रोटरी क्लब संस्कारधानी द्वारा ज्ञानगंगा कॉलेज में “मेंटल वेलनेस सेमिनार” का आयोजन
जबलपुर। रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3261 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रोटे अमित–पल्लवी जायसवाल की दूरदर्शी सोच और “उत्कृष्ट भारत के निर्माण में सहयोगी युवा पीढ़ी तैयार करने” के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए विद्यार्थियों के मानसिक विकास और उनके उज्ज्वल भविष्य निर्माण की दिशा में विशेष मेंटल वेलनेस सेमिनार का आयोजन किया गया।
इसी क्रम में 8 मई को जबलपुर स्थित ज्ञानगंगा कॉलेज के एमबीए सेमिनार हॉल में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए एक जागरूकता एवं मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक रूप से सशक्त बनाना, तनाव प्रबंधन की समझ विकसित करना और उन्हें जीवन में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
किशोरावस्था में भावनात्मक सहयोग अत्यंत आवश्यक: Dr. Ela Gupta
रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3261 की प्रिवेंशन कमेटी के तत्वावधान में आयोजित इस सेमिनार की मुख्य वक्ता मध्य भारत की प्रसिद्ध काउंसलर एवं वरिष्ठ साइकोलॉजिस्ट डॉ. ईला गुप्ता रहीं।
उन्होंने कहा कि किशोरावस्था बच्चों के जीवन का सबसे संवेदनशील और परिवर्तनशील चरण होता है। इस दौरान बच्चे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलावों से गुजरते हैं, जिन्हें समझना उनके लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे समय में अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया, रील्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का प्रभाव किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहराई से पड़ रहा है। बच्चे लगातार स्वयं की तुलना दूसरों से करने लगते हैं, जिससे उनमें आत्म-संदेह, चिंता और तनाव बढ़ता है।
उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त करने का अवसर दें और उनकी बातों को धैर्यपूर्वक सुनें। “सुनना” ही बच्चों के मानसिक संतुलन की पहली आवश्यकता है।
डिजिटल युग और मानसिक तनाव की चुनौती
सेमिनार में यह भी बताया गया कि आज की पीढ़ी लगातार “परफेक्ट दिखने” और “स्वीकृति पाने” के दबाव में जी रही है। “मैं कैसा दिखता हूं?” और “लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं?” जैसे प्रश्न बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं।
डॉ. ईला गुप्ता ने कहा कि यदि इस अवस्था में बच्चों को सही मार्गदर्शन और भावनात्मक समर्थन नहीं मिलता, तो वे भीतर ही भीतर तनाव, अकेलेपन और असुरक्षा की भावना से जूझ सकते हैं।
माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका
सेमिनार में यह स्पष्ट किया गया कि यदि बच्चे परिवार से दूरी बनाने लगें तो माता-पिता को घबराने के बजाय समझदारी और संवेदनशीलता से व्यवहार करना चाहिए।
बच्चों को स्वतंत्रता देना जितना आवश्यक है, उतना ही जरूरी है उन्हें भावनात्मक सहारा देना। सही संवाद और विश्वास का वातावरण ही बच्चे के मानसिक विकास की नींव रखता है।

सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास पर जोर
कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए रोटे नितिन जैन (डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन मीडिया) ने बताया कि रोटरी क्लब ऑफ जबलपुर संस्कारधानी एवं अन्य सभी रोटरी क्लबों के संयुक्त प्रयास से यह प्रेरणादायी सत्र आयोजित किया गया।
सेमिनार में विद्यार्थियों को निम्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया:
- मानसिक स्वास्थ्य की समझ
- सकारात्मक सोच का विकास
- आत्मविश्वास निर्माण
- तनाव प्रबंधन तकनीक
- करियर मार्गदर्शन
इस आयोजन ने विद्यार्थियों को न केवल जागरूक किया, बल्कि उन्हें अपने भविष्य के प्रति अधिक आत्मविश्वासी और सशक्त बनने की दिशा में प्रेरित भी किया।
विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। प्रश्नोत्तर सत्र में उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर खुलकर चर्चा की।
सेमिनार का माहौल अत्यंत संवादात्मक और प्रेरणादायक रहा, जिससे विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन में मानसिक संतुलन बनाए रखने की व्यावहारिक समझ मिली।
रोटरी क्लब का सामाजिक योगदान
इस अवसर पर रोटरी क्लब संस्कारधानी के अध्यक्ष रोटे अरुण गुप्ता, सचिव रोटे अभिषेक अग्रवाल, कोषाध्यक्ष रोटे अनिल अग्रवाल सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त रोटे अंजुल जैन, रोटे सुनील जसवानी, मनीष बजाज, यश आहूजा, असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रोटे अंकुर माहेश्वरी, रोटे हरीश रिझवानी, रोटे अभिषेक केसरवानी, मिताली बैनर्जी सहित जबलपुर के समस्त रोटरी क्लबों के सदस्य एवं पदाधिकारियों की सक्रिय उपस्थिति एवं सहयोग रहा।
शैक्षणिक संस्थान का सहयोग
इस आयोजन को सफल बनाने में ज्ञानगंगा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के निदेशक रजनीत जैन, पंकज जैन एवं अपूर्व सिंघई का विशेष योगदान रहा। उनके सहयोग से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
निष्कर्ष: मानसिक सशक्तता ही उज्ज्वल भविष्य की कुंजी
यह सेमिनार इस बात का संदेश देता है कि आज के समय में केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन भी उतना ही आवश्यक है।
विद्यार्थियों को यदि सही मार्गदर्शन, सहयोग और समझ मिले, तो वे न केवल अपने व्यक्तिगत जीवन में सफल होंगे, बल्कि समाज और देश के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
रोटरी क्लब द्वारा किया गया यह प्रयास विद्यार्थियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम सिद्ध हुआ।
