खेतों और गांव तक जाने का रास्ता बंद, न्याय की मांग लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे किसान
रिपोर्टर : पवन धाकड़ जावरा
सेजावता गांव में कृषि मार्ग विवाद ने पकड़ा तूल, तहसीलदार ने किया मौके का निरीक्षण; किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी
जावरा। तहसील क्षेत्र के ग्राम सेजावता में किसानों के पारंपरिक कृषि मार्ग को लेकर विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। खेतों तक जाने का वर्षों पुराना रास्ता बंद होने से परेशान बड़ी संख्या में किसान गुरुवार को जावरा एसडीएम कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के सामने अपनी समस्या रखी। किसानों ने आवेदन देकर बंद किए गए रास्ते को तत्काल खुलवाने और कथित रूप से रास्ते पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
किसानों का कहना है कि यह मार्ग उनके लिए केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि खेती-किसानी की जीवनरेखा है। इसी रास्ते से वे वर्षों से अपने खेतों तक पहुंचते रहे हैं और ट्रैक्टर, कृषि मशीनरी तथा अन्य कृषि उपकरणों का परिवहन करते हैं। रास्ता बंद होने के कारण किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्षों पुराने रास्ते के बंद होने से बढ़ी परेशानी
ग्राम सेजावता के किसानों ने बताया कि उनकी कृषि भूमि तक पहुंचने के लिए एक पारंपरिक रास्ता वर्षों से उपयोग में लिया जाता रहा है। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि इस मार्ग का उपयोग कई पीढ़ियों से किया जा रहा है। खेती के सीजन में इसी रास्ते से किसान अपने खेतों में जाते हैं और फसलों से जुड़े सभी कार्य करते हैं।
किसानों के अनुसार वर्तमान में रास्ता बंद होने के कारण उन्हें खेतों तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। कई बार ट्रैक्टर और बड़े कृषि उपकरण ले जाने में भी परेशानी हो रही है। इससे खेती के काम प्रभावित हो रहे हैं।
कॉलोनाइजर पर लगाया रास्ता बंद करने का आरोप
किसानों द्वारा एसडीएम कार्यालय में दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया कि एक कॉलोनाइजर द्वारा उक्त कृषि मार्ग पर दीवार बनाकर कथित रूप से कब्जा कर लिया गया है। किसानों का कहना है कि रास्ता बंद होने से उनका खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
उन्होंने प्रशासन को बताया कि केवल आवागमन ही नहीं, बल्कि पानी निकासी की व्यवस्था भी प्रभावित हो गई है। बारिश के मौसम में खेतों में पानी भरने की समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिससे फसलों को नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।
किसानों ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि रास्ते पर अवैध रूप से निर्माण किया गया है तो उसे हटाकर किसानों का मार्ग बहाल किया जाए।

बड़ी संख्या में किसान पहुंचे एसडीएम कार्यालय
अपनी समस्या को लेकर गुरुवार को ग्राम सेजावता के बड़ी संख्या में किसान जावरा एसडीएम कार्यालय पहुंचे। किसानों ने अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी परेशानी बताई और लिखित आवेदन सौंपा।
किसानों ने कहा कि वे लंबे समय से इस समस्या का सामना कर रहे हैं। उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि अपने अधिकार के मार्ग को पुनः प्राप्त करना है। उन्होंने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की।
एसडीएम ने लिया तत्काल संज्ञान
किसानों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। एसडीएम ने जावरा तहसीलदार पंकज पवैया को मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करने के लिए कहा।
निर्देश मिलने के बाद तहसीलदार पंकज पवैया राजस्व अमले के साथ ग्राम सेजावता पहुंचे। उन्होंने मौके पर पहुंचकर विवादित स्थल का निरीक्षण किया और वहां मौजूद किसानों तथा संबंधित पक्षों से जानकारी प्राप्त की।
राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की होगी जांच
मौके पर निरीक्षण के दौरान तहसीलदार ने संबंधित दस्तावेजों की जानकारी ली और वास्तविक स्थिति को समझने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि मामले का समाधान राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति के आधार पर किया जाएगा।
तहसीलदार ने किसानों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करेगा। किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और नियमों के अनुसार उचित निर्णय लिया जाएगा।
किसान नेता डीपी धाकड़ ने दी आंदोलन की चेतावनी
मौके पर किसान नेता डीपी धाकड़ सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि किसानों के वर्षों पुराने रास्ते को बंद करना गंभीर समस्या है। यदि जल्द ही किसानों को राहत नहीं मिली तो उन्हें मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
डीपी धाकड़ ने कहा कि किसान अपनी मेहनत से देश और प्रदेश के लिए अन्न उत्पादन करते हैं, ऐसे में उन्हें खेतों तक पहुंचने के मूलभूत अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द रास्ता बहाल कराने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान समय रहते नहीं किया गया तो किसान बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
बारिश के मौसम में बढ़ सकती है समस्या
किसानों ने प्रशासन को यह भी बताया कि बारिश के मौसम में रास्ता बंद होने से उनकी परेशानी और बढ़ सकती है। खेतों से पानी निकासी प्रभावित होने पर फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।
किसानों का कहना है कि खेती पूरी तरह समय पर होने वाले कार्यों पर निर्भर करती है। यदि खेतों तक पहुंचने में देरी होती है तो बुआई, सिंचाई और फसल प्रबंधन जैसे काम प्रभावित होते हैं।
प्रशासन के आश्वासन से किसानों को उम्मीद
तहसीलदार के निरीक्षण और प्रशासन के आश्वासन के बाद किसानों को उम्मीद है कि जल्द ही उनकी समस्या का समाधान होगा। किसानों ने कहा कि वे प्रशासन की जांच और कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में पारंपरिक रास्ते किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन को जल्द कार्रवाई कर विवादों का समाधान करना चाहिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी विवाद न बढ़ें।
निष्पक्ष समाधान की मांग
सेजावता का यह मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में है। किसानों की मांग है कि राजस्व रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति के आधार पर जल्द निर्णय लिया जाए। वहीं प्रशासन ने भी मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया है।
अब देखने वाली बात होगी कि जांच के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और किसानों के पुराने मार्ग को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है। फिलहाल किसान अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
