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नोएडा प्राधिकरण पर SIT का शिकंजा: इंजीनियर की मौत के मामले में 12 सवाल

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Published On: 23 January 2026
SIT Questions Noida Authority Over Engineer Yuvraj Mehta’s Death, 12 Key Points Raised
— SIT Questions Noida Authority Over Engineer Yuvraj Mehta’s Death, 12 Key Points Raised

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सवालों के घेरे में नोएडा प्राधिकरण, इंजीनियर की मौत मामले में SIT ने पूछे 12 अहम सवाल

नोएडा/ग्रेटर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। यह मामला अब सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बन गया है। मृतक युवराज अपनी जान बचाने के लिए करीब दो घंटे तक मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन न तो समय पर पुलिस पहुंची और न ही राहत एवं बचाव के पुख्ता इंतजाम किए गए। इसी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने नोएडा प्राधिकरण को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है।

SIT ने प्राधिकरण से पूछे 12 सवाल

सूत्रों के मुताबिक, SIT ने नोएडा प्राधिकरण के करीब पांच अलग-अलग विभागों से कुल 12 सवाल पूछे हैं। पहले चरण में 5 बिंदुओं पर जवाब मांगा गया था, जिसके बाद 7 अतिरिक्त सवालों की सूची भेजी गई। ये सवाल सड़क निर्माण, जल निकासी, सुरक्षा इंतजाम, शिकायत निवारण और आपातकालीन प्रबंधन से जुड़े हुए हैं। SIT का मानना है कि अगर समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया गया होता, तो यह हादसा टल सकता था।

हादसे से पहले भी मिल चुकी थीं शिकायतें

जांच में सामने आया है कि ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 इलाके में पहले से ही जलभराव और गड्ढों को लेकर शिकायतें की गई थीं। 31 दिसंबर को जिस जगह यह हादसा हुआ, वहां पानी से भरा गहरा गड्ढा मौजूद था। इसके बावजूद न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए और न ही उस क्षेत्र को सुरक्षित किया गया। SIT इस बात की भी जांच कर रही है कि हादसे से पहले संबंधित विभागों ने क्या कार्रवाई की थी और किन कारणों से लापरवाही बरती गई।

क्या है पूरा मामला

27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता एक कंस्ट्रक्शन साइट के पास से गुजर रहे थे, तभी उनकी कार पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। गड्ढा इतना गहरा था कि कार पूरी तरह डूब गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार युवराज की मौत दम घुटने से हुई, क्योंकि उनके फेफड़ों में काफी मात्रा में पानी भर गया था।

पिता का दर्दनाक बयान

मृतक के पिता ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मौके पर मौजूद अथॉरिटी कर्मचारियों के पास सिर्फ रस्सी थी, कोई बोट या आधुनिक रेस्क्यू उपकरण नहीं था। जो रस्सी नीचे फेंकी जा रही थी, वह कार तक पहुंच ही नहीं पा रही थी। युवराज अंदर से लगातार मदद की गुहार लगाता रहा और कहता रहा कि कार और नीचे जा रही है। पिता का कहना है कि अगर समय पर बोट या गोताखोर पहुंच जाते, तो उनके बेटे की जान बच सकती थी।

हाईटेक सिस्टम रहा फेल

नोएडा को देश के सबसे हाईटेक शहरों में गिना जाता है, लेकिन इस घटना ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी। दो घंटे तक युवक की जिंदगी मौत से जूझती रही, लेकिन पुलिस, प्रशासन और प्राधिकरण के हाईटेक इंतजाम नाकाम साबित हुए। SIT इस बात की भी जांच कर रही है कि आपात स्थिति में रिस्पॉन्स टाइम इतना धीमा क्यों रहा।

जांच का दायरा बढ़ा

SIT ने साफ संकेत दिए हैं कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। यदि जांच में यह साबित होता है कि लापरवाही जानबूझकर की गई या शिकायतों को नजरअंदाज किया गया, तो कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है। फिलहाल टीम दस्तावेजों की जांच, अधिकारियों के बयान और घटनास्थल से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही है।

प्रशासन पर बढ़ता दबाव

युवराज मेहता की मौत ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सुरक्षा इंतजामों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आम लोगों में गुस्सा है और प्रशासन से जवाबदेही की मांग तेज हो रही है। यह मामला अब सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही से जुड़ा हुआ बन चुका है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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