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आत्मानुशासक ही श्रेष्ठ शासक, जो स्वयं पर शासन कर ले वही दुनिया पर शासन कर सकता है: आचार्य विशुद्धसागर

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Published On: 1 September 2026
आत्मानुशासक

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दिल्ली, ऋषभोदय में विराजित दिगम्बर जैन पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी गुरुदेव ने धर्म-सभा में सम्बोधन करते हुए कहा कि—आत्मानुशासक ही श्रेष्ठ-शासक

राजेश जैन दद्दू

अनुशासन-प्रिय, आत्मानुशासक ही देश-राष्ट्र का सच्चा-सम्राट (शासक) हो सकता है। राजा, सम्राट को मात्र स्वयं का ही हित नहीं सोचना चाहिए। सम्राट को मात्र स्वयं के देह-सुख, इन्द्रिय-सुख की चाह नहीं रखना चाहिए। सम्राट को देशहित, नागरिकों के हित में कार्य करना चाहिए।

जो शासक स्वयं के साथ प्रजा का भी ध्यान रखता है, उनके सुख-दुःख में सहभागी बनता है, नागरिकों की रक्षा करता है, वही श्रेष्ठ-स्वामी होता है। जो स्वयं पर अनुशासन कर लेता है, वही दुनिया पर शासन कर सकता है।
अनुशासन-प्रियता ही सज्जनता की पहचान

सज्जन-व्यक्ति ही अनुशासन-प्रिय हो सकता है। जो अनुशासन-प्रिय होता है, वही जीवन में सफलताएँ, प्रशंसा, सुख एवं शांति प्राप्त करता है। अनुशासन सिद्धि का साधन है। अनुशासन से ही व्यक्ति के कुल की पहचान होती है। अनुशासन-प्रिय कुलीन-पुरुष ही होते हैं। सज्जन, कुलीन-पुरुष विपत्ति आने पर भी अपना अनुशासन नहीं छोड़ते हैं।

प्रतिकूल मित्र, अनुकूल शत्रु

मित्र भी प्रतिकूल हो सकता है, शत्रु भी अनुकूल हो सकता है। जो मित्र कु-मार्ग पर लगाए, वह प्रतिकूल मित्र है, जो शत्रु कुकर्मों से बचा ले, वह अनुकूल शत्रु है।
राजेश जैन दद्दू

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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