DIGVIJAY SINGH के बयान से कांग्रेस में विरोध तेज, निधि चतुर्वेदी ने आरोप लगाया – पार्टी की जड़ों में मट्ठा डालने का आरोप | 2025 विवाद
मध्य प्रदेश की राजनीति में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता DIGVIJAY SINGH द्वारा हाल ही में दिए गए बयान के बाद पार्टी के भीतर एक नई उठापटक शुरू हो गई है। पार्टी के भीतर से विरोध तेज़ हो गया है और अब कांग्रेस महासचिव और प्रशिक्षण विभाग की सह प्रभारी निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह के बयान पर निशाना साधते हुए उन्हें घेर लिया है। चतुर्वेदी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में सवाल उठाया है कि क्या दिग्विजय सिंह कांग्रेस की जड़ों में मट्ठा डालने का काम कर रहे हैं?
चतुर्वेदी का आरोप है कि दिग्विजय सिंह अपने हालिया बयान से पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ रहे हैं और इसने पार्टी के वैचारिक संघर्ष को कमजोर किया है। उन्होंने यह भी पूछा कि दिग्विजय सिंह पर कब कार्रवाई होगी और क्या उनका यह बयान ‘घर वापसी’ के प्रयासों का हिस्सा है?
DIGVIJAY SINGH का बयान और कांग्रेस में बढ़ती विवाद की लहर
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा हाल ही में एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एक तस्वीर साझा करने के बाद पार्टी के भीतर घमासान मच गया है। इस तस्वीर में दिग्विजय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवानी और अन्य नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पुरानी तस्वीर पोस्ट की थी। तस्वीर में, मोदी को जमीन पर बैठे हुए दिखाया गया था, जबकि आडवानी और अन्य नेता कुर्सियों पर बैठे थे। दिग्विजय सिंह ने इसे साझा करते हुए लिखा कि कैसे RSS के स्वयंसेवक जनसंघ नेताओं के चरणों में बैठकर देश के प्रधानमंत्री बने। इस बयान के बाद पार्टी के भीतर आक्रोश फैल गया और कई नेताओं ने उनकी आलोचना करना शुरू कर दिया।

निधि चतुर्वेदी का DIGVIJAY SINGH पर हमला
निधि चतुर्वेदी ने अपने फेसबुक पोस्ट में दिग्विजय सिंह के बयान की तीव्र आलोचना करते हुए कहा कि उनका बयान न केवल पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं का अपमान करता है, बल्कि यह कांग्रेस के वैचारिक संघर्ष को भी कमजोर कर देता है। उन्होंने लिखा, “दिग्विजय सिंह ने हाल ही में जो बयान दिया है, उसने राहुल गांधी से लेकर उन तमाम जमीनी कार्यकर्ताओं के मुंह पर तमाचा मारा है, जो आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा के खिलाफ सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं।”
चतुर्वेदी ने कहा कि एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता होने के नाते दिग्विजय सिंह की जिम्मेदारी थी कि वह पार्टी के विचारधारा संघर्ष को मजबूती प्रदान करते, लेकिन उन्होंने इसके बजाय विपक्षी खेमे का गुणगान किया और अपने ही कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने का काम किया। उनका यह बयान कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के आत्म-सम्मान को गहरी ठेस पहुंचाने जैसा है।
DIGVIJAY SINGH का राजनीति में हस्तक्षेप और कांग्रेस को कमजोर करने का आरोप
निधि चतुर्वेदी ने आगे कहा कि मध्य प्रदेश की राजनीति में दिग्विजय सिंह का हमेशा से हस्तक्षेप रहा है, और उनका यह हस्तक्षेप कांग्रेस को कभी मजबूत नहीं कर सका। उन्होंने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश में ठाकुरवाद, सामंतवाद और गुटबाजी को बढ़ावा दिया है, जिससे कांग्रेस पार्टी को भीतर से कमजोर किया गया है। चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि पिछले बीस वर्षों में दिग्विजय सिंह ने संगठनात्मक फैसलों, नेतृत्व चयन और राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और यही कारण है कि कई समर्पित कांग्रेसी नेता या तो हाशिए पर चले गए या राजनीति से बाहर हो गए।
DIGVIJAY SINGH की ‘संघ-स्तुति’ पर सवाल
निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह पर एक और गंभीर आरोप लगाते हुए यह सवाल उठाया कि क्या उनकी ‘संघ-स्तुति’ महज एक संयोग है, या फिर यह उनके पारिवारिक डीएनए का प्रभाव है? चतुर्वेदी ने लिखा, “दिग्विजय सिंह का नाता उस हिंदूवादी राजनीति से कितना पुराना है, जिसका वह विरोध करते हैं, यह बहुत कम लोगों को पता है।” उन्होंने यह भी कहा कि राघोगढ़ राजघराने की जड़ें हिंदू महासभा से जुड़ी रही हैं, और इस बात का उल्लेख कई पुस्तकों और शोधपत्रों में किया गया है, जिनमें The Saffron Tide भी शामिल है।
DIGVIJAY SINGH की प्रतिक्रिया
दिग्विजय सिंह ने अपनी पोस्ट में किसी भी राजनीतिक हलचल या आलोचना का प्रतिवाद नहीं किया। उनके बयान को लेकर पार्टी के भीतर कई अन्य नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिनमें से कई ने उनके बयान को पार्टी की प्रतिष्ठा के खिलाफ बताया है। हालांकि, कुछ कांग्रेसी नेता उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, यह साफ है कि पार्टी में इस मुद्दे को लेकर गहरे मतभेद हैं।
पार्टी में चल रहे विवाद का राजनीतिक असर
दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस पार्टी में खींचतान तेज हो गई है और इससे पार्टी के भीतर एक गहरा विवाद उत्पन्न हो सकता है। कांग्रेस के भीतर के कुछ नेताओं का कहना है कि दिग्विजय सिंह को अपनी बयानबाजी पर लगाम लगानी चाहिए, क्योंकि उनके बयान पार्टी के भीतर एकता को कमजोर करते हैं। वहीं, कुछ अन्य नेता मानते हैं कि उन्हें अपने विचार रखने का अधिकार है, लेकिन यह देखना होगा कि इस विवाद का पार्टी की आगामी रणनीतियों पर क्या असर पड़ता है।
DIGVIJAY SINGH और कांग्रेस का भविष्य
कांग्रेस पार्टी के भीतर इस तरह के विवाद पार्टी के लिए नई चुनौतियाँ पैदा कर सकते हैं। दिग्विजय सिंह का यह बयान एक बार फिर पार्टी के अंदर के संघर्षों को सामने ला सकता है। जब तक यह विवाद सुलझता नहीं है, तब तक पार्टी के लिए एकजुटता बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। कांग्रेस को अपने आंतरिक मतभेदों को सुलझाकर आगे बढ़ने की जरूरत है, ताकि आगामी चुनावों में पार्टी मजबूती से मैदान में उतरे।
निष्कर्ष
कांग्रेस के भीतर चल रहे इस विवाद ने पार्टी की राजनीति को एक नई दिशा में मोड़ दिया है। दिग्विजय सिंह का बयान पार्टी के भीतर न केवल उनके समर्थकों बल्कि विरोधियों के लिए भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। अब यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को किस दिशा में ले जाता है और क्या दिग्विजय सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं। पार्टी के अंदर और बाहर के इस विवाद का कांग्रेस के भविष्य पर गहरा असर पड़ सकता है, जिससे आगामी चुनावों में कांग्रेस की स्थिति पर भी प्रभाव पड़ेगा।
