सुशासन, संवेदना और महिला सशक्तिकरण: मध्यप्रदेश में ‘Mohan Model ’ का सजीव अनुभव
जब दो वर्ष पूर्व डॉ. Mohan Yadav मध्यप्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने आए, तब यह स्पष्ट हो गया था कि उनका नेतृत्व केवल प्रशासनिक स्थिरता तक सीमित नहीं रहेगा। उनके नेतृत्व में शासन को एक नैतिक, सामाजिक और मानवीय दिशा प्राप्त होगी। सत्ता संभालने के शुरुआती दिनों में ही उन्होंने यह संदेश दे दिया कि उनका दृष्टिकोण केवल राजनीतिक संतुलन तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति, नीयत और क्रियान्वयन—तीनों का संतुलित मिश्रण प्रदेश के विकास के लिए अग्रिम भूमिका निभाएगा।
मैं स्वयं एक साधारण श्रमिक पृष्ठभूमि से आती हूँ। अपने जीवन में संघर्ष, अभाव और श्रम का अनुभव होने के कारण मुझे यह समझ है कि एक नेता की संवेदनशीलता कितनी महत्वपूर्ण होती है। मुख्यमंत्री द्वारा मुझे मंत्रिमंडल में शामिल करना केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि समावेशी सोच का प्रतीक था। उनके मंत्रिमंडल में सभी साथियों के साथ समभाव और समानता का व्यवहार स्पष्ट रूप से देखा गया। उनका लोककथन—“मुखिया मुख सो चाहिए, खान-पान सब एक”—उनकी शासन शैली का प्रतिबिंब बन चुका है।
डॉ. Mohan Yadav आज केवल मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि “सबके भैया” के रूप में पहचाने जाते हैं। उनके व्यवहार, संवाद और संवेदनशीलता ने प्रदेश की लाखों बहनों के दिलों में विश्वास और स्नेह पैदा किया। मंडला जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मेरी सहज टिप्पणी—“हमारे भैया आज सब बहनों के भाई बन गए”
इस भाव को बखूबी व्यक्त करती है। उनका यह दृष्टिकोण केवल प्रचार का परिणाम नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत संवेदनशीलता और व्यवहार से निर्मित सजीव अनुभव है।
महिला सशक्तिकरण उनकी सरकार की प्राथमिकता और नैतिक प्रतिबद्धता रही है। पूर्ववर्ती सरकारों की महिलाओं के लिए शुरू की गई योजनाओं को उन्होंने निरंतरता और प्रभावशीलता प्रदान की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष आग्रह पर नई योजनाओं की शुरुआत की गई, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर सशक्त बनाना था। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उनके ब्लॉग में यह दृष्टि स्पष्ट रूप से व्यक्त हुई कि महिलाएँ यदि मानसिक, आर्थिक और बौद्धिक रूप से सशक्त होंगी, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र मजबूत होंगे।
लाडली बहना योजना और आर्थिक सशक्तिकरण
लाडली बहना योजना मध्यप्रदेश सरकार की पहचान बन चुकी है। लगभग 1.26 करोड़ महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1500 रुपये का नियमित अंतरण न केवल आर्थिक सहायता है, बल्कि सरकार और नागरिक के बीच विश्वास का सेतु भी है। इस राशि को चरणबद्ध रूप से 3000 रुपये करने की योजना सरकार की दीर्घकालिक सामाजिक निवेश सोच को दर्शाती है। यह योजना महिलाओं को डिजिटल लेन-देन से जोड़ने और वित्तीय निर्णयों में सक्रिय भागीदारी देने में मदद कर रही है।
महिला सशक्तिकरण केवल प्रत्यक्ष लाभ तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री ने उद्यमिता और आत्मनिर्भरता को भी प्रोत्साहित किया। लखपति दीदी योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए प्रति वर्ष एक लाख रुपये तक की आय का लक्ष्य रखा गया। उद्यम शक्ति योजना के तहत महिलाओं को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराकर व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए प्रेरित किया गया। आज मध्यप्रदेश में 47 प्रतिशत स्टार्टअप्स महिलाओं द्वारा संचालित हैं। रेडीमेड गारमेंट उद्योग में कार्यरत महिलाओं को प्रोत्साहन राशि और “एक बगिया माँ के नाम” योजना के तहत फलदार पौधरोपण, यह सभी पहल दर्शाती हैं कि सरकार महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं बल्कि आर्थिक भागीदार बनाना चाहती है।
Mohan Model में सुरक्षा और अवसर
महिलाओं की सुरक्षा और अवसर भी आर्थिक सशक्तिकरण के साथ महत्वपूर्ण माने गए। सरकार ने नौकरियों में महिलाओं के लिए आरक्षण को 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत किया। संपत्ति पंजीयन शुल्क में छूट और कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित आवास सुविधाओं का विस्तार, यह सभी निर्णय महिला हितों के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाते हैं।
मुख्यमंत्री द्वारा अपने पुत्र का विवाह सार्वजनिक सामूहिक विवाह समारोह में संपन्न कराना आज के समय में एक अनूठा उदाहरण है। यह कदम उन परिवारों के लिए आशा का संदेश है, जो सीमित साधनों में अपने बच्चों के भविष्य की चिंता करते हैं। यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि मुख्यमंत्री की कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है।
प्रेरणा और नेतृत्व
मध्यप्रदेश में पिछले दो वर्षों में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में हुए कार्य अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बने हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव कहते हैं कि उन्हें प्रशंसा नहीं चाहिए, केवल बहनों का आशीर्वाद चाहिए। यही आशीर्वाद उन्हें निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा देता है।
एक मंत्री, महिला और जनप्रतिनिधि के रूप में मुझे गर्व है कि मैं इस परिवर्तनकारी यात्रा का हिस्सा हूँ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश आज सुशासन, संवेदना और समावेशी विकास की दिशा में सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है।

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