ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन लखनऊ में हुए सम्मानित, उपाध्याय विहसंत सागर के सान्निध्य में संपन्न हुआ भव्य ज्योतिष सम्मेलन
संवाददाता: मनोज जैन नायक | मुरैना
लखनऊ। आध्यात्मिक चिंतन, भारतीय ज्योतिष परंपरा और समाजोपयोगी ज्ञान के समन्वय को समर्पित एक भव्य तंत्र, मंत्र, यंत्र एवं ज्योतिष सम्मेलन का आयोजन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर, आशियाना में परम पूज्य मेडिटेशन गुरु उपाध्याय 108 श्री विहसंत सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्यों, वास्तु विशेषज्ञों और विद्वानों ने भाग लेकर भारतीय ज्योतिष की प्रासंगिकता, वैज्ञानिक आधार और समाज में उसकी भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।
सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद डॉ. हुकुमचंद जैन (ग्वालियर) का सम्मान रहा। जैन मंदिर आशियाना समिति ने उन्हें तिलक, माल्यार्पण, दुपट्टा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। समारोह में उपस्थित श्रद्धालुओं और विद्वानों ने इस सम्मान को भारतीय ज्योतिष परंपरा के प्रति समर्पित विद्वानों के योगदान का सम्मान बताया।
भारतीय ज्ञान परंपरा को समर्पित रहा सम्मेलन
महावीर दिगंबर जैन मंदिर आशियाना परिसर में आयोजित यह सम्मेलन केवल एक सम्मान समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय ज्ञान-विज्ञान की प्राचीन परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच भी बना।
कार्यक्रम में तंत्र, मंत्र, यंत्र, ज्योतिष, ध्यान, आध्यात्मिक साधना तथा जीवन प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। देशभर से आए विद्वानों ने भारतीय संस्कृति की उन परंपराओं पर प्रकाश डाला, जिनका उद्देश्य व्यक्ति को मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है।
उपाध्याय विहसंत सागर जी महाराज का मिला आध्यात्मिक मार्गदर्शन
सम्मेलन का आयोजन परम पूज्य मेडिटेशन गुरु उपाध्याय 108 श्री विहसंत सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में हुआ। उनके सान्निध्य ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।
उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि मनुष्य के जीवन में आत्मचिंतन, संयम, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक साधना का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। जब व्यक्ति अपने भीतर के ज्ञान को जागृत करता है, तब वह जीवन की कठिन परिस्थितियों का भी धैर्यपूर्वक सामना कर सकता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में ज्योतिष केवल भविष्य जानने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन को संतुलित, अनुशासित और उद्देश्यपूर्ण बनाने का मार्ग भी बताता है।
डॉ. हुकुमचंद जैन का हुआ विशेष सम्मान
सम्मेलन के दौरान ग्वालियर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद डॉ. हुकुमचंद जैन को उनके लंबे समय से किए जा रहे शोध, समाज सेवा तथा ज्योतिष एवं वास्तु के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
जैन मंदिर आशियाना समिति द्वारा उन्हें विधिवत तिलक लगाकर, पुष्पमाला पहनाकर, सम्मान स्वरूप दुपट्टा ओढ़ाकर तथा आकर्षक स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित सभी विद्वानों और श्रद्धालुओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका अभिनंदन किया।
“ज्योतिष जीवन को दिशा देने वाली टॉर्च है” : डॉ. हुकुमचंद जैन
सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान डॉ. हुकुमचंद जैन ने भारतीय ज्योतिष के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि—
“ज्योतिष व्यक्ति का भाग्य बदलने का दावा नहीं करता, बल्कि उसे सही दिशा दिखाने का कार्य करता है। जिस प्रकार अंधेरे रास्ते पर टॉर्च की रोशनी व्यक्ति को सुरक्षित मार्ग दिखाती है, उसी प्रकार ज्योतिष जीवन की संभावित परिस्थितियों का पूर्व संकेत देकर व्यक्ति को सही निर्णय लेने में सहायता करता है।”
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुभव और शास्त्रीय अध्ययन के आधार पर किया गया ज्योतिषीय विश्लेषण व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे ज्योतिष को अंधविश्वास के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा के एक महत्वपूर्ण अध्ययन विषय के रूप में समझें।
युवा पीढ़ी ने दिखाई विशेष रुचि
सम्मेलन की एक विशेष बात यह रही कि इसमें केवल वरिष्ठ नागरिक ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में युवा छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया।
युवाओं ने ज्योतिष, वास्तु, ध्यान और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से प्रश्न पूछे तथा अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
इस दौरान आयोजित शंका समाधान सत्र में करियर, शिक्षा, पारिवारिक जीवन, मानसिक तनाव, आध्यात्मिक विकास तथा जीवन प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
समाज के सभी वर्गों की रही सहभागिता
आयोजन में समाज के विभिन्न आयु वर्गों के महिला एवं पुरुष बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
सम्मेलन का उद्देश्य केवल ज्योतिषीय ज्ञान का प्रसार करना नहीं था, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देना भी था।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने आयोजन को अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।
भारतीय ज्योतिष के वैज्ञानिक पक्ष पर हुई चर्चा
सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं ने भारतीय ज्योतिष की वैज्ञानिक पद्धति, ग्रह-नक्षत्रों के अध्ययन तथा पंचांग आधारित गणनाओं पर भी अपने विचार रखे।
विशेषज्ञों ने बताया कि प्राचीन भारतीय ऋषियों द्वारा विकसित ज्योतिषीय गणनाएं आज भी शोध का विषय बनी हुई हैं और आधुनिक विज्ञान के कई क्षेत्रों में इनके विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी विषय को समझने के लिए अध्ययन, शोध और प्रमाण आधारित दृष्टिकोण आवश्यक है।
देशभर के विद्वानों ने साझा किए अनुभव
सम्मेलन में दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों से आए ज्योतिषाचार्यों एवं विद्वानों ने अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने समाज में बढ़ती मानसिक तनाव की समस्याओं, पारिवारिक चुनौतियों और जीवन प्रबंधन के संदर्भ में आध्यात्मिकता एवं ज्योतिष की सकारात्मक भूमिका पर चर्चा की।
वक्ताओं ने कहा कि सही मार्गदर्शन मिलने पर व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी संतुलित निर्णय लेने में सक्षम बन सकता है।
सम्मेलन में रही प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
इस अवसर पर अनेक प्रतिष्ठित विद्वान एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से—
- जैन ज्योतिषाचार्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि जैन गुरुजी (दिल्ली)
- परिषद के महामंत्री डॉ. हुकुमचंद जैन (ग्वालियर)
- राजीव जैन
- सुशील जैन
- अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त युवा विद्वान एवं कवि विकर्ष शास्त्री
सहित अनेक गणमान्य नागरिक, धर्मप्रेमी एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।
ज्योतिष और आध्यात्मिकता के समन्वय का संदेश

सम्मेलन के समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ज्योतिष, ध्यान और आध्यात्मिक साधना एक-दूसरे के पूरक हैं।
जब व्यक्ति आत्मज्ञान, सकारात्मक सोच और अनुशासित जीवन शैली को अपनाता है, तब वह व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन में अधिक सफल और संतुलित बन सकता है।
सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक पीढ़ी तक वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शोध आधारित अध्ययन के साथ पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
सम्मान समारोह ने बढ़ाया उत्साह
डॉ. हुकुमचंद जैन के सम्मान ने सम्मेलन को विशेष गरिमा प्रदान की। उपस्थित लोगों ने उनके शोध, समाज सेवा और ज्योतिष एवं वास्तु के क्षेत्र में किए गए योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे विद्वानों का सम्मान नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने के लिए प्रेरित करता है।
समारोह का समापन मंगलाचरण, आशीर्वचन और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भविष्य में भी ऐसे ज्ञानवर्धक और समाजोपयोगी आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
