धान पंजीयन की तारीख 15 दिन बढ़ाने की मांग, तीन दिन में समाधान नहीं तो कलेक्ट्रेट घेरेंगे किसान: आनंद उरमलिया
संवाददाता: अमन त्रिपाठी
नागौद वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद उरमलिया ने धान और सिकमी पंजीयन की अंतिम तारीख कम से कम 15 दिन बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि पोर्टल, सर्वर और अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण कई किसान समय पर पंजीयन नहीं करा पा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तीन दिन में किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो किसान एकजुट होकर कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे।
पंजीयन प्रक्रिया में तकनीकी अड़चनें
उरमलिया ने कहा कि किसान दिन-रात मेहनत कर फसल तैयार करता है। खेती के लिए खाद जुटाने से लेकर कर्ज लेकर फसल लगाने तक उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके बाद उपज बेचने के समय पंजीयन, स्लॉट बुकिंग, गिरदावरी और फार्मर आईडी जैसी प्रक्रियाओं में भी परेशानी हो रही है। उनके अनुसार, पोर्टल और सर्वर की दिक्कतों के साथ दूसरी तकनीकी अड़चनें किसानों का काम प्रभावित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि समय पर पंजीयन नहीं होने से किसान अपनी धान की उपज समर्थन मूल्य पर बेचने की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाएंगे। पंजीयन की अंतिम तारीख नजदीक होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ रही है। उरमलिया ने सरकार और प्रशासन से आग्रह किया कि तकनीकी समस्याओं को प्राथमिकता से हल किया जाए, ताकि पात्र किसानों को पंजीयन का अवसर मिल सके।
किसानों की मेहनत और उपज बेचने का सवाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि किसान फसल तैयार करने के लिए पूरे मौसम मेहनत करता है। खाद के लिए कतार में खड़ा होता है और खेती के खर्च जुटाने के लिए कर्ज भी लेता है। ऐसे में फसल बेचने के समय सरकारी प्रक्रियाओं में अटकना उसके लिए परेशानी का कारण बनता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसान का पंजीयन ही नहीं हो पाएगा तो वह अपनी धान की उपज समर्थन मूल्य पर कैसे बेच सकेगा।
उरमलिया ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है, लेकिन इसके लिए छोटे और सीमांत किसानों को पंजीयन तथा अन्य प्रक्रियाओं में आ रही दिक्कतों से राहत देना भी जरूरी है। उन्होंने मांग की कि तकनीकी कारणों से किसी पात्र किसान का पंजीयन न छूटे और किसानों को प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
15 दिन की समय-सीमा बढ़ाने की मांग
आनंद उरमलिया ने सरकार और प्रशासन से धान पंजीयन की अंतिम तारीख कम से कम 15 दिन आगे बढ़ाने की मांग की। साथ ही उन्होंने गिरदावरी और फार्मर आईडी से जुड़ी समस्याओं का शीघ्र निराकरण करने की बात कही। उनका कहना है कि तारीख बढ़ने से उन किसानों को राहत मिल सकती है, जो पोर्टल या अन्य तकनीकी अड़चनों के कारण अभी तक पंजीयन नहीं करा पाए हैं।
उन्होंने प्रशासन से किसानों की शिकायतों को सुनने और समय रहते समाधान करने का आग्रह किया। उरमलिया के अनुसार, पंजीयन की प्रक्रिया में आ रही दिक्कतों को दूर करना जरूरी है, ताकि पात्र किसान समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने के अवसर से वंचित न रहें। उन्होंने कहा कि किसानों को पंजीयन के लिए स्पष्ट जानकारी और सुचारु व्यवस्था मिलनी चाहिए।
तीन दिन में समाधान नहीं तो आंदोलन की चेतावनी
उरमलिया ने चेतावनी दी कि यदि तीन दिन के भीतर किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो किसान एकजुट होकर कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम किसानों की मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए उठाया जाएगा। कांग्रेस नेता ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाते रहने की बात भी कही।
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि किसानों को आंदोलन के लिए मजबूर होने से पहले पंजीयन, गिरदावरी और फार्मर आईडी संबंधी समस्याओं का समाधान किया जाए। अब किसानों की नजर प्रशासन की कार्रवाई और धान पंजीयन की अंतिम तारीख पर लिए जाने वाले निर्णय पर रहेगी।
