मेडीकैप्स विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय संगोष्ठी में धार सीमेंट वर्क्स का जल संरक्षण मॉडल बना आकर्षण का केंद्र
संवाददाता :कौशिक पंडित
मनावर/Dhar । मेडीकैप्स विश्वविद्यालय, इंदौर में आयोजित “एकीकृत जल प्रबंधन (Integrated Water Management)” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में धार सीमेंट वर्क्स द्वारा जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की विशेष सराहना की गई। संगोष्ठी में धार सीमेंट वर्क्स के संस्थान प्रमुख श्री नीतेश निराला ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता करते हुए कंपनी की जल संरक्षण पहलों और सतत विकास मॉडल की जानकारी प्रस्तुत की।
श्री निराला ने अपने मुख्य उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में जल संरक्षण देश और समाज के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक है। जल संसाधनों का संरक्षण केवल किसी एक संस्था या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों और समाज के प्रत्येक वर्ग को मिलकर इस दिशा में कार्य करना होगा।
उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन को लेकर मेडीकैप्स विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर संगोष्ठी आयोजित करना एक सराहनीय पहल है, जिससे जल संरक्षण के क्षेत्र में नई सोच और बेहतर तकनीकों के आदान-प्रदान का अवसर मिलता है।
माइंस क्षेत्र में बनाए गए चेक डैम, गांवों में भी CSR के तहत कार्य
श्री निराला ने धार सीमेंट वर्क्स द्वारा किए जा रहे जल संरक्षण कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि कंपनी ने एकीकृत जल प्रबंधन के तहत माइंस क्षेत्र में कई चेक डैम का निर्माण कराया है। इसके साथ ही कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के अंतर्गत आसपास के गांवों में भी जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 17 चेक डैम बनाए गए हैं।
इन जल संरचनाओं के निर्माण से वर्षाजल को रोकने और भूजल पुनर्भरण में महत्वपूर्ण मदद मिली है। उन्होंने बताया कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप मनावर एवं खदान क्षेत्र के आसपास भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला है। इससे स्थानीय क्षेत्र में जल उपलब्धता बढ़ी है और पर्यावरणीय संतुलन को भी मजबूती मिली है।
कंपनी द्वारा जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण-अनुकूल खनन की दिशा में भी कई कदम उठाए जा रहे हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को संतुलित रखना है।

विशेषज्ञों ने बताया अनुकरणीय मॉडल
राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से आए जल विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने एकीकृत जल प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के चेयरपर्सन श्री जगदीश सिंघल, डॉ. जगदीश गर्ग सहित कई गणमान्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे। उन्होंने जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और सतत विकास से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए।
संगोष्ठी के दौरान धार सीमेंट वर्क्स द्वारा अपनाए जा रहे जल प्रबंधन मॉडल की विशेषज्ञों ने जमकर सराहना की। विशेषज्ञों ने कहा कि उद्योगों द्वारा पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन की दिशा में किए जा रहे ऐसे प्रयास आने वाले समय में जल संकट से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों ने धार सीमेंट वर्क्स के माइंस क्षेत्र में बनाए गए चेक डैम, वर्षाजल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की पहल को प्रभावी और अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि उद्योगों को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय समुदाय के विकास में भी सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
उन्होंने धार सीमेंट वर्क्स के एकीकृत जल प्रबंधन, पर्यावरण-अनुकूल खनन और CSR के माध्यम से किए जा रहे कार्यों को अन्य औद्योगिक संस्थानों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। विशेषज्ञों का कहना था कि जब उद्योग और स्थानीय समुदाय मिलकर जल संरक्षण के लिए कार्य करते हैं तो क्षेत्र में सकारात्मक और दीर्घकालिक बदलाव संभव होते हैं।
संगोष्ठी में यह भी कहा गया कि जल संरक्षण आज केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक आवश्यकता बन चुका है। ऐसे में सामूहिक प्रयासों और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से जल संसाधनों का संरक्षण करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। धार सीमेंट वर्क्स की पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
जल संरक्षण और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने धार सीमेंट वर्क्स प्रबंधन को जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और सतत खनन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों के लिए बधाई दी।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में उद्योगों की भूमिका केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास में भी सक्रिय योगदान देना चाहिए। धार सीमेंट वर्क्स द्वारा किए जा रहे प्रयास इसी दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई कि कंपनी भविष्य में भी जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका जारी रखेगी। उद्योग और समाज के सहयोग से विकसित यह मॉडल देश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी मार्गदर्शक साबित हो सकता है।
