परंतु वह केवल संविधान की पूर्ण पालना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से ही बने।
वरिष्ठजनों की राय
समाज के वरिष्ठजनों और पदाधिकारियों ने भी इस मामले में अपनी राय व्यक्त की है। सुशील पांड्या ने इसे परंपरा के विपरीत बताते हुए कहा कि अध्यक्ष का चयन नियमों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए। वहीं सुभाष सेठिया ने याद दिलाया कि प्रत्येक तीन वर्ष में अध्यक्ष का निर्वाचन मंदिरों के अध्यक्ष, मंत्री एवं प्रतिनिधियों द्वारा मतदान के माध्यम से होता रहा है। प्रिंसिपल टोंग्या के अनुसार, सभी मंदिरों के प्रतिनिधि इस प्रकार के चयन से स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
अमित कासलीवाल और डॉ. जैनेन्द्र जैन ने भी जोर देकर कहा कि समाज में एक स्वर में यह बात उभरकर आई है कि संविधान सर्वोपरि है। भले ही यह संविधान रजिस्टर्ड न हो, फिर भी प्रत्येक समाजजन की इसमें गहरी आस्था रही है।
सामाजिक संसद का गौरवपूर्ण इतिहास
दिगंबर Jain सामाजिक संसद का इतिहास अत्यंत स्वर्णिम रहा है। इसमें श्री देवकुमारसिंह कासलीवाल, पद्मश्री बाबूलालजी पाटोदी, हीरालाल जी झांझरी, कैलाश वेद और प्रदीपकुमार सिंह कासलीवाल जैसे वरिष्ठजनों ने अध्यक्ष पद की गरिमा और सम्मान बढ़ाया। उन्होंने हमेशा निर्वाचन प्रक्रिया का पालन करते हुए समाज में लोकतांत्रिक मूल्य बनाए रखे।
धार्मिक दृष्टि से देखें तो Jain परंपरा में अहिंसा, सत्य और न्याय के साथ निर्णय लेने की शिक्षा दी गई है। यही कारण है कि समाज आज आत्मचिंतन और जागरूकता की ओर अग्रसर है।
साधारण सभा की जानकारी
साधारण सभा 1 फरवरी 2026 को दोपहर 2 बजे महावीर बाग, एयरपोर्ट रोड, इंदौर में आयोजित की जाएगी। इस सभा में लगभग 500 से अधिक समाजजन उपस्थित रहेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य अध्यक्ष पद के चुनाव को पारदर्शी, लोकतांत्रिक और संविधानसम्मत प्रक्रिया के तहत संपन्न कराना है।
समाज के वरिष्ठजनों ने उपस्थित होने की अपील की है कि समाजजन जागरूक होकर आएं और समाज की गरिमा, एकता और धार्मिक मर्यादा का परिचय दें।
सभी प्रमुख समाजसेवकों में शामिल हैं:
एम. के. जैन, राजेंद्र सोनी, दिलीप पाटनी, प्रदीप चौधरी, डी. के. जैन (डीएसपी), बाहुबली पांड्या, कीर्ति पांड्या, होलास सोनी, नवीन गोधा, कुशलराज जैन, प्रतिपाल टोंग्या, सुभाष सेठिया, राजेश पंड्या, आशीष जैन सूतवाले, राजीव जैन प्रसाद, संजय जैन अहिंसा, विनोद जैन, अजयपाल टोंग्या, राजेश टोंग्या, राकेश विनायका, मनोहर झांझरी, धर्मेंद्र पाटनी, विपुल बाँझल, भूपेंद्र जैन, राजेश जैन महालक्ष्मी नगर, राजकुमार जैन सुखशांति नगर, रितेश पाटनी, विमल चौधरी, संजय मैगनस।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्व
समाज के वरिष्ठजनों का मानना है कि अध्यक्ष का चयन किसी भी प्रकार की आपसी सहमति या अनौपचारिक प्रक्रिया से नहीं होना चाहिए। इसे केवल संविधान और लोकतांत्रिक मतदान प्रक्रिया के माध्यम से ही संपन्न किया जाना चाहिए।
इस प्रक्रिया से ही निर्णय में पारदर्शिता और विश्वास बना रहता है। समाज के प्रत्येक सदस्य के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लें और अपने मत से समाज के भविष्य का निर्माण करें।
धार्मिक दृष्टिकोण और मूल्य
धार्मिक दृष्टिकोण से यह प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है। Jain धर्म में अहिंसा, सत्य, न्याय और संयम पर आधारित निर्णय लेने की शिक्षा दी गई है। किसी भी पदाधिकारी का चयन इन मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। समाज में लोकतंत्र और संविधान के आदर्श तभी जीवित रहते हैं जब प्रत्येक सदस्य जागरूक होकर अपनी जिम्मेदारी निभाता है।
आगामी सभा का उद्देश्य
1 फरवरी की साधारण सभा में चर्चा का मुख्य विषय अध्यक्ष पद का चयन, समाज में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन, और Jain परंपरा के अनुरूप निर्णय लेना होगा। समाज के वरिष्ठजनों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की अनौपचारिक प्रक्रिया या आपसी सहमति से अध्यक्ष का चयन स्वीकार्य नहीं है।
समाज की सामूहिक भावना यह है कि अध्यक्ष का चयन गरिमा, परंपरा, संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करते हुए ही होना चाहिए। यह केवल एक औपचारिक चुनाव नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक संदेश है कि लोकतंत्र, पारदर्शिता और न्याय हमेशा सर्वोपरि होंगे।
निष्कर्ष
1 फरवरी, रविवार को होने वाली यह साधारण सभा केवल अध्यक्ष का चुनाव नहीं, बल्कि समाज के इतिहास, परंपरा और भविष्य को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण घटना है। यह समाज के प्रत्येक सदस्य के लिए जिम्मेदारी का अवसर है कि वे उपस्थित होकर जागरूकता, एकता और धार्मिक मर्यादा का परिचय दें।
दिगंबर Jain सामाजिक संसद ने सदैव यह सिद्ध किया है कि धर्म और लोकतंत्र साथ-साथ चल सकते हैं। 1 फरवरी की सभा में समाज के सभी प्रतिनिधि और सदस्य अपनी सक्रिय भागीदारी से यह सुनिश्चित करेंगे कि अध्यक्ष पद का चयन गरिमा, संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप हो। यह न केवल वर्तमान, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक प्रेरक संदेश होगा।
संवाददाता :राजेश जैन दद्दू
