इस्तीफे के बाद फिर एक्टिव हुए धर्मेंद्र प्रधान, Gen Z से बढ़ा रहे संवाद; क्या सियासी कमबैक की तैयारी?
जीएम यूनिवर्सिटी से दिल्ली विश्वविद्यालय तक छात्रों के बीच बढ़ी सक्रियता, युवा राजनीति को साधने की कोशिश के निकाले जा रहे सियासी मायने
नई दिल्ली, 21 अगस्त 2026। केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भाजपा सांसद धर्मेंद्र प्रधान एक बार फिर राजनीतिक रूप से सक्रिय नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि उनकी हालिया गतिविधियों के केंद्र में छात्र और Gen Z दिखाई दे रहे हैं। ओडिशा की जीएम यूनिवर्सिटी से लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय तक युवाओं के साथ लगातार संवाद और विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या धर्मेंद्र प्रधान अब एक नई रणनीति के साथ बड़े सियासी कमबैक की जमीन तैयार कर रहे हैं?
छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पेपर लीक से जुड़े विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। पद छोड़ते समय उन्होंने छात्रों के भविष्य और उनकी चिंताओं को प्राथमिकता देने की बात कही थी। इसके बाद कुछ समय तक उनकी राजनीतिक गतिविधियां अपेक्षाकृत सीमित रहीं, लेकिन अगस्त में वे दोबारा सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय दिखाई देने लगे हैं।
इस्तीफे के बाद छात्रों के बीच बढ़ी सक्रियता
मंत्री पद छोड़ने के बाद धर्मेंद्र प्रधान 9 अगस्त को ओडिशा की जीएम यूनिवर्सिटी से जुड़े एक कार्यक्रम में पहुंचे। यहां उन्होंने नई पीढ़ी और खास तौर पर Gen Z को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने युवाओं की आकांक्षाओं और उनकी आवाज को समझने पर जोर दिया।
इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच पहुंचे। यहां उन्होंने छात्र श्रीकृष्णा रंजन पात्रा की पुस्तक ‘द भारत मॉडल: नेविगेटिंग द 21स्ट सेंचुरी’ का विमोचन किया। पुस्तक में 21वीं सदी में विकसित भारत की यात्रा और इसमें युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा की गई है।
कार्यक्रम के दौरान धर्मेंद्र प्रधान छात्रों के साथ संवाद करते नजर आए। उन्होंने इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी साझा कीं। उनकी लगातार छात्र-केंद्रित गतिविधियों को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक इसे महज कार्यक्रमों में भागीदारी के बजाय युवाओं के साथ नए सिरे से जुड़ने की कोशिश के तौर पर भी देख रहे हैं।
Gen Z पर क्यों बढ़ा धर्मेंद्र प्रधान का फोकस?
भारत में Gen Z तेजी से सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप और पारदर्शिता जैसे मुद्दे युवा मतदाताओं को सीधे प्रभावित करते हैं।
धर्मेंद्र प्रधान की हालिया गतिविधियों में इन युवाओं के साथ सीधा संवाद प्रमुख रूप से दिखाई दे रहा है। जीएम यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में भी उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई पीढ़ी की आवाज को नजरअंदाज करने के बजाय उसे समझना जरूरी है।
उनका संदेश यह संकेत देता है कि वे युवाओं के विरोध और असहमति को केवल राजनीतिक चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि संवाद के अवसर के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं। यही वजह है कि छात्रों के बीच उनकी बढ़ती मौजूदगी के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।
युवाओं से सीधे संवाद की रणनीति
धर्मेंद्र प्रधान लंबे समय से संगठन और छात्र राजनीति से जुड़े रहे हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा का शुरुआती संबंध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से रहा है। ऐसे में छात्र संगठनों, कैंपस की राजनीति और युवाओं के मुद्दों से उनका परिचय पुराना है।
मौजूदा परिस्थितियों में यही अनुभव उनके लिए अहम साबित हो सकता है। छात्र आंदोलनों के बाद युवाओं के बीच जाकर बातचीत करना, उनके द्वारा किए जा रहे रचनात्मक कार्यों को मंच देना और विकसित भारत में उनकी भूमिका पर चर्चा करना उनकी नई राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
नई पीढ़ी पारंपरिक राजनीतिक भाषणों की तुलना में सोशल मीडिया, प्रत्यक्ष संवाद और मुद्दों पर स्पष्ट जवाब को ज्यादा महत्व देती है। ऐसे में प्रधान की सक्रियता को Gen Z के बीच अपनी स्वीकार्यता दोबारा मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
लखनऊ में भी दिखी राजनीतिक सक्रियता
छात्रों के कार्यक्रमों के अलावा धर्मेंद्र प्रधान हाल में लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुए। यहां उनकी मुलाकात भाजपा के कई नेताओं से हुई, जिनमें पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह भी शामिल थे।
इससे यह संकेत मिलता है कि उनकी सक्रियता केवल विश्वविद्यालयों और युवा संवाद तक सीमित नहीं है। वे सामाजिक, राजनीतिक और व्यावसायिक कार्यक्रमों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। इसे भविष्य की राजनीतिक भूमिका के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संसद में स्वागत ने भी खींचा था ध्यान
मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद जब धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे थे, तब भाजपा सांसदों की ओर से मिले स्वागत ने भी राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा था। इससे यह संदेश गया कि मंत्री पद छोड़ने के बावजूद पार्टी संगठन में उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता बनी हुई है।
धर्मेंद्र प्रधान भाजपा के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्हें संगठन और सरकार दोनों में लंबा अनुभव है। केंद्र सरकार में विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही वे कई राज्यों में भाजपा की चुनावी रणनीति से भी जुड़े रहे हैं। इसलिए उनकी हर नई राजनीतिक गतिविधि को भविष्य की संभावित भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या बड़े कमबैक की तैयारी है?
फिलहाल धर्मेंद्र प्रधान या भाजपा की ओर से उनकी किसी नई बड़ी जिम्मेदारी को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए उनकी मौजूदा सक्रियता को सीधे किसी पद या जिम्मेदारी से जोड़ना जल्दबाजी होगी। हालांकि छात्रों, Gen Z, सामाजिक कार्यक्रमों और पार्टी नेताओं के बीच लगातार बढ़ती मौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को जरूर हवा दी है।
एक ओर वे युवाओं की चिंताओं और आकांक्षाओं को समझने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक संपर्क भी बनाए हुए हैं। इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि मंत्री पद से इस्तीफा उनके सक्रिय राजनीतिक सफर पर विराम नहीं है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में धर्मेंद्र प्रधान की यह युवा-केंद्रित सक्रियता केवल संवाद कार्यक्रमों तक सीमित रहती है या भाजपा उन्हें संगठन अथवा सरकार में किसी नई महत्वपूर्ण भूमिका के लिए आगे लाती है। फिलहाल उनका Gen Z के बीच बढ़ता संपर्क भारतीय राजनीति में नई चर्चा का विषय बन चुका है।
