किसानो की मेहनत पर फिरा पानी!
जंगली जानवरों ने किसानों के सपने किए तहस-नहस
संवाददाता: मनोज कुमार पुष्पत
पड़ाना सहित 10 गांवों में हिरण से लेकर रोजडे नीलगाय तक का कहर, आवारा मवेशी भी बने आफत
पड़ाना-खेत में पसीना, आंखों में सपने और कर्ज लेकर बोई गई सोयाबीन मक्का उड़द मूंगफली इत्यादि फसल लेकिन अब न मौसम साथ दे रहा है और न ही जंगल के जानवर। पड़ाना क्षेत्र के किसानों के लिए ये दिन सबसे भारी पड़ रहे हैं।
यहां हिरण, रोजड़ा, बारासिंघा और जंगली सूअर के साथ-साथ आवारा मवेशियों ने भी किसानों की कमर तोड़ दी है। मामला सिर्फ पड़ाना का नहीं है। इसके आसपास के 8 से 10 गांव भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं।
रात को रखवाली, दिन को नुकसान
रात होते ही किसान लाठी-टॉर्च लेकर खेतों की रखवाली करते हैं। इसके बाद भी सुबह खेत में पहुंचते हैं तो बर्बादी का मंजर मिलता है। हिरण रोजडे पूरी फसल पैरों से कुचल देते हैं। सूअर जड़ें उखाड़ देते हैं। जो बचता है उसे आवारा मवेशी खा जाते हैं!किसान राजेश डाबरा बलदेव सिंह परमार रमेश पुष्पद अशोक पटेल पप्पू विश्वकर्मा गोपाल प्रसाद नवलाया वाला ओम गुप्ता रमेश गुर्जर जगदीश दरबार अनोखी खाती राजेश रावला दिनेश परमार बद्री मामा राजाराम गुर्जर समद अंसारी जफर भाई विक्रम सिंह राजपूत संतोष राजपूत जगदीश सूर्यवंशी मांगीलाल शर्मा लाड सिंह राजपूत इत्यादि किसानों का कहना है कि जंगल से जानवरों का गांव की तरफ रुख बढ़ गया है। अब किसानों ने कलेक्टर से मांग की है कि प्रभावित गांवों में नुकसान का तुरंत आकलन कर मुआवजा दिया जा
