Digvijaya Singh का बड़ा बयान: तीसरी बार राज्यसभा नहीं, अब पार्टी करेगी फैसला
मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh ने राज्यसभा को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर आखिरकार विराम लगा दिया है। तीसरी बार राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच Digvijaya Singh ने साफ शब्दों में कह दिया है कि वे अब राज्यसभा का हिस्सा नहीं बनेंगे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी सीट खाली कर रहे हैं और आगे किसे राज्यसभा भेजा जाएगा, इसका फैसला पूरी तरह से पार्टी नेतृत्व करेगा। Digvijaya Singh का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस के भीतर राज्यसभा सीट को लेकर गुटबाजी और सियासी खींचतान चरम पर है। उनके बयान ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है, बल्कि कांग्रेस के अंदर संभावित दावेदारों की दौड़ को भी और तेज कर दिया है।
9 अप्रैल को खत्म हो रहा है Digvijaya Singh का कार्यकाल
मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद Digvijaya Singh का वर्तमान कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। करीब ढाई महीने बाद वे राज्यसभा से बाहर हो जाएंगे। उनके कार्यकाल के खत्म होने से पहले ही यह चर्चा जोरों पर थी कि पार्टी उन्हें तीसरी बार राज्यसभा भेज सकती है। हालांकि, दिग्विजय सिंह के ताजा बयान ने इन सभी अटकलों को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मैं राज्यसभा की सीट खाली कर रहा हूं। आगे किसे भेजना है, यह पार्टी तय करेगी। इस एक बयान के साथ उन्होंने राज्यसभा में तीसरी पारी की संभावनाओं पर पूर्ण विराम लगा दिया।
चिट्ठी विवाद पर भी दिया स्पष्ट जवाब
Digvijaya Singh से उस पत्र को लेकर भी सवाल किया गया, जो कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने उन्हें लिखा था। इस पत्र में राज्यसभा में अनुसूचित जाति वर्ग को प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए Digvijaya Singh ने कहा कि यह फैसला उनका नहीं बल्कि पार्टी का है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वे खुद रेस से बाहर हैं और पार्टी जिसे उचित समझे, उसे मौका दे। उनके इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि अब राज्यसभा को लेकर कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की जमीन तैयार हो चुकी है।
कांग्रेस में तेज हुई दावेदारों की दौड़
Digvijaya Singh के मैदान से हटते ही कांग्रेस के भीतर कई दिग्गज नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। पार्टी में राज्यसभा टिकट को लेकर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ चुकी है। हर गुट अपने-अपने नेता के पक्ष में जोर लगा रहा है।
कमलनाथ – पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ लंबे समय से सक्रिय राजनीति में पुनर्वास की कोशिश में हैं। विधानसभा चुनाव में हार के बाद राज्यसभा उनके लिए राष्ट्रीय राजनीति में वापसी का मजबूत मंच हो सकता है।
जीतू पटवारी – प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे जीतू पटवारी भी इस दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं। संगठनात्मक जिम्मेदारी के साथ राज्यसभा सांसद का पद उन्हें राजनीतिक रूप से और मजबूत कर सकता है।
कमलेश्वर पटेल – पार्टी के भीतर गुटबाजी पर खुलकर बोलने वाले कमलेश्वर पटेल भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। उन्होंने हाल ही में नेतृत्व को परोक्ष नसीहत देते हुए संगठन में एकजुटता की बात कही थी।
अरुण यादव – यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके अरुण यादव पिछले कुछ समय से हाशिए पर हैं। राज्यसभा उनके लिए फिर से सक्रिय राजनीति में वापसी का रास्ता बन सकती है।
राज्यसभा को लेकर मध्य प्रदेश का गणित
मध्य प्रदेश में 9 अप्रैल से राज्यसभा सीटों के खाली होने का सिलसिला शुरू होगा। Digvijaya Singh की सीट सबसे पहले खाली होगी। इसके बाद मई तक दो अन्य सीटें भी रिक्त हो जाएंगी।
मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। वर्तमान स्थिति में:
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बीजेपी के पास 163 विधायक
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कांग्रेस के पास 66 विधायक
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 39 वोटों की जरूरत होती है। इस गणित के हिसाब से मध्य प्रदेश की तीन में से दो राज्यसभा सीटें भाजपा के खाते में जाना तय मानी जा रही हैं, जबकि एक सीट कांग्रेस को मिलना लगभग निश्चित है। यही वह सीट है, जिसे Digvijaya Singh खाली कर रहे हैं और जिस पर कांग्रेस के भीतर सबसे ज्यादा राजनीतिक घमासान मचा हुआ है।
भाजपा की स्थिति भी मजबूत
भाजपा की ओर से भी राज्यसभा को लेकर तैयारियां तेज हैं। आने वाले समय में केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल समाप्त होने वाला है। भाजपा अपने मजबूत संख्या बल के चलते दो सीटों पर दावा ठोकने की स्थिति में है।
कांग्रेस के लिए अहम फैसला
Digvijaya Singh का राज्यसभा से हटना कांग्रेस के लिए अवसर भी है और चुनौती भी। पार्टी नेतृत्व को अब यह तय करना होगा कि संगठनात्मक संतुलन, सामाजिक समीकरण और राजनीतिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए किस नेता को राज्यसभा भेजा जाए। स्पष्ट है कि Digvijaya Singh के एक बयान ने कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व किस नाम पर मुहर लगाता है और राज्यसभा की यह सीट किसके हिस्से जाती है।
