सारणी शॉपिंग सेंटर में अतिक्रमण का आरोप, एमपीपीजीसीएल के सिविल और सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
आवंटित दुकान की सीमा से आगे निर्माण का आरोप, सार्वजनिक स्थल पर कब्जे को लेकर नागरिकों में नाराजगी
संवाददाता: संदीप तायड़े
सारनी/घोड़ाडोंगरी।
मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (एमपीपीजीसीएल) के नगरीय क्षेत्र सारनी में अतिक्रमण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। शहर के प्रमुख व्यावसायिक एवं सार्वजनिक क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे अवैध कब्जों को लेकर स्थानीय नागरिकों में चिंता बढ़ रही है। इसी क्रम में अब सारनी शॉपिंग सेंटर के प्रथम तल पर एक दुकान संचालक द्वारा कथित रूप से आवंटित सीमा से आगे बढ़कर अतिक्रमण किए जाने का मामला सामने आया है।
आरोप है कि शॉपिंग सेंटर में संचालित साईनाथ किराना स्टोर के संचालक द्वारा अपनी आवंटित दुकान के दायरे से बाहर जाकर अतिरिक्त स्थान पर कब्जा कर लिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह निर्माण और विस्तार बिना किसी विभागीय अनुमति के किया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एमपीपीजीसीएल के संबंधित विभागों की जानकारी के बावजूद इस मामले में अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
शहर के प्रमुख केंद्र में अतिक्रमण का मामला
सारनी शॉपिंग सेंटर शहर के प्रमुख व्यावसायिक स्थलों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में लोग खरीदारी और विभिन्न कार्यों के लिए पहुंचते हैं। इसी क्षेत्र में यदि अतिक्रमण जैसी गतिविधियां होती हैं तो इसका सीधा असर आम लोगों और सार्वजनिक व्यवस्था पर पड़ता है।
जानकारी के अनुसार एमपीपीजीसीएल द्वारा शॉपिंग सेंटर के प्रथम तल पर विभिन्न दुकानों का आवंटन किया गया था। इन दुकानों का उपयोग निर्धारित नियमों और सीमाओं के अनुसार किया जाना था। लेकिन आरोप है कि साईनाथ किराना स्टोर के संचालक ने अपनी दुकान की निर्धारित सीमा से आगे बढ़कर सामने की ओर अतिरिक्त स्थान पर कब्जा कर लिया।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दुकान के विस्तार के कारण सार्वजनिक उपयोग की जगह प्रभावित हो रही है। जिस स्थान पर कथित रूप से अतिक्रमण किया गया है, वह शॉपिंग सेंटर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
सार्वजनिक आयोजनों के लिए उपयोग होने वाली जगह पर कब्जे का आरोप
स्थानीय लोगों के अनुसार शॉपिंग सेंटर का यह क्षेत्र केवल व्यापारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी उपयोग किया जाता रहा है।
कई बार यहां राजनीतिक कार्यक्रम, जनसंवाद, धार्मिक आयोजन और अन्य सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। ऐसे महत्वपूर्ण स्थान पर किसी व्यक्ति द्वारा निजी उपयोग के लिए अतिरिक्त कब्जा करना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
नागरिकों का कहना है कि यदि सार्वजनिक उपयोग वाली जगहों पर इसी तरह धीरे-धीरे कब्जे होते रहे तो आने वाले समय में शहर में कार्यक्रमों और आम लोगों की सुविधाओं के लिए स्थान की कमी हो सकती है।
एमपीपीजीसीएल के विभागों की भूमिका पर उठे सवाल
इस मामले में सबसे अधिक चर्चा एमपीपीजीसीएल के सिविल, सुरक्षा और संपदा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर हो रही है। कंपनी के इन विभागों की जिम्मेदारी होती है कि कंपनी की संपत्तियों की सुरक्षा और उचित उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि शॉपिंग सेंटर जैसे प्रमुख स्थान पर निर्माण या विस्तार किया जा रहा था, तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। वहीं यदि जानकारी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
नागरिकों का कहना है कि सरकारी और कंपनी की संपत्ति की सुरक्षा करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। ऐसे में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या अतिक्रमण विभागीय निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
अतिक्रमण को लेकर बढ़ रही चिंता
सारनी क्षेत्र में अतिक्रमण की समस्या लंबे समय से चर्चा में रही है। शहर के विभिन्न हिस्सों में अवैध कब्जों और अनधिकृत निर्माण को लेकर समय-समय पर आवाज उठती रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर अतिक्रमण को नहीं रोका गया तो धीरे-धीरे यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। छोटे स्तर से शुरू होने वाले कब्जे भविष्य में बड़े विवाद का कारण बन सकते हैं।
नागरिकों का मानना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों को निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि सभी लोगों के लिए समान नियम लागू हों और किसी भी व्यक्ति को प्रभाव या दबाव के आधार पर सार्वजनिक संपत्ति का उपयोग करने की अनुमति न मिले।
मुख्य अभियंता ने शिकायत मिलने पर कार्रवाई की बात कही
इस मामले में एमपीपीजीसीएल सारनी के मुख्य अभियंता एस.के. लिल्लोरे ने कहा कि पूरे सारनी क्षेत्र में लोगों द्वारा अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण किए जाने की स्थिति सामने आती रही है। उन्होंने कहा कि शॉपिंग सेंटर के मुख्य स्थल पर साईनाथ दुकान संचालक द्वारा कब्जा किए जाने की जानकारी मिली है।
उन्होंने कहा कि यदि इस संबंध में लिखित शिकायत प्राप्त होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मुख्य अभियंता ने यह भी कहा कि कई मामलों में कार्रवाई के लिए विभागीय प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होता है।
सिविल विभाग ने जांच के बाद कार्रवाई का दिया आश्वासन
वहीं एमपीपीजीसीएल सारनी के सहायक अभियंता सिविल विभाग अभय गुमास्ता ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि साईनाथ किराना स्टोर के संचालक द्वारा मूल आवंटित जगह से आगे बढ़कर सामने की ओर अतिक्रमण किया गया है।
उन्होंने कहा कि मामले की जांच करवाई जाएगी और यदि अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नागरिकों को अब कार्रवाई का इंतजार
सारनी शॉपिंग सेंटर में कथित अतिक्रमण का मामला सामने आने के बाद अब लोगों की नजर एमपीपीजीसीएल प्रशासन की कार्रवाई पर है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कंपनी प्रशासन को सभी मामलों में समान नीति अपनानी चाहिए और जहां भी अतिक्रमण या अनधिकृत निर्माण हो रहा है, वहां समय रहते कदम उठाए जाने चाहिए।
लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के हित से जुड़ा विषय है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में अतिक्रमण बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अतिक्रमण मुक्त व्यवस्था की मांग
सारनी के जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि एमपीपीजीसीएल प्रशासन शॉपिंग सेंटर सहित कंपनी क्षेत्र में सभी अतिक्रमणों की जांच कराए और नियमों के अनुसार कार्रवाई करे।
नागरिकों का कहना है कि कंपनी की जमीन और सार्वजनिक उपयोग वाले स्थानों को सुरक्षित रखना आवश्यक है। निष्पक्ष कार्रवाई से ही लोगों में प्रशासन और विभागों के प्रति विश्वास कायम रहेगा।
अब देखना यह होगा कि जांच के बाद एमपीपीजीसीएल प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या शॉपिंग सेंटर की कथित अतिक्रमित जगह को मुक्त कराया जाता है या नहीं।
