डॉ प्रेरणा दिघे-बाफना सम्मान उनके आयुर्वेद, ज्योतिष, बहुभाषी शोध और सामाजिक सेवा में अद्वितीय योगदान का प्रतीक है। जानिए उनके शैक्षणिक, शोधात्मक और वैश्विक कार्यों की पूरी कहानी।
डॉ प्रेरणा दिघे-बाफना सम्मान: भारतीय ज्ञान-परंपरा का गौरव
डॉ प्रेरणा दिघे-बाफना सम्मान भारतीय आयुर्वेद, ज्योतिष और बहुभाषी शोध को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने वाले एक असाधारण व्यक्तित्व की उपलब्धियों का सम्मान है। आयुर्वेद, चिकित्सा-ज्योतिष और सामाजिक सेवा के संगम से चिकित्सा जगत को नई दृष्टि देने वाली डॉ. प्रेरणा दिघे‑बाफना को उनके अद्वितीय शैक्षणिक, शोधात्मक एवं सामाजिक योगदान हेतु सम्मानित किया गया।
शैक्षणिक उत्कृष्टता की मजबूत नींव
डॉ प्रेरणा बाफना ने 1991-92 में पुणे विश्वविद्यालय से बी.ए.एम.एस. में प्रथम स्थान, तथा 1995 में एम.डी. (काया चिकित्सा) में स्वर्ण पदक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। यही शैक्षणिक दृढ़ता आगे चलकर आयुर्वेद-ज्योतिष के नवाचारों की आधारशिला बनी।

बहुभाषी विद्वता और अंतरराष्ट्रीय पहचान
संस्कृत, प्राकृत, रूसी, बंगाली, मराठी, हिंदी, अंग्रेज़ी और मारवाड़ी सहित अनेक भाषाओं पर उनका अधिकार उन्हें बहुआयामी विदुषी बनाता है। 1995 में रूसी सरकार द्वारा भारतीय पारंपरिक चिकित्सा अनुसंधान हेतु आमंत्रण मिलना उनके अंतरराष्ट्रीय कद को रेखांकित करता है।
आयुर्वेद-ज्योतिष में ऐतिहासिक शोध
ज्योतिष द्वारा रोग-निदान विषय पर पीएचडी कर वे भारत की छठी महिला बनीं—यह उपलब्धि चिकित्सा-ज्योतिष के क्षेत्र में मील का पत्थर है। सफ़ेद दाग (ल्यूकोडर्मा) पर शोध के लिए पुणे विश्वविद्यालय से ₹5 लाख की फ़ेलोशिप तथा महिलाओं में बांझपन पर विशेष शोध उनके अकादमिक योगदान को सुदृढ़ करता है।
अकादमिक, सामाजिक और चिकित्सकीय योगदान
वर्तमान में वे आर.एन. कपूर मेमोरियल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में जनरल मेडिसिन विभाग की एचओडी एवं प्रोफेसर हैं। 16 से अधिक एम.डी. विद्यार्थियों का मार्गदर्शन, शोध प्रकाशन और पुस्तक “नक्षत्र वाटिका का आयुर्वेद में उपयोगिता” उनके अकादमिक समर्पण की मिसाल है।
ज्योतिषीय मार्गदर्शन और सामाजिक प्रभाव
30,000 से अधिक कुंडलियों के अध्ययन के आधार पर 20,000 से अधिक विवाह मार्गदर्शन (90–95% सफलता) उनकी व्यावहारिक दक्षता का प्रमाण है। दैनिक सर्वमत, लोकमत जैसे समाचार-पत्रों में लेखन, ‘सकाळ’ व्याख्यान-श्रृंखला, रेडियो के ‘हेलो डॉक्टर’ कार्यक्रम तथा देशभर में स्वास्थ्य शिविर—उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
सम्मान समारोह और विशिष्ट उपस्थिति
आर.एन. कपूर आयुर्वेदिक कॉलेज मेडिसिन विभाग द्वारा आयोजित समारोह में समाजसेवी वीरेन्द्र कुमार जैन एवं श्रीमती रेखा जैन ने उनके कार्य को भारतीय ज्ञान-परंपरा का सशक्त वाहक बताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ खुशी अग्रवाल और आभार डॉ यशवंत तांबेकर ने व्यक्त किया।
निष्कर्ष: भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा
डॉ प्रेरणा दिघे-बाफना सम्मान केवल एक अलंकरण नहीं, बल्कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक आधार और मानवीय संवेदना के साथ आगे बढ़ाने की प्रेरक गाथा है—जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेगी।
