*Narmada का पानी बांडी नदी में छोड़ने की उठी मांग,भीनमाल के किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी*
भीनमाल (मुकेश सोलंकी)। बांडी नदी के बहाव क्षेत्र के करीब 120 गांवों में गहराते पेयजल एवं सिंचाई संकट के स्थायी समाधान की मांग को लेकर शुक्रवार को बांडी नदी बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान एवं ग्रामीण भीनमाल उपखंड कार्यालय पहुंचे। किसानों ने राज्य सरकार से गुजरात की तर्ज पर ही नर्मदा नहर का पानी बांडी नदी में प्रवाहित करने, सिणधरा बांध की हाइट घटाने तथा क्षेत्र की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग उठाई। किसानों ने भीनमाल उपखंड अधिकारी को लिखित ज्ञापन सौंपा और अपनी बात रखी।
*सिणधरा बांध से रुका प्राकृतिक प्रवाह,1200 फीट पहुंचा भूजल*
नदी बचाओ संघर्ष समिति के प्रमुख सेवादार श्रवण सिंह राठौड़ ने बताया कि वर्ष 2006 में लगभग 37 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सिणधरा बांध पिछले करीब 20 वर्षों में कई बार भर चुका है, लेकिन आज तक उसके पानी का न तो सिंचाई में उपयोग हुआ और न ही पेयजल आपूर्ति में। इसके विपरीत बांध बनने के बाद बांडी नदी का प्राकृतिक प्रवाह लगभग पूरी तरह रुक गया, जिससे डाउन स्ट्रीम क्षेत्र के करीब 120 गांवों में भूजल स्तर लगातार गिरकर 500 से 1200 फीट तक पहुंच गया है। परिणामस्वरूप क्षेत्र में पेयजल संकट गहराने के साथ खेती और पशुपालन भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं तथा हजारों युवाओं को रोजगार के लिए पलायन करना पड़ा है।
*गुजरात की तर्ज पर हो जल पुनर्भरण*
राठौड़ ने ज्ञापन में कहा कि गुजरात में नर्मदा नहर के पानी से तालाबों और जलस्रोतों का पुनर्भरण (रिचार्ज) किया जा रहा है, जबकि सांचौर क्षेत्र में नर्मदा जल की अधिक उपलब्धता के कारण कई स्थानों पर जलभराव और दलदल की स्थिति बन गई है। दूसरी ओर भीनमाल क्षेत्र पानी की भारी कमी से जूझ रहा है।

उन्होंने सुझाव दिया कि बरसात के चार महीनों में भरूड़ी गांव के पास पहले से बिछी नर्मदा पाइपलाइन के माध्यम से बिना फिल्टर किया गया नर्मदा जल बांडी नदी में छोड़ा जाए। इससे सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक भार डाले बिना नदी के बहाव क्षेत्र में आने वाले लगभग 120 गांवों का भूजल स्तर रिचार्ज होगा और पेयजल व सिंचाई की समस्या का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।
*किसानों की 5 प्रमुख मांगें*
*(1). नर्मदा जल का प्रवाह -* बरसात के चार महीनों में नर्मदा नहर का बिना फिल्टर पानी पाइपलाइन के माध्यम से बांडी नदी में छोड़ा जाए।
*(2). बांध की ऊंचाई घटाना -* वर्तमान स्वरूप में अनुपयोगी साबित हो चुके सिणधरा बांध की ऊंचाई 45 फीट से घटाकर 22 फीट की जाए।
*(3). नए गेटों का निर्माण -* 22 फीट की ऊंचाई पर नियंत्रित जल निकासी के लिए नए गेट बनाए जाएं, ताकि वर्षा ऋतु में बांडी नदी का प्राकृतिक प्रवाह पुनः बहाल हो सके।
*(4). पेयजल आपूर्ति -* नर्मदा (ER) परियोजना के अंतर्गत दासपां, कोरा सहित सभी वंचित गांवों को भीनमाल फिल्टर हाउस से तत्काल जोड़कर नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू की जाए।
*(5). समिति का पुनर्गठन -* सिणधरा बांध जल वितरण समिति में बहाव क्षेत्र के प्रभावित गांवों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।
*29 जुलाई को आंदोलन की रणनीति बनेगी*
समिति के प्रमुख सेवादार श्रवण सिंह राठौड़ ने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार किसानों की इन जनहित एवं किसान हित से जुड़ी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो 29 जुलाई को क्षेत्र के किसानों की बैठक बुलाकर व्यापक जनआंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
*प्रदर्शन में ये रहे मौजूद*
ज्ञापन कार्यक्रम में कोरा सरपंच खेमराज देवासी, कावतरा सरपंच गजे सिंह चंपावत, भाजपा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष मंगलाराम पुरोहित, उपप्रधान प्रतिनिधि मिट्टू सिंह पादरा, किसान नेता हरजीराम चौधरी, कांग्रेस के पूर्व पंचायत समिति सदस्य हरदान सिंह चौहान, विक्रम सिंह चंपावत (दासपां), कांग्रेस ओबीसी विभाग जिलाध्यक्ष सीएल गहलोत, एडवोकेट श्रवण ढाका, समाजसेवी रामलाल सोलंकी, पंचायत समिति सदस्य नरपत गोस्वामी, भागलसेफ्टा सरपंच तुलसाराम भील, पूर्व बैंक प्रबंधक मान सिंह चंपावत, बन्ने सिंह चंपावत, गवराराम पुरोहित, चुनीलाल पुरोहित, विजयराज पुरोहित, गोविंद पुरोहित, प्रहलाद पुरोहित, रणजीत सिंह, पांचाराम चौधरी, केसाराम चौधरी, फगलूराम मेघवाल, एडवोकेट दिनेश हेगड़े, राणाराम लुहार, नाथाराम पंचाल, पारस पारंगी, नारायण सिंह, मकन सिंह चौहान, इंद्र सिंह भाटी, जीव सिंह चौहान सहित भीनमाल विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में किसान एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
