—Advertisement—

डोल ग्यारस: भगवान श्रीकृष्ण की जल पूजा से जुड़ी धार्मिक परंपरा और महत्व

Author Picture
Published On: 21 September 2026

—Advertisement—

धार्मिक आस्था और परंपराओं का पर्व है डोल ग्यारस

डोल ग्यारस हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद आने वाली एकादशी के रूप में मनाया जाता है। मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में इस दिन धार्मिक आयोजन, पूजा-अर्चना और पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं। डोल ग्यारस का संबंध भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद माता यशोदा द्वारा की गई जल पूजा से माना जाता है। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं को भी दर्शाता है।

माता यशोदा ने की थी श्रीकृष्ण की जल पूजा

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के अठारहवें दिन माता यशोदा ने उनकी जल पूजा यानी घट पूजा की थी। इसी मान्यता के आधार पर डोल ग्यारस का पर्व मनाया जाता है। कहा जाता है कि जल पूजा के बाद ही इससे जुड़ी अन्य रस्मों की शुरुआत होती है। इस पूजा का उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना और परिवार की सुख-शांति की कामना करना माना जाता है।

जल पूजा के बाद शुरू होती हैं धार्मिक रस्में

डोल ग्यारस के अवसर पर जल पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, पूजा संपन्न होने के बाद अन्य रस्में निभाई जाती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इन रस्मों का स्वरूप स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार अलग हो सकता है। परिवार और समाज के लोग एकत्र होकर पूजा-अर्चना करते हैं तथा धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हैं।

कहीं सूरज पूजा तो कहीं दश्तून पूजा के नाम से पहचान

डोल ग्यारस को विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। कई स्थानों पर इसे सूरज पूजा कहा जाता है, जबकि कुछ जगहों पर दश्तून पूजा के नाम से भी यह परंपरा प्रचलित है। नामों में अंतर होने के बावजूद पर्व से जुड़ी धार्मिक आस्था और पारंपरिक मान्यताएं लोगों को जोड़ती हैं। स्थानीय समुदाय अपनी परंपराओं के अनुसार इस दिन विशेष आयोजन करते हैं।

धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक महत्व

डोल ग्यारस केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक परंपराओं से जुड़ा अवसर भी है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया जाता है और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है। कई स्थानों पर मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों में महिलाएं, बुजुर्ग और अन्य श्रद्धालु उत्साह के साथ शामिल होते हैं।

परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर

डोल ग्यारस के माध्यम से धार्मिक संस्कारों और लोक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। माता यशोदा की जल पूजा से जुड़ी मान्यता इस पर्व को विशेष पहचान देती है। अलग-अलग क्षेत्रों में मनाए जाने वाले रीति-रिवाज धार्मिक विविधता और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। श्रद्धालु इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।

आस्था और परंपरा का संगम

डोल ग्यारस भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जल पूजा, पारंपरिक रस्में और सामूहिक धार्मिक आयोजन इस पर्व की विशेषता हैं। यह अवसर लोगों को अपनी संस्कृति, आस्था और पारिवारिक परंपराओं से जोड़ता है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp