मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। इस दौरान दिग्विजय सिंह ने खुद कोर्ट में उपस्थित होकर अपनी पैरवी की और राज्य में दंगों के दौरान प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान उन्होंने कोर्ट से लाइव स्ट्रीमिंग बंद करने का अनुरोध किया, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
2021 में दायर की गई थी जनहित याचिका
दिग्विजय सिंह ने 2021 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मध्य प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा दंगा रोकथाम और भीड़-नियंत्रण को लेकर दिए गए दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रही है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि प्रदेश के कई इलाकों में हुए दंगों में कार्रवाई हमेशा एकतरफा तरीके से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ की गई, जबकि घटनाओं की शुरुआत अन्य पक्ष की ओर से हुई थी।
मक्सी, रतलाम, मंदसौर और खरगोन की घटनाओं का हवाला
दिग्विजय सिंह ने अपनी पैरवी में मक्सी, रतलाम, मंदसौर और खरगोन में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा—
इन जगहों पर दंगे हिंदू पक्ष से शुरू हुए, मगर
पुलिस कार्रवाई लगभग पूरी तरह मुस्लिम समुदाय पर केंद्रित रही।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उन जिलों में नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए थे जहां दंगे ज्यादा होते हैं, लेकिन प्रदेश में इस आदेश का पालन नहीं किया गया।
मॉब लिंचिंग और हेट स्पीच पर भी उठाए सवाल :

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि—
मॉब लिंचिंग रोकने के लिए सरकार को मीडिया, रेडियो और सोशल प्लेटफॉर्म पर जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश है, लेकिन ऐसा कोई अभियान दिखाई नहीं देता।
हेट स्पीच पर भी सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन लागू नहीं की जा रही।
उन्होंने कहा, “हेट स्पीच चाहे किसी भी समुदाय के व्यक्ति द्वारा हो—कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”
बजरंग दल, RSS और BJP पर गंभीर आरोप :
पैरवी के दौरान दिग्विजय सिंह ने बजरंग दल, आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोगों पर कई गंभीर आरोप भी लगाए।
उन्होंने कहा कि 2021 में दायर की गई याचिका पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है और 4 साल बाद भी सुनवाई लंबित है। उन्होंने कोर्ट से मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की।
“संविधान बचा नहीं है” — दिग्विजय सिंह का बयान
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा—
“मैंने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के पालन के लिए आवेदन दिया, लेकिन मुझे ही अपराधी बना दिया गया।
मध्य प्रदेश में संविधान बचा नहीं है, सिर्फ मुसलमानों पर कार्रवाई हो रही है।”
