तिरला सांदीपनी विद्यालय में आदिवासी छात्रों के गंभीर आरोप, जांच के लिए टीम गठित
10 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे विद्यार्थी
Dhar । तिरला स्थित सांदीपनी विद्यालय के आदिवासी छात्र-छात्राओं ने विद्यालय की व्यवस्थाओं और एक शिक्षिका के व्यवहार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। अपनी शिकायत लेकर बड़ी संख्या में विद्यार्थी करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर धार जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। भीषण गर्मी और लंबी दूरी तय करने के कारण कई विद्यार्थियों की तबीयत भी खराब हो गई।
विद्यार्थियों ने जिला प्रशासन को आवेदन सौंपकर विद्यालय में कथित जातीय भेदभाव, मानसिक प्रताड़ना, छात्रावास की अव्यवस्थाओं और पढ़ाई प्रभावित होने जैसी समस्याओं की जानकारी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सहायक आयुक्त ने शिकायत पर जांच टीम गठित करने का आश्वासन दिया है।
रसायन शास्त्र शिक्षिका पर लगाए गंभीर आरोप
विद्यार्थियों ने सांदीपनी विद्यालय की रसायन शास्त्र शिक्षिका दीपिका शक्तावत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि पिछले करीब एक वर्ष से आदिवासी विद्यार्थियों के साथ कथित रूप से भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है।
छात्रों के अनुसार, शिक्षिका द्वारा उन्हें अपमानजनक और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर संबोधित किया जाता था। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि उन्हें पढ़ाई के प्रति हतोत्साहित किया जाता था और उनकी योग्यता को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती थीं।
छात्रों का कहना है कि इस तरह के व्यवहार से उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंची और मानसिक रूप से परेशानी का सामना करना पड़ा। विद्यार्थियों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विरोध करने पर धमकी देने का आरोप
विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने कथित व्यवहार का विरोध किया तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं। छात्रों का कहना है कि कई बार उन्होंने अपनी परेशानी विद्यालय स्तर पर बताने का प्रयास किया, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।
इसके बाद उन्होंने जिला प्रशासन से शिकायत करने का निर्णय लिया। विद्यार्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से इस समस्या का सामना कर रहे थे और अब मजबूरी में उन्हें पैदल चलकर अधिकारियों तक पहुंचना पड़ा।
प्राचार्या पर भी उठाए सवाल
विद्यार्थियों ने विद्यालय प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। छात्रों का कहना है कि उन्होंने विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती सीमा मिश्रा को इस संबंध में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन आरोपों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
विद्यार्थियों का आरोप है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि विद्यालय प्रबंधन की भूमिका की भी जांच की जाए और विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर भी शिकायत
आदिवासी विद्यार्थियों ने छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर भी शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रावास में भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। कई बार भोजन में कीड़े मिलने जैसी समस्याएं सामने आई हैं।
विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें पर्याप्त और पौष्टिक भोजन उपलब्ध नहीं कराया जाता। इसके अलावा छात्राओं से छात्रावास में साफ-सफाई और झाड़ू लगाने जैसे कार्य करवाने का भी आरोप लगाया गया है।
आवेदन में आर्थिक सहायता से जुड़ी शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि पूर्व छात्रावास अधीक्षक के कार्यकाल में शासन से मिलने वाली कुछ सहायता राशि को लेकर अनियमितताएं हुई थीं। विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया कि यह आरोप वर्तमान छात्रावास अधीक्षक से संबंधित नहीं हैं।
विज्ञान विषय की पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप
विद्यार्थियों ने यह भी बताया कि पिछले करीब 15 दिनों से विज्ञान विषय की कक्षाएं नियमित रूप से संचालित नहीं हो रही हैं। इसके कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है और परीक्षा की तैयारियों पर भी असर पड़ रहा है।
छात्रों ने प्रशासन से मांग की कि विद्यालय में नियमित कक्षाएं संचालित कराई जाएं और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए।
सहायक आयुक्त ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
कलेक्टर कार्यालय पहुंचने के बाद विद्यार्थियों ने अपना आवेदन सहायक आयुक्त को सौंपा। सहायक आयुक्त ने विद्यार्थियों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा कि शिकायत में बताए गए सभी बिंदुओं की निष्पक्ष और सूक्ष्म जांच के लिए टीम गठित की जाएगी। जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सहायक आयुक्त ने विद्यालय और छात्रावास की व्यवस्थाओं की समीक्षा करने तथा आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने की बात भी कही।
जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
आदिवासी छात्र-छात्राओं की शिकायत के बाद अब सभी की नजर प्रशासन की जांच प्रक्रिया और रिपोर्ट पर है। विद्यार्थियों ने उम्मीद जताई है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और उन्हें न्याय मिलेगा।
प्रशासन ने भी विद्यार्थियों को भरोसा दिलाया है कि उनकी शिक्षा, सुरक्षा और सुविधाओं से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रिपोर्ट: नरेंद्र सिरवी, तिरला
