भोपाल में शिक्षक अभ्यर्थियों का बड़ा प्रदर्शन: DPI कार्यालय के बाहर डटे 10,700 चयनित उम्मीदवार,
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बुधवार, 6 मई 2026 को शिक्षा विभाग के डायरेक्टोरेट ऑफ पब्लिक इंस्ट्रक्शन (DPI) कार्यालय के बाहर बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। वर्ग-2 शिक्षक भर्ती परीक्षा में चयनित हजारों अभ्यर्थियों ने अपनी नियुक्ति को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “जॉइनिंग दो” के नारे लगाते हुए सरकार और शिक्षा विभाग से तत्काल नियुक्ति आदेश जारी करने की मांग की।
यह आंदोलन अचानक नहीं उभरा है, बल्कि लंबे समय से चल रही भर्ती प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी का परिणाम माना जा रहा है। प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों का कहना है कि वे वर्षों से चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उनका भविष्य अनिश्चितता में फंसा हुआ है।
2022 से शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया, 2026 तक भी नियुक्ति लंबित
यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश वर्ग-2 शिक्षक भर्ती से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2022 में की गई थी। उस समय हजारों पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे और लाखों अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। लंबे इंतजार और कई चरणों की प्रक्रिया के बाद सितंबर 2025 में अंतिम परिणाम जारी किया गया।
परिणाम घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि कुछ ही महीनों में नियुक्ति आदेश जारी हो जाएंगे, लेकिन स्थिति इसके विपरीत रही। 2026 तक भी लगभग 10,700 चयनित अभ्यर्थियों को जॉइनिंग नहीं मिल पाई है।
प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों का कहना है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर फाइलें अटकी हुई हैं, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
DPI कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन
बुधवार को बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थी भोपाल स्थित DPI कार्यालय के बाहर एकत्र हुए। सुबह से ही अभ्यर्थियों ने धरना शुरू कर दिया और “जॉइनिंग दो”, “हमारी नियुक्ति जारी करो” जैसे नारे लगाते रहे।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इसमें शामिल युवाओं की संख्या और उनकी नाराजगी ने प्रशासन का ध्यान खींचा। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए अभ्यर्थियों ने भी इस प्रदर्शन में भाग लिया।
कई अभ्यर्थियों ने अपने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं, जिन पर लिखा था कि वे पिछले कई वर्षों से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं।
“तीन महीने में नियुक्ति का नियम, फिर भी 9 महीने की देरी”
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि चयन के बाद सामान्यतः तीन महीने के भीतर जॉइनिंग दी जानी चाहिए। लेकिन इस मामले में स्थिति बिल्कुल अलग है।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन्हें 8 से 9 महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन अब तक कोई नियुक्ति आदेश जारी नहीं किया गया। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ भी अन्याय है।
10,700 अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में
इस भर्ती प्रक्रिया में कुल लगभग 10,700 अभ्यर्थी चयनित हुए हैं। ये सभी लंबे समय से जॉइनिंग का इंतजार कर रहे हैं। इनमें से कई अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्होंने अपनी तैयारी के लिए वर्षों का समय दिया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चयन होने के बावजूद नौकरी न मिलना बेहद निराशाजनक है। इससे न केवल आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ता जा रहा है।
कई अभ्यर्थियों ने बताया कि वे अब उम्र सीमा और अन्य करियर विकल्पों को लेकर भी चिंतित हैं।
भर्ती प्रक्रिया में देरी पर उठ रहे सवाल
अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से नहीं चल रही है। परिणाम घोषित होने के बाद भी नियुक्ति आदेश न जारी होना कई सवाल खड़े करता है।
उनका कहना है कि अगर चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो फिर जॉइनिंग में देरी क्यों हो रही है। यह स्थिति सरकार की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है।
सरकार और शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले में अब तक शिक्षा विभाग या DPI की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लगातार विभाग से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा है।
इस चुप्पी ने आंदोलन को और तेज कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक कोई स्पष्ट घोषणा नहीं होती, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरना दे रहे अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन को और व्यापक करेंगे।
उनका कहना है कि आने वाले दिनों में यह प्रदर्शन केवल भोपाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में फैल सकता है। इसके साथ ही वे बड़े स्तर पर आंदोलन और विरोध प्रदर्शन की योजना भी बना रहे हैं।
युवाओं की भावनाएं और संघर्ष
इस आंदोलन के पीछे केवल नौकरी की मांग नहीं है, बल्कि वर्षों की मेहनत और सपनों का सवाल भी जुड़ा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई की, परीक्षा दी और चयन भी प्राप्त किया, लेकिन अब नियुक्ति न मिलने से वे निराश हैं।
कई अभ्यर्थियों ने बताया कि वे आर्थिक रूप से भी कमजोर हो रहे हैं और परिवार पर निर्भर रहने की स्थिति में हैं।
बेरोजगारी का बढ़ता संकट
यह मामला केवल एक भर्ती प्रक्रिया का नहीं, बल्कि राज्य में बढ़ती बेरोजगारी की स्थिति को भी उजागर करता है। हजारों चयनित अभ्यर्थियों का नौकरी के लिए इंतजार करना इस बात का संकेत है कि भर्ती प्रक्रियाओं में गंभीर देरी हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर नियुक्तियां नहीं की गईं तो इससे युवाओं में असंतोष और बढ़ सकता है।
प्रशासन की चुनौती
शिक्षा विभाग और DPI के सामने अब यह एक बड़ी चुनौती बन गई है कि वह इस विवाद को कैसे हल करता है। एक तरफ चयनित अभ्यर्थियों का दबाव है, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक प्रक्रियाओं और नियमों का पालन भी जरूरी है।
यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
निष्कर्ष
भोपाल में DPI कार्यालय के बाहर चल रहा यह प्रदर्शन मध्य प्रदेश की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में देरी और अनिश्चितता को उजागर करता है। 10,700 चयनित अभ्यर्थियों की जॉइनिंग न होना न केवल प्रशासनिक देरी को दर्शाता है, बल्कि युवाओं की उम्मीदों पर भी सवाल खड़ा करता है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि शिक्षा विभाग इस मामले में कब तक कोई ठोस कदम उठाता है और क्या चयनित उम्मीदवारों को जल्द उनकी नियुक्ति मिल पाती है या नहीं।
यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है, यदि सरकार और प्रशासन ने जल्द कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया।

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