सेमरी शाहबाद प्राथमिक विद्यालय की भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की कार्रवाई की मांग
संवाददाता: राहुल जैन
स्कूल की जमीन पर दबंगों का कब्जा, शिक्षा व्यवस्था पर असर
अशोकनगर। जिले की शाढ़ौरा तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम सेमरी शाहबाद से सरकारी स्कूल की भूमि पर कथित अवैध कब्जे का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव में स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय की जमीन पर कुछ दबंग लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर टीन शेड और पक्के निर्माण कर लिए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी भूमि पर कब्जे के कारण विद्यालय के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं में भी कमी आ रही है।
ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचकर लिखित शिकायत प्रस्तुत की है। आवेदन के माध्यम से उन्होंने विद्यालय की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विद्यालय के नाम दर्ज है करीब 2 बीघा भूमि
ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, ग्राम पंचायत सेमरी शाहबाद में स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय के नाम पर लगभग 2 बीघा भूमि आवंटित है। इस भूमि के एक हिस्से में वर्तमान में स्कूल भवन, पंचायत भवन और सार्वजनिक कुआं स्थित है। इसके अलावा बची हुई भूमि विद्यालय के भविष्य के विस्तार, खेल मैदान, बच्चों की गतिविधियों और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए सुरक्षित रखी गई थी।
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय की खाली पड़ी जमीन पर कुछ लोगों की नजर लंबे समय से थी। धीरे-धीरे उन्होंने इस सरकारी भूमि पर कब्जा करना शुरू कर दिया। पहले टीन शेड लगाए गए और बाद में पक्के निर्माण भी कर लिए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में पूरी जमीन पर कब्जा होने की आशंका है।
शौचालय तोड़े जाने से बच्चों को हो रही परेशानी
ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में विद्यालय परिसर की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परिसर में बने पुराने शौचालयों को दबंगों द्वारा तोड़ दिया गया है। इसके बाद वहां मलबा और गंदगी जमा हो गई है, जिससे स्कूल का वातावरण प्रभावित हो रहा है।
विद्यालय में पढ़ने वाले छोटे बच्चों को अस्वच्छ माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, गंदगी के कारण संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। खासकर छात्राओं को शौचालय की सुविधा नहीं मिलने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि विद्यालय परिसर की साफ-सफाई कराई जाए और बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाएं फिर से उपलब्ध कराई जाएं।

ग्रामीणों ने जनसुनवाई में सौंपा आवेदन
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत सेमरी शाहबाद के कई ग्रामीण मंगलवार को आयोजित जिला कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचे। ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम आवेदन सौंपकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।
आवेदन में ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय की भूमि सरकारी संपत्ति है और इसका उपयोग केवल शिक्षा से जुड़े कार्यों के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर जमीन पर कब्जा किया गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि मौके का निरीक्षण कराया जाए, भूमि का सीमांकन किया जाए और अवैध निर्माण को हटाकर विद्यालय की जमीन को सुरक्षित किया जाए।
बच्चों के भविष्य और स्कूल विस्तार को लेकर चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार योजनाएं चला रही है। लेकिन यदि स्कूल की जमीन पर ही कब्जा हो जाएगा तो भविष्य में विद्यालय का विकास रुक सकता है।
स्कूलों में खेल मैदान, अतिरिक्त कक्ष, पेयजल व्यवस्था और अन्य सुविधाओं के लिए पर्याप्त जगह की आवश्यकता होती है। ऐसे में विद्यालय की भूमि पर अतिक्रमण बच्चों के हितों के खिलाफ है।
ग्रामीणों ने कहा कि स्कूल केवल एक भवन नहीं बल्कि गांव के बच्चों के भविष्य का आधार है। इसलिए विद्यालय की जमीन को सुरक्षित रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की उम्मीद
ग्रामीणों की शिकायत के बाद अब प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाएगा और यदि अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द विद्यालय की भूमि को कब्जे से मुक्त कराया जाए, टूटे हुए शौचालयों का निर्माण कराया जाए और स्कूल परिसर में स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत ने सरकारी स्कूलों की भूमि सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर सामने ला दिया है।
