तेज डीजे की आवाज से कानों और दिल की सेहत पर पड़ सकता है असर, ऐसे रखें सावधानी
शादी और उत्सवों में स्पीकर के सामने खड़े होने से बचें; तेज आवाज के बीच समय सीमित रखें और कानों को आराम दें
लाइफस्टाइल डेस्क। शादी, धार्मिक आयोजनों और पार्टियों में तेज डीजे का संगीत उत्साह बढ़ाता है, लेकिन लंबे समय तक ऊंची आवाज के संपर्क में रहना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसका सबसे सीधा असर सुनने की क्षमता पर पड़ता है। शोर शरीर में तनाव भी बढ़ा सकता है, जिससे कुछ लोगों में हृदय गति और रक्तचाप प्रभावित हो सकते हैं। बुजुर्गों और पहले से हृदय संबंधी परेशानी वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
कानों में घंटी बजना चेतावनी का संकेत
तेज आवाज के बीच रहने के बाद कानों में घंटी या भनभनाहट सुनाई देना, आवाजें धीमी लगना या बातचीत समझने में दिक्कत होना ऐसे संकेत हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, आवाज जितनी तेज होगी और उसका संपर्क जितनी देर रहेगा, सुनने की क्षमता को नुकसान का जोखिम उतना बढ़ेगा। बार-बार तेज आवाज के संपर्क में आने से स्थायी श्रवण हानि भी हो सकती है।
WHO के उदाहरण से इस जोखिम को समझा जा सकता है: 80 डेसिबल आवाज के संपर्क के लिए सुरक्षित समय 40 घंटे प्रति सप्ताह बताया गया है, जबकि 90 डेसिबल पर यह घटकर चार घंटे प्रति सप्ताह रह जाता है। इसका अर्थ है कि आवाज थोड़ी और तेज होने पर भी सुरक्षित सुनने का समय काफी कम हो सकता है। किसी आयोजन की वास्तविक आवाज कितनी है, यह मापे बिना केवल संगीत सुनकर उसका डेसिबल स्तर तय नहीं किया जा सकता।
शोर से तनाव भी बढ़ सकता है
तेज शोर केवल कानों तक सीमित परेशानी नहीं पैदा करता। इससे कुछ लोगों को सिरदर्द, घबराहट या नींद में बाधा महसूस हो सकती है। लंबे समय तक शोर के संपर्क और उच्च रक्तचाप के बीच संबंध भी अध्ययन में देखा गया है। हालांकि, किसी एक समारोह में डीजे सुनने से हर व्यक्ति को हृदय रोग हो जाएगा, ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। जोखिम व्यक्ति की सेहत, आवाज की तीव्रता और उसके संपर्क की अवधि पर निर्भर करता है।
आयोजन में कैसे बचाएं अपने कान
डीजे या बड़े साउंड बॉक्स के ठीक सामने खड़े होने से बचें। स्पीकर से दूरी बढ़ाएं और समय-समय पर शांत जगह जाकर कानों को आराम दें। WHO तेज संगीत वाले आयोजनों में सही तरह से लगाए गए ईयरप्लग इस्तेमाल करने और हर घंटे के बाद कुछ समय शोर से दूर रहने की सलाह देता है। बच्चों और बुजुर्गों को स्पीकर के पास लंबे समय तक रखने से बचना भी समझदारी है।
अगर आयोजन से लौटने के बाद कानों में आवाज लगातार बनी रहे या सुनने में दिक्कत हो, तो श्रवण विशेषज्ञ से जांच कराएं। तेज आवाज के संपर्क में रहते हुए सीने में दर्द, गंभीर सांस की तकलीफ या बेहोशी जैसे लक्षण हों तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें। आयोजक ध्वनि का स्तर नियंत्रित रखकर और स्पीकर की जगह सोच-समझकर तय करके कार्यक्रम का आनंद सभी के लिए अधिक सुरक्षित बना सकते हैं।
