भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय होम्योपैथिक सेमिनार में Dr. Arpit Chopra Jain की प्रभावशाली सहभागिता
भोपाल, 7-8 फरवरी 2026: हेल्दी वर्ल्ड विज़न फाउंडेशन के तत्वावधान में भोपाल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय होम्योपैथिक सम्मेलन “HOMOEOVISION-2026” ने स्वास्थ्य जगत में होम्योपैथी के आधुनिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को उजागर किया। इस आयोजन में देशभर से प्रतिष्ठित होम्योपैथिक चिकित्सक, शोधकर्ता और छात्र शामिल हुए।
इस कार्यक्रम में इंदौर से पधारे प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक Dr. Arpit Chopra Jain ने बतौर मुख्य स्पीकर हिस्सा लिया और होम्योपैथी के आधुनिक, वैज्ञानिक एवं एविडेंस-बेस्ड (Evidence-Based) पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का उद्देश्य और महत्व
“HOMOEOVISION-2026” का उद्देश्य होम्योपैथी को सिर्फ पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के रूप में नहीं, बल्कि वैज्ञानिक आधार पर स्थापित चिकित्सा पद्धति के रूप में प्रस्तुत करना था। हेल्दी वर्ल्ड विज़न फाउंडेशन के फाउंडर डॉ. अमित नायक और को-फाउंडर डॉ. पूजा नायक के मार्गदर्शन में यह आयोजन बड़े स्तर पर सफल हुआ।
सेमिनार में होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (HMAI), मध्यप्रदेश की भी सक्रिय भूमिका रही, जिसने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और विशेषज्ञ वक्ताओं के चयन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रमुख अतिथियों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिसने सम्मेलन की शोभा बढ़ाई। इनमें प्रमुख थे:
- मुख्य अतिथि: श्री विश्वास सारंग, मध्यप्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री
- विशिष्ट अतिथि: श्री इंदर सिंह परमार, आयुष मंत्री
- विशेष अतिथि: श्री भगवान दास सबनानी, विधायक
- वरिष्ठ होम्योपैथिक विशेषज्ञ: डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान
इसके अलावा राष्ट्रीय होम्योपैथिक आयोग (NCH) और CCRH से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। इनमें शामिल थे:
- डॉ. रजत चटोपाध्याय
- डॉ. आनंद चतुर्वेदी
- डॉ. हरचरण जीत कौर
- डॉ. संजय गुप्ता
- मध्यप्रदेश होम्योपैथिक रजिस्ट्रार डॉ. आयशा अली
इस प्रकार, कार्यक्रम का मंच केवल एक राष्ट्रीय सम्मेलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह होम्योपैथिक चिकित्सा के नीति निर्धारण और वैज्ञानिक विमर्श का भी केंद्र बन गया।
डॉ. अर्पित चोपड़ा जैन का व्याख्यान
डॉ. अर्पित चोपड़ा जैन ने अपने व्याख्यान में “Evidence-Based Homoeopathic Practice & Research” पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने उपस्थित चिकित्सकों और विद्यार्थियों को बताया कि होम्योपैथी को वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक आधार के साथ पेश करने की आवश्यकता है।
उनके मुख्य विचारों में निम्नलिखित बिंदु शामिल थे:
- साक्ष्य-आधारित चिकित्सा: होम्योपैथिक उपचारों में वैज्ञानिक परीक्षण और डेटा का महत्व।
- वैश्विक मानक: होम्योपैथी को अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा समुदाय में स्वीकार्य बनाने के लिए एविडेंस-बेस्ड अध्ययन।
- अनुसंधान की भूमिका: नए शोध और क्लिनिकल अध्ययन होम्योपैथी की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद करेंगे।
- शिक्षा और प्रशिक्षण: होम्योपैथिक चिकित्सकों और छात्रों को नवीनतम शोध और तकनीकों से अवगत कराना।
डॉ. जैन का व्याख्यान अत्यंत प्रभावशाली रहा और उपस्थित चिकित्सकों तथा विद्यार्थियों ने उनके विचारों की खुले दिल से सराहना की।
एविडेंस-बेस्ड पुस्तकों का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान एविडेंस-बेस्ड होम्योपैथिक पुस्तकों के विभिन्न भाग भी प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर NCH के प्रमुख पदाधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित थे, जिनमें शामिल थे:
- HEB अध्यक्ष: डॉ. रजत चटोपाध्याय
- MARB सदस्य: डॉ. आनंद चतुर्वेदी
- BERH अध्यक्षा: डॉ. हरचरण जीत कौर
इन पुस्तकों को आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार, विधायक श्री भगवान दास सबनानी, वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान और राज्य होम्योपैथिक परिषद की रजिस्ट्रार डॉ. आयशा अली को भेंट किया गया।
इन पुस्तकों में वैज्ञानिक प्रमाण और क्लिनिकल अध्ययन शामिल हैं, जिन्हें हाल ही में CCRH में भी प्रस्तुत और जमा किया गया है। यह कदम होम्योपैथी को वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय योगदान
इस सम्मेलन में न केवल चिकित्सकों और शोधकर्ताओं की भागीदारी रही, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक समर्थन ने भी कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। आयुष मंत्रालय, राष्ट्रीय होम्योपैथिक आयोग (NCH) और CCRH जैसे संस्थानों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि होम्योपैथी अब सिर्फ वैकल्पिक चिकित्सा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और एविडेंस-बेस्ड दृष्टिकोण वाली चिकित्सा पद्धति है।
होम्योपैथी में भविष्य की संभावनाएँ
डॉ. अर्पित चोपड़ा जैन ने अपने विचारों में यह भी बताया कि भविष्य में होम्योपैथिक चिकित्सा को और अधिक वैज्ञानिक, डेटा-संचालित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने चिकित्सकों से आग्रह किया कि वे:
- नवीनतम शोध और क्लिनिकल डेटा का अध्ययन और अनुप्रयोग करें।
- शिक्षा और प्रशिक्षण के माध्यम से नए चिकित्सकों और छात्रों को प्रशिक्षित करें।
- वैज्ञानिक प्रकाशनों और संगोष्ठियों के माध्यम से होम्योपैथी को विश्वसनीय रूप से प्रस्तुत करें।
इस प्रकार, यह सम्मेलन केवल एक व्याख्यान या प्रस्तुति का आयोजन नहीं था, बल्कि होम्योपैथी को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ।
निष्कर्ष
“HOMOEOVISION-2026” ने साबित कर दिया कि होम्योपैथी केवल पारंपरिक चिकित्सा नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान और साक्ष्य आधारित अध्ययन के माध्यम से वैश्विक मंच पर प्रस्तुत की जाने योग्य चिकित्सा पद्धति है।
डॉ. अर्पित चोपड़ा जैन के योगदान, वरिष्ठ विशेषज्ञों की उपस्थिति और एविडेंस-बेस्ड पुस्तकों का विमोचन इस सम्मेलन को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। यह आयोजन चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए ज्ञान, प्रेरणा और भविष्य की दिशा दोनों प्रदान करता है।
