देश की स्वाद राजधानी इंदौर का मशहूर सराफा चाट चौपाटी विवादों और सुरक्षा सवालों के घेरे में है। नगर निगम शिफ्टिंग पर कर रहा विचार, व्यापारियों ने जताई आपत्ति।
इंदौर: स्वाद की राजधानी का सराफा बाजार विवादों में
मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर न केवल देश का सबसे स्वच्छ शहर है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में भारत की “स्वाद राजधानी” भी है। यहां के सराफा बाजार और छप्पन दुकानें देशभर में खानपान की अपनी खास पहचान रखते हैं।लेकिन अब सराफा चाट चौपाटी विवाद और सुरक्षा सवालों के कारण सुर्खियों में है।
सराफा बाजार: स्वाद की शुरुआत और ऐतिहासिक पहचान
करीब 80 साल पहले सराफा बाजार में ही इंदौर के स्वाद की पहचान पनपी। सोना-चांदी और जवाहरात की दुकानों के साथ यहां घेवर, मावा मिठाई और नमकीन भी बिकते थे। धीरे-धीरे यह जगह नमकीन, मिठाई और चाट के ठेलों से मशहूर हो गई।
सराफा की रात में सजने वाली चाट चौपाटी आज भारतीय और विदेशी सैलानियों का आकर्षण केंद्र है।
विवाद और सुरक्षा सवालों का केंद्र क्यों बना सराफा?
हरदा की पटाखा फैक्ट्री हादसे के बाद नगर निगम ने सराफा चौपाटी की सुरक्षा की जांच की। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि –
- संकरी गलियों में गैस भट्टियों का उपयोग होता है।
- सोने-चांदी के काम में तेजाब और गैस सिलेंडर भी बड़ी मात्रा में मौजूद रहते हैं।
- किसी दुर्घटना की स्थिति में फायर ब्रिगेड के वाहन पहुंचना मुश्किल है।
ऐसे में रोज हजारों लोगों की भीड़ यहां सुरक्षा जोखिम मानी जा रही है।
नगर निगम कर रहा शिफ्टिंग पर विचार
नगर निगम ने सराफा चौपाटी को अन्य जगह शिफ्ट करने का विचार रखा है। इस मामले में सराफा व्यापारी भी बंटे हुए हैं —
- कुछ चाहते हैं कि केवल परंपरागत नमकीन-मिठाई दुकानें रहें।
- कुछ का कहना है कि यदि चौपाटी रहनी है तो सभी दुकानों को अनुमति मिले।
- वहीं, असामाजिक तत्वों से उत्पन्न रात के विवादों को भी व्यापारी समस्या मानते हैं।
सराफा की परंपरागत मिठाइयों की लिस्ट
सराफा के पुराने जमाने की मिठाइयों में शामिल हैं:
- मावे की बर्फी, मक्खन बड़े, घेवर, फैनी, मिश्री लड्डू
- मौसमी मिठाइयां जैसे गाजर का हलवा, मूंग का हलवा
- मालवा के गराड़ू, दहीबड़ा, बड़ी जलेबी और केसरिया दूध
- 1950 में यहां आइसक्रीम का चलन भी शुरू हुआ था।
आज सराफा बाजार, जो कभी स्वाद की राजधानी इंदौर का गर्व माना जाता था, अब विवादों और सुरक्षा सवालों के चलते चर्चा में है। नगर निगम जहां सुरक्षा देखते हुए शिफ्टिंग पर विचार कर रहा है, वहीं व्यापारी अपनी परंपरा और कारोबार बचाने की जंग लड़ रहे हैं।
