दिग्विजय सिंह मानहानि केस: MP-MLA कोर्ट ने लगाया 1 हजार रुपये का खर्च, अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश
व्यापमं मामले में वीडी शर्मा पर लगाए गए कथित आरोपों से जुड़ा है मानहानि प्रकरण, गवाह के कोर्ट पहुंचने के बावजूद नहीं हो सकी गवाही
भोपाल, 20 अगस्त 2026। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह से जुड़े मानहानि मामले में भोपाल की MP-MLA कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण आदेश दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान एक हजार रुपये का खर्च लगाए जाने के साथ दिग्विजय सिंह को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। यह मामला व्यापमं प्रकरण को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वी. डी. शर्मा के खिलाफ दिग्विजय सिंह द्वारा कथित रूप से दिए गए बयान से संबंधित है।
मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष की ओर से एक गवाह अदालत में उपस्थित हुआ था। हालांकि दिग्विजय सिंह की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता के दूसरे मामले में व्यस्त होने के कारण गवाह की गवाही और जिरह की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद अदालत से अगली तारीख दिए जाने का अनुरोध किया गया।
अदालत ने गवाह के अदालत आने और सुनवाई आगे बढ़ने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उसके आने-जाने के खर्च की भरपाई के लिए एक हजार रुपये दिए जाने का आदेश दिया। साथ ही अगली सुनवाई पर दिग्विजय सिंह की उपस्थिति को लेकर भी निर्देश जारी किए गए।
गवाह के खर्च के लिए देने होंगे एक हजार रुपये
इस मामले में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि एक हजार रुपये की राशि को सीधे तौर पर मामले में दोषसिद्धि के बाद लगाया गया दंड नहीं माना जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह राशि सुनवाई के लिए पहुंचे गवाह के आने-जाने और अन्य खर्चों की भरपाई के तौर पर देने का आदेश दिया गया है।
गुरुवार को मामले में परिवादी पक्ष का गवाह अदालत पहुंचा था। सुनवाई के दौरान उससे सवाल-जवाब और जिरह की प्रक्रिया होनी थी, लेकिन बचाव पक्ष के अधिवक्ता की व्यस्तता के चलते यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद अदालत ने अगली तारीख पर गवाही कराने का निर्णय लिया।
अगली सुनवाई में पेश होने का आदेश
MP-MLA कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई को महत्वपूर्ण मानते हुए दिग्विजय सिंह को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अगली तारीख पर परिवादी पक्ष के गवाह से सवाल-जवाब किए जाने की संभावना है। इसके साथ ही बचाव पक्ष के अधिवक्ता को भी गवाह से जिरह का अवसर मिलेगा।
मानहानि का यह मामला लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा में रहा है। इसमें एक ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह हैं, जबकि दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता वीडी शर्मा परिवादी हैं।
व्यापमं मामले से जुड़ा है विवाद
पूरा विवाद मध्यप्रदेश के चर्चित व्यापमं मामले से जुड़े कथित बयानों को लेकर है। आरोप है कि दिग्विजय सिंह ने व्यापमं प्रकरण के संदर्भ में वीडी शर्मा को लेकर कुछ आरोप लगाए थे। इन कथित बयानों पर आपत्ति जताते हुए वीडी शर्मा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और दिग्विजय सिंह के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया।
अब अदालत में इसी प्रकरण की सुनवाई चल रही है। मामले में दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें और साक्ष्य प्रस्तुत कर रहे हैं। अदालत में गवाहों के बयान और उनसे होने वाली जिरह इस मुकदमे की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अगली तारीख पर गवाह से होगी जिरह
गुरुवार को जिस गवाह की गवाही नहीं हो सकी, उसकी गवाही अगली सुनवाई में होने की संभावना है। इसके बाद दिग्विजय सिंह की ओर से अधिवक्ता गवाह से जिरह कर सकते हैं। अदालत के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी।
फिलहाल अदालत ने केवल सुनवाई की प्रक्रिया से संबंधित आदेश जारी किया है। मानहानि के मूल आरोपों पर अंतिम निर्णय अभी नहीं आया है। ऐसे में दिग्विजय सिंह को मानहानि मामले में दोषी ठहराया गया है, ऐसा कहना इस स्तर पर उचित नहीं होगा।
राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा
दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं और दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वहीं वीडी शर्मा मध्यप्रदेश भाजपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। दोनों बड़े राजनीतिक चेहरों से जुड़े होने के कारण इस मानहानि प्रकरण पर राजनीतिक हलकों की भी नजर बनी हुई है।
व्यापमं मामला पहले भी मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा रहा है। इसे लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच लंबे समय तक आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि से जुड़े कथित बयान अब न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
कोर्ट के अगले कदम पर रहेगी नजर
अब सभी की नजर मामले की अगली सुनवाई पर रहेगी। अदालत के निर्देश के अनुसार दिग्विजय सिंह को अगली तारीख पर उपस्थित होना होगा, जबकि परिवादी पक्ष के गवाह की गवाही और जिरह की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
इस मामले में अदालत का अंतिम फैसला साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और दोनों पक्षों की कानूनी दलीलों के आधार पर होगा। फिलहाल मानहानि प्रकरण विचाराधीन है और किसी भी पक्ष के आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध मानना उचित नहीं होगा।
