कपास के गिरते भाव पर किसानों की चिंता, ₹12 हजार प्रति क्विंटल मूल्य की मांग
सुनील स्टार चौहान ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की, कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर किसानों की समस्या उठाई
Dhar । कपास के बाजार भाव में आई गिरावट को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। धार जिले में कपास उत्पादक किसानों की स्थिति को लेकर आदिवासी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सुनील स्टार चौहान ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कपास के लिए ₹12,000 प्रति क्विंटल का उचित एवं लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किए जाने की मांग उठाई है।
सुनील स्टार चौहान के अनुसार, कपास के भाव में हाल के दिनों में करीब ₹1,000 से ₹1,500 प्रति क्विंटल तक की गिरावट आई है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में कपास का बाजार भाव लगभग ₹5,800 से ₹6,000 प्रति क्विंटल के आसपास है। उनके मुताबिक, खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए इस कीमत पर किसानों के लिए उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
बढ़ती लागत से किसानों पर आर्थिक दबाव
सुनील स्टार चौहान ने कहा कि कपास की खेती में किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, मजदूरी और अन्य कृषि सामग्री पर लगातार बढ़ता खर्च करना पड़ रहा है। किसान पूरे सीजन मेहनत और संसाधन लगाने के बाद जब अपनी उपज बाजार में लेकर पहुंचता है, तो यदि उसे लागत के अनुरूप कीमत नहीं मिलती, उसकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि किसानों के सामने उत्पादन लागत के साथ-साथ कृषि ऋण और अन्य आर्थिक जिम्मेदारियां भी रहती हैं। ऐसे में बाजार भाव में गिरावट किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव पैदा कर सकती है।
₹12 हजार प्रति क्विंटल की मांग
आदिवासी कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने सरकार से कपास के लिए ₹12,000 प्रति क्विंटल का उचित एवं लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि कपास उत्पादक किसानों को उनकी मेहनत और उत्पादन लागत के अनुरूप बेहतर मूल्य मिलना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि किसानों के हित में सरकार को कपास के वर्तमान बाजार भाव की स्थिति को गंभीरता से देखते हुए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। इसी मांग को लेकर धार कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन और सरकार का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित किया जा रहा है।
कृषि मंत्री से भी हस्तक्षेप की अपील
सुनील स्टार चौहान ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी कपास उत्पादक किसानों की स्थिति पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने मांग की कि कपास के गिरते भाव को लेकर आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर और सम्मानजनक मूल्य मिल सके।
उन्होंने कहा कि किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था कृषि उपज के बाजार मूल्य से सीधे जुड़ी है। यदि किसानों को उत्पादन लागत के अनुरूप मूल्य नहीं मिलता है, तो इसका असर खेती के अगले चक्र और ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
किसान और बाजार दोनों की सुरक्षा पर जोर
सुनील स्टार चौहान ने कहा कि किसान के लिए खेत और बाजार दोनों का सुरक्षित रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलने पर ही खेती को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि कई किसान कृषि कार्यों के लिए बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेते हैं। ऐसे में उपज का अपेक्षित मूल्य नहीं मिलने पर उनके आर्थिक दायित्व बढ़ सकते हैं। इसलिए सरकार को किसानों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए समय पर आवश्यक निर्णय लेना चाहिए।
किसानों की आवाज उठाने का दावा
सुनील स्टार चौहान ने कहा कि किसानों के हित और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया जाता रहेगा। उन्होंने कपास उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की मांग को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि इस विषय को प्रशासन और सरकार के समक्ष लगातार रखा जाएगा।
फिलहाल कपास के बाजार भाव में गिरावट और किसानों द्वारा मांगे जा रहे ₹12,000 प्रति क्विंटल मूल्य को लेकर आगे सरकार और संबंधित विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर किसानों की नजर बनी हुई है।
