—Advertisement—

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से 50 हजार के मुचलके पर जमानत मिली।

Author Picture
Published On: 16 September 2026
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से 50 हजार के मुचलके पर जमानत मिली।
— Bageshwar Dham Row: Dhirendra Shastri's Brother Walks Free on Bail After HC Relief

—Advertisement—

बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग को हाईकोर्ट से जमानत

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने मंगलवार, 15 सितंबर को उनकी जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। शालिग्राम को यह जमानत 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर दी गई है। इस आदेश के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है, हालांकि जमानत की शर्तें अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। यह पूरा मामला एक गोली चलाने की घटना से जुड़ा है, जिसने बागेश्वर धाम से जुड़े इस परिवार को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

क्या है पूरा मामला

यह घटना छतरपुर जिले के राजनगर थाना क्षेत्र की है, जो 14 जुलाई 2026 को घटी थी। शिकायतकर्ता मोतीलाल कुशवाहा ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि कुछ लोग उन्हें यह कहकर बरगद के चबूतरे पर ले गए कि “छोटे सरकार” उन्हें बुला रहे हैं। जब वे वहां पहुंचे तो कहासुनी शुरू हो गई। मोतीलाल के अनुसार, इसके बाद शालिग्राम गर्ग और उनके साथियों ने उनके साथ मारपीट की। सबसे गंभीर आरोप यह है कि शालिग्राम ने उन पर पिस्टल से गोली चला दी, जिससे मोतीलाल गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद पुलिस में मामला दर्ज कराया गया था।

जिला अदालत में पहले हुई थी अर्जी खारिज

शालिग्राम गर्ग की जमानत अर्जी सबसे पहले छतरपुर की जिला अदालत में दाखिल की गई थी। इस अर्जी पर विशेष न्यायाधीश निधि सक्सेना की अदालत में सुनवाई हुई। जिला अदालत ने 31 अगस्त 2026 को यह अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके बाद शालिग्राम की कानूनी टीम ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया और वहां जमानत की याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट में दोनों पक्षों — अभियोजन और बचाव पक्ष — की दलीलें सुनी गईं, जिसके बाद अदालत ने शालिग्राम को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत देने का फैसला सुनाया।

क्या होता है निजी मुचलका

बता दें कि निजी मुचलका जमानत प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा होता है। इसके तहत आरोपी अदालत के सामने यह जिम्मेदारी लेता है कि वह एक निर्धारित राशि जमा करेगा या जरूरत पड़ने पर अदालत में पेश होगा। यह जमानत की शर्तों के पालन को सुनिश्चित करने का एक तरीका है।

लगाई गई थीं ये गंभीर धाराएं

इस मामले में राजनगर थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। इनमें धारा 109(1), धारा 296(बी) और धारा 351(3) के साथ-साथ धारा 3(5) भी शामिल है, जो एक से ज्यादा लोगों की साझा भूमिका से जुड़ी होती है। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने शालिग्राम पर आर्म्स एक्ट (Arms Act) की धारा 25 और 27 भी लगाई हैं, जो हथियार से जुड़े अपराधों में लगाई जाती हैं। अब हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद यह देखना होगा कि मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp