भोपाल में ऊर्जा विभाग की बड़ी उपलब्धि
मध्यप्रदेश में नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता और शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए संचालित CM Helpline पोर्टल पर ऊर्जा विभाग ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य स्तर पर जारी नवीनतम ग्रेडिंग में ऊर्जा विभाग ने सभी विभागों को पीछे छोड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि विभाग की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाती है।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि लोक सेवा प्रबंधन विभाग द्वारा सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निराकरण के आधार पर जो ग्रेडिंग जारी की गई है, उसमें ऊर्जा विभाग को नंबर-1 स्थान प्राप्त हुआ है।
यह ग्रेडिंग 1 मार्च से 31 मार्च 2026 की अवधि के प्रदर्शन के आधार पर तैयार की गई है, जिसकी स्थिति 20 अप्रैल 2026 तक अपडेट की गई। इस मूल्यांकन में ऊर्जा विभाग ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया, जबकि दूसरे स्थान पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग रहा।
शिकायत निवारण प्रणाली की मजबूत व्यवस्था
ऊर्जा विभाग में सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज होने वाली शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक सुव्यवस्थित और बहु-स्तरीय प्रणाली लागू की गई है। यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और निर्धारित समय सीमा में उसका समाधान किया जाए।
विभाग में शिकायतों के समाधान के लिए चार स्तरों पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। यह व्यवस्था इस प्रकार है—
- एल-1 स्तर पर कनिष्ठ अभियंता और सहायक अभियंता
- एल-2 स्तर पर कार्यपालन अभियंता
- एल-3 स्तर पर अधीक्षण अभियंता
- एल-4 स्तर पर मुख्य अभियंता
इन सभी अधिकारियों को सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण समाधान की जिम्मेदारी दी गई है। इस बहु-स्तरीय प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी शिकायत को अनदेखा न किया जाए और हर स्तर पर उसकी गंभीरता के साथ जांच हो।
समयबद्ध समाधान की नीति
ऊर्जा विभाग में शिकायतों के निवारण के लिए स्पष्ट रूप से समय सीमा निर्धारित की गई है। प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों को शिकायत का समाधान 7 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया गया है।
यदि किसी स्तर पर समस्या का समाधान नहीं हो पाता है, तो उसे अगले उच्च स्तर पर अग्रेषित किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि शिकायत का अंतिम समाधान अनिवार्य रूप से हो।
इस समयबद्ध प्रक्रिया के कारण न केवल शिकायतों का तेजी से समाधान हो रहा है, बल्कि नागरिकों का सरकार पर विश्वास भी बढ़ रहा है।
शिकायतों के समाधान में पारदर्शिता
सीएम हेल्पलाइन प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पारदर्शिता है। शिकायत दर्ज होने से लेकर उसके अंतिम समाधान तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप में ट्रैक की जाती है।
ऊर्जा विभाग यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक शिकायत का निवारण बिना किसी अनावश्यक देरी के किया जाए। समाधान के बाद शिकायतकर्ता से फीडबैक भी लिया जाता है, जिससे प्रक्रिया की गुणवत्ता की जांच होती है।
शिकायत तभी बंद की जाती है जब शिकायतकर्ता समाधान से पूरी तरह संतुष्ट होता है। यह व्यवस्था विभाग की जवाबदेही को और मजबूत बनाती है।
CM Helpline की भूमिका
राज्य शासन द्वारा वर्ष 2014 में लोक सेवा प्रबंधन विभाग के माध्यम से सीएम हेल्पलाइन पोर्टल की शुरुआत की गई थी। इसका उद्देश्य नागरिकों को सरकारी सेवाओं से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए एक आसान और प्रभावी मंच उपलब्ध कराना था।
इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक किसी भी सरकारी सेवा से जुड़ी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद यह शिकायत संबंधित विभाग के अधिकारियों तक पहुंचाई जाती है और समाधान की प्रक्रिया शुरू होती है।
इस प्रणाली ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक केंद्रित बनाया है।
ऊर्जा विभाग की संवेदनशील कार्यशैली
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि यह उपलब्धि विभाग की संवेदनशील कार्यशैली का परिणाम है। उन्होंने बताया कि ऊर्जा विभाग लगातार इस दिशा में कार्य कर रहा है कि उपभोक्ताओं और नागरिकों की समस्याओं का समाधान समय पर और प्रभावी तरीके से हो।
उन्होंने कहा कि बिजली से जुड़ी शिकायतें आम नागरिकों के दैनिक जीवन को प्रभावित करती हैं, इसलिए इनका त्वरित समाधान अत्यंत आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत किया है।
दूसरे विभागों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन
सीएम हेल्पलाइन की ग्रेडिंग में ऊर्जा विभाग का प्रथम स्थान प्राप्त करना यह दर्शाता है कि विभाग ने अन्य सभी विभागों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।
दूसरे स्थान पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग रहा, जिसने भी अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन ऊर्जा विभाग की शिकायत निवारण गति और गुणवत्ता सबसे बेहतर पाई गई।
यह प्रदर्शन विभाग की टीम वर्क, निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की जिम्मेदारीपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
शिकायत निवारण की प्रक्रिया का तकनीकी आधार
ऊर्जा विभाग में शिकायत निवारण पूरी तरह तकनीक आधारित प्रणाली पर निर्भर है। सभी शिकायतें सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज होती हैं और वहीं से ट्रैक की जाती हैं।
प्रत्येक शिकायत को एक यूनिक आईडी दी जाती है, जिससे उसकी स्थिति की निगरानी की जा सके। अधिकारी नियमित रूप से इन शिकायतों की समीक्षा करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी शिकायत लंबित न रहे।
यह डिजिटल प्रणाली प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
फीडबैक प्रणाली की अहम भूमिका
सीएम हेल्पलाइन प्रणाली में फीडबैक व्यवस्था को विशेष महत्व दिया गया है। शिकायत का समाधान होने के बाद कॉल सेंटर द्वारा शिकायतकर्ता से संपर्क किया जाता है।
उनसे यह पूछा जाता है कि क्या वे समाधान से संतुष्ट हैं या नहीं। यदि शिकायतकर्ता असंतुष्ट होता है, तो शिकायत को पुनः जांच के लिए भेजा जाता है।
यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि केवल औपचारिक समाधान नहीं बल्कि वास्तविक और संतोषजनक समाधान किया जाए।
नागरिकों का बढ़ता विश्वास
ऊर्जा विभाग की इस उपलब्धि से यह स्पष्ट होता है कि नागरिकों का सरकार की शिकायत निवारण प्रणाली पर विश्वास बढ़ा है।
तेजी से समाधान, पारदर्शिता और जवाबदेही के कारण लोग अब सीएम हेल्पलाइन पोर्टल का अधिक उपयोग कर रहे हैं।
यह व्यवस्था सरकार और जनता के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रही है।
ऊर्जा मंत्री का बयान
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि विभाग की यह उपलब्धि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी विभाग इसी तरह बेहतर प्रदर्शन करता रहेगा और नागरिकों की समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और समय पर सेवाएं उपलब्ध कराना है।
निष्कर्ष
सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण में ऊर्जा विभाग का नंबर-1 स्थान प्राप्त करना राज्य प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह न केवल विभाग की कार्यकुशलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली प्रभावी रूप से काम कर रही है।
यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति, तकनीक और जवाबदेही एक साथ आती हैं, तो नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
ऊर्जा विभाग की यह सफलता अन्य विभागों के लिए भी एक प्रेरणा है कि वे अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी और नागरिक केंद्रित बनाएं।
