मनावर में भावुक ‘एक कविता मां के नाम’ कार्यक्रम, 10वें पुण्य स्मरण दिवस पर साहित्यकारों ने दी काव्यांजलि
रिपोर्टर – कौशिक पंडित, मनावर
मनावर। एक कविता मां के नाम काव्यांजलि कार्यक्रम का आयोजन मनावर शहर की मूर्धन्य साहित्यकार स्वर्गीय श्रीमती दुर्गा पाठक के दसवें पुण्य स्मरण दिवस पर किया गया। प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी शगुन संस्था द्वारा सिंघाना की एक निजी स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्यकारों और विद्यार्थियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से मां की ममता, त्याग, समर्पण और राष्ट्रप्रेम की भावनाओं को अभिव्यक्त किया।
“तू दिखती बलिदान में, धड़के सेना के जवान में।
मां भारती के रूप में दिखती, तू तिरंगा निशान में।”
एक कविता मां के नाम कार्यक्रम का दीप प्रज्वलन से शुभारंभ
कार्यक्रम के अतिथि किशोर कुमार बागेश्वर, भरत बरफा, गोविंद सेन और अध्यक्षता कर रहे साहित्यकार विश्वदीप मिश्रा ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मां की महिमा का मर्मस्पर्शी चित्रण करते हुए विश्वदीप मिश्रा ने कहा—
“तू दिखती बलिदान में, धड़के सेना के जवान में। मां भारती के रूप में दिखती, तू तिरंगा निशान में।”
उनकी रचना ने मां के स्वरूप को मातृभूमि और देश की रक्षा करने वाले जवानों की भावना से जोड़ते हुए उपस्थित लोगों को भावविभोर किया।
अल्का पण्डित ने स्व. दुर्गा पाठक को किया याद
अल्का पण्डित बड़वानी ने अपनी कविता में कहा—
“काव्य की धारा सी थी तुम, रचनाओं की अद्भुत ग़ज़ल सी थी तुम।”
संदीप जाजमे ने मां की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि ईश्वर को भी मां ने जन्म दिया है।
वरिष्ठ साहित्यकार गोविंद सेन ने मां के त्याग और समर्पण को रेखांकित करते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की—
“मां ममता की है नदी, बहती है अविराम। उसने जीवन कर दिया, संतानों के नाम।”
किशोर बागेश्वर सहित साहित्यकारों ने किया रचना पाठ
एक कविता मां के नाम काव्यांजलि कार्यक्रम में किशोर बागेश्वर, योगिता उपाध्याय और दीपक पटवा ने मां की ममता पर रचना पाठ किया।
कुलदीप पंड्या ने चढ़ावा चोरी और छात्र आंदोलन जैसे विषयों पर अपनी रचनाओं के माध्यम से तीखा प्रहार किया। वहीं राजा पाठक ने अपनी पैरोडी के माध्यम से विद्यार्थियों को मोबाइल के दुष्परिणामों से अवगत कराया।
काव्य गोष्ठी में पंकज प्रखर, अरविंद पंड्या अंजड़ और अनिका पाठक सहित अन्य रचनाकारों ने भी अपना काव्य पाठ किया। शुभी पाठक ने मां पर गीत सुनाकर कार्यक्रम में भावनात्मक रंग भर दिया।
मां की महिमा के साथ स्व. दुर्गा पाठक को काव्यांजलि
कार्यक्रम में मां की ममता, त्याग और समर्पण के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाएं भी सुनने को मिलीं। साहित्यकारों और विद्यार्थियों की सहभागिता ने एक कविता मां के नाम कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
जन शिक्षक ओमप्रकाश राठौर ने सभी अतिथियों और साहित्यकारों का स्वागत किया। मां की महिमा का गुणगान करते हुए कार्यक्रम का संचालन मुकेश मेहता ने किया, जबकि कार्यक्रम के अंत में शालिनी पाठक ने सभी का आभार व्यक्त किया।
स्वर्गीय श्रीमती दुर्गा पाठक के दसवें पुण्य स्मरण दिवस पर आयोजित इस काव्यांजलि के माध्यम से साहित्यकारों ने उनकी स्मृतियों को नमन किया और मां के विभिन्न स्वरूपों को अपनी कविताओं एवं गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया।

